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Thursday 4th of June 2020
 
खेल

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम कमा रहे हैं शिक्षा नगरी कोटा के होनहार खिलाड़ी

Thursday, November 07, 2019 12:10 PM
कोटा में बॉक्सिंग और वुशु की खिलाड़ी

कोटा। शिक्षा नगरी कोटा देश को भावी डॉक्टर्स और इंजीनियर्स ही नहीं दे रही है बल्कि खेलों में भी यहां की प्रतिभाओं ने विश्व में अपना लोहा मनवाया हैं। कोटा की कई महिला खिलाड़ी हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल प्राप्त किया हैं। शहर की लड़किया खेलों में लड़कों से किसी भी तरह पीछे नहीं हैं।

यहां की लड़कियां वुशु और बॉक्सिंग में कई उपलब्धियां हासिल कर रही है। एक समय था जब इन खेलों को लड़कियां नहीं खेलती थी। आज स्थिति यह है कि इन खेलों में लड़कियां अच्छे परिणम दे रही है। इन खेलों को सीखने में उनका रुझान बढ़ा है। 20-25 लड़कियां राष्ट्रीय स्तर पर मेडल प्राप्त कर चुकी हैं और करीब पचास लड़कियां नेशनल खेल चुकी हैं। लड़कियों के लिए मार्शल आर्ट की विधा में वुशु सबसे अच्छी आर्ट है। इस आर्ट के एक्सपर्ट बताते है कि लड़कियों को सीखना वुशु सबसे अच्छा है। वुशु-ताइक्वांडो, बॉक्सिंग और कुश्ती की मिश्रित मार्शल आर्ट है। इसे सीखने के लिए कम से कम उम्र पांच वर्ष होना चाहिए। इस आर्ट को तीन महीने और एक साल में भी सीख सकते हैं। पढ़ाई के साथ-साथ में भी लड़कियां वुशु को सीख सकती है और अपनी सुरक्षा कर सकती है। 

 

 
अरुंधति बनी प्रेरणा
कोटा की अरुंधति चौधरी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई गोल्ड मेडल प्राप्त किए है। अरुंधति को जूनियर कैटेगरी में एशिया का बेस्ट बॉक्सर चुना जा चुका है। खेलो इंडिया में भी चयनित हो चुकी है। अरुंधति स्टार बनकर चमकी और अन्य लड़कियों के लिए प्रेरणा बनी । खेलो इंडिया में निशा गुर्जर भी चयनित हो चुकी है। वर्ष 2020 में होने वाले खेलो इंडिया में ईशा गुर्जर का भी चयन हो गया है। दिव्यांशी, नीलम कुमावत भी ताइक्वांडो, वुशु और बॉक्सिंग की अच्छी खिलाड़ी है। जिन्होंने नेशनल में गोल्ड मेडल प्राप्त किया है। पहले भी वर्ष 2004 से वर्ष 2010 तक लगातार शहर की लड़कियां जूडो और कुश्ती में अंतरराष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी रह चुकी है।
 
अंतरराष्ट्रीय  खिलाड़ी रेखा राठौड़ ने वर्ष 2005 में शिमला में अंतरराष्ट्रीय स्तर  के सलेक्शन में साक्षी मलिक को कुश्ती में हराकर गोल्ड मेडल लाई और वर्ष 2005 में ही जापान में कुश्ती में सिल्वर मेडल प्राप्त किया। इनके अलावा मोनिका मलिक, मीनाक्षी गर्ग, गगनप्रीत कौर जूडो और कुश्ती की अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी है। 
 
सुविधाओं की कमी
कोटा की लड़कियां लगातार वुशु और बॉक्सिंग में उपलब्धियां हासिल कर रही है। इसके बावजूद भी शहर में वुशु सिखाने की जगह नहीं है। सरकारी स्तर पर भी ट्रेनिंग की उचित व्यवस्थाएं नहीं है। इक्विपमेंट्स नहीं है। वुशु रिंग और बॉक्सिंग रिंग नहीं है। उम्मेदसिंह स्टेडियम में एक हॉल महाबली स्पोर्ट्स एकेडमी को  उपलब्ध करवा रखा है। जहां कुल 80 बच्चे टेÑनिंग प्राप्त कर रहे है जिनमें 30 लड़कियां और 50 लड़के है। काफी सारे बच्चे बाहर से टेÑनिंग लेकर आते है। टेÑनिंग के लिए हरियाणा-दिल्ली जाते है। जब टूर्नामेंट्स होते हैं उन्हें बुला लिया जाता है। इन खेलों के कोच का कहना है कि सरकार की तरफ से कोई सुविधा नहीं है। यही कारण है कि बच्चों को बाहर ट्रेनिंग के लिए जाना पड़ता है। एक बॉक्सिंग एकेडमी खोलने के लिए 15-20 लाख का खर्चा आता है। बॉक्सिंग 5-6 लाख में आता है। रिंग नहीं है तो प्रॉपर ट्रेनिंग कैसे दे सकेगें।
 
शहर में वुशु, बॉक्सिंग, ताइक्वांडो के ट्रेनिंग सेंटर
- महाबली स्पोर्ट्स एकेडमी, मार्शल आर्ट ट्रेनिंग सेंटर, उम्मेद सिंह स्टेडियम, नयापुरा।
- देवभूमि जूडो-कुश्ती प्रशिक्षण केन्द्र, जवाहर नगर।
- श्रीनाथपुरम स्टेडियम, जीएडी सर्किल कोटा।
- क्षेत्रीय खेलकूद प्रशिक्षण केन्द्र, उम्मेद सिंह स्टेडियम, नयापुरा।

दैनिक नवज्योति ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल प्राप्त कर चुकी खिलाड़ियों से उनकी उपलब्धियों के बारे में जाना-
 
बॉक्सर अरुंधति चौधरी के पिता  सुरेश चौधरी ने बताया हाइट अच्छी होने के कारण स्कूल में बॉस्केटबॉल खेलती थी। तब अरुंधति 11 साल की थी। पढ़ाई में भी बहुत अच्छी थी। मैं नहीं चाहता था कि यह स्पोर्ट्स खेले। पढ़ाई में बहुत बढ़िया होने से मैं चाहता था कि एकेडमिक लाइन में जाए। लेकिन इसने जिद पकड़ ली मुझे स्पोर्ट्स खेलना है। मैंने कहा खेलना है तो सोलो गेम खेलो। तीन गेम सुझाएं टेनिस, बैडमिन्टन और बॉक्सिंग। इसने बॉक्सिंग की रट पकड़ ली। फिर मैंने अपने मित्र से कहा कि हरियाणा में कोच हो तो बताओ। मित्र ने कहा कि देश के सारे बच्चे कोटा में पढ़ने आ रहे है और आप स्पोर्ट्स खिला रहे है। मेरे मित्र ने भी अरुंधति को बहुत समझाया। समझाने के बाद जब वह उठने लगे तो बोली खेलूंगी तो स्पोर्ट्स ही। मेरे तीनों बच्चों में अरुंधति लाड़ की है। मैं उसकी जिद के सामने हार गया। तब उसके लिए कोच अशोक गौतम का चयन किया। वह मेहनती इतनी थी कि सुबह तीन बजे उठती। पौने चार बजे एरेना में जाना। सात बजे तक प्रैक्टिस करके बिना कुछ खाए पीए स्कूल जाती। वहां से करीब ढाई बजे आती, फिर शाम को चार-साढ़े चार बजे खेलने जाती। मई 2016 से सीखना शुरू किया। बॉक्सिंग में स्टेट लेवल पर गोल्ड मेडल जीता। फिर नेशनल में चयन हो गया, वहां पहली बार में ही गोल्ड मेडल लिया और बेस्ट बॉक्सर टूर्नामेंट का खिताब लिया। यह वर्ष 2017 की बात है। जब मैंने इसके अचिवमेंट देखें, तब मैंने मन से इसे सपोर्ट किया। अब तक करीब पांच बार इंटरनेशनल लेवल पर गोल्ड मेडल ले चुकी है। वर्ष 2017 और वर्ष 2018 में खेलो इंडिया में भी गोल्ड मेडल लिया। वर्ष 2018 जूनियर कैटेगरी में बैंकाक, थाईलैंड में बेस्ट बॉक्सर आॅफ एशिया का अवॉर्ड मिला। अभी वह उल्लंबाटर मंगोलिया में यूथ मैन एंड वूमैन एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में 69 किग्र्रा. भार वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व करने गई है। अरुंधति का लगातार सातवीं बार अंतरराष्ट्रीय बॉक्सिंग प्रतियोगिता के लिए भारतीय टीम में चयन हुआ है। 9 जनवरी 2019 को पूना में खेलो इंडिया का दूसरा टूर्नामेंट था। वहां हर खेल  से एक बेस्ट प्लेयर को लेना था। पूरे भारत से अरुंधति का बॉक्सिंग में चयन हुआ। वहां 18 प्लेटफॉर्म बने थे। 18 बच्चों के साथ किसी की मां थी तो किसी के पिता थे। मैं अरुंधति के साथ था। वह पल मेरे लिए बहुत ही गर्व का था। मेरी गॉड गिफ्टेड बेटी है।
 

 बॉक्सिंग खिलाड़ी  निशा गुर्जर का कहना है पापा ने मुझे और मेरी बहन ईशा को प्रेरित किया । पापा रेसलर है। उन्होंने हमें सिखाने के लिए पहले घर पर ही पर्सनल ट्रेनर लगवाया। फिर महाबली स्पोर्ट्स एकेडमी में कोच अशोक गौतम से ट्रेनिंग लेने लगे। वर्ष 2012 से ताइक्वांडो सीख रही थी। वर्ष 2018 में बॉक्सिंग शुरू किया। मेरी सीनियर अरुंधति चौधरी को देख कर बॉक्सिंग सीखने को प्रेरित हुई। अभी दसवीं कक्षा में पढ़ रही हूं। कैथून  के पास नगपुरा गांव से है। हम दोनों बहनें पहली लड़कियां है। जो गांव से बाहर निकली है। लोगो की यह प्रतिक्रिया होती थी कि क्यों लड़कियों को आगे बढ़ा रहे हो। लेकिन पापा का हमें पूरी तरह सपोर्ट करते है। स्पोर्ट्स को ही कॅरियर बनाना है। बॉक्सिंग में इन्टरनेशनल खिलाड़ी बनना है। हम दोनों बहनें नेशनल में गोल्ड मैडल जीत चुके है। खेलों इंडिया में अण्डर 17 में ब्रॉन्ज मेडलिस्ट हूं।
 
 
वुशु खिलाड़ी दिव्यांशी का कहना है नौ साल की उम्र से वुशु सीख रही हूं। पहले स्केटिंग सीखती थी। मम्मी मुझे लेकर आती थी। फिर एक बार स्टेडियम में मम्मी नें देखा कि यह किस खेल की प्रेक्टिस बच्चे कर रहे है। उन्होंने पूछा कि यह क्या होता है, कैसे खेलते है तब कोच अशोक गौतम ने बताया कि इस खेल के बारे में तब मैंने 1-2 महीने देखा कि कैसा है। मुझे वुशु पसंद आया तब से मैं यह सीख रही हूं। राज्य स्तर पर मैंने गोल्ड मैडल लिया है। पढ़ाई के साथ- साथ मैं रोज तीन घंटे प्रेटिक्स को देती हूं। अभी मैं छठी क्लास में हूं। पढ़ाई में भी मुझे आगे जाना है साथ ही वुशु में ओलंपिक में जाने का सपना है। 
   

वुशु खिलाड़ी नीलम कुमावत का कहना है मैं छठी क्लास में पढ़ रही हूं। वर्ष 2017 से ही वुशु सीख रही हूं। पहले ताइक्वांडो सीखती थी। मेरी उम्र के अन्य बच्चे वुशु करते थे उसके बाद मैंने भी इसे सीखना शुरू कर दिया। ताइक्वांडो में वर्ष 2016 में पहली बार ही स्टेट गोल्ड लिया था। उसके बाद अलवर में 2017 वर्ष में स्टेट गोल्ड लिया। 2017 में ही दौसा में ही स्टेट गोल्ड मेडल हासिल किया। जम्मू और कश्मीर में नेशनल में सिल्वर मेडल लिया था। पढ़ाई भी करनी है पर मेरी रूचि स्पोर्ट्स में है। मम्मी-पापा प्रेक्टिस के लिए लेकर आते है उनका सपोर्ट मेरे साथ है।
  
 
 
देवभूमि जूड़ो कुश्ती प्रशिक्षण केन्द्र के संचालक एवं  जूड़ो-कुश्ती के कोच रवि गुप्ता ने बताया सरकारी स्कूल में शारीरिक शिक्षक के पद पर कार्यरत रह चुका हूं। जिस स्कूल में पोस्टिंग थी वहीं पर ही अपने स्तर पर जो भी संसाधन थे उन्हीं से प्रशिक्षण देना शुरू किया। वर्ष 2004 में अपनी एकेडमी शुुरू की। स्कूल में जगह कम  पड़ती थी। घर की छत पर सिखाता था। जवाहर नगर में जमीन खरीदी और अपनी एकेडमी शुरू की। जूड़ो- कुश्ती में प्रशिक्षण प्राप्त मेरी कई शिष्याएं अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी है।  मेरी सिखाई हुई लड़कियों में रेखा राठौड़, मोनिका मलिक, मीनाक्षी गर्ग, गगनप्रीत कौर अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी है।  आज भी मैं बच्चों को नि:शुल्क सिखा रहा हूं।
 
महाबली स्पोर्ट्स एकेडमी के फाउंडर एवं कोच अशोक गौतम ने बताया पारिवारिक स्थिति अच्छी नहीं थी, पढ़ाई भी ज्यादा नहीं कर सकें, स्पोर्ट्स में शुरू से ही अच्छे थे। ताइक्वांडो और वुशु में नेशनल स्तर पर खेला। बॉक्सिंग में वर्ष 2011 में स्टेट लेवल पर सिल्वर मेडलिस्ट हूं। कुश्ती में 18 बार स्टेट लेवल पर खेला। आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने कारण आगे नहीं बढ़ सका। तब मैंने सोचा कि मेरे में जो टेलेंट है, उसे अन्य बच्चों में बांटू। जिससे उनकी प्रतिभा निखर सकें और वे आगे बढ़े। परेशानियां तो बहुत आई। वर्ष 2003 में एक सामूहिक भवन में सिखाना शुरू किया। 250 बच्चें आने लगे। उन्हें नि:शुल्क सिखाता था। बाद में 50 रुपए महीना लेने लगा और धीरे-धीरे इक्किपमेंट खरीदें और आगे बढ़ता गया। वर्ष 2003 में ताइक्वांडो सिखाता था। फिर 2009 में वुशु सिखाना शुरू किया। वर्ष 2009 में ही एक शिष्य नेशनल में ब्रॉन्ज मेडल लाया। फिर वर्ष 2013 में वुशु में राजस्थान को पहला अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी दिया। जो सिल्वर मेडल लाया था। वर्ष 2015 में कोरिया वर्ल्ड चैंपियनशिप में ताइक्वांडो में एक शिष्य का चयन हुआ। वर्ष 2016 से बॉक्सिंग सिखाने लगा। इसमें मेरी शिष्य अरूंधती चौधरी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम रोशन किया। वर्ष 2017 से वुशु और बॉक्सिंग में खिलाड़ी तैयार कर रहा हूं। 
 

श्रीनाथपुरम स्टेडियम में राष्ट्र स्तरीय ताइक्वांडो कोच अनिल कुमार ने बताया मैंने चार साल की उम्र से ताइक्वांडो सीखना शुरू किया। कोटा व बंगलुरु, अहमदाबाद आदि अलग- अलग शहरों में इसका प्रशिक्षण लिया। नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट हूं। 16 बार नेशनल लेवल पर खेल चुका हूं। थर्ड डेन ब्लैक बेल्ट हूं। पिछले दस सालों से ताइक्वांडो का प्रशिक्षण दे रहा हूं। अभी 50 स्टूडेंट् नियमित रूप से सीखने आ रहे है। कई स्टूडेन्ट राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भाग ले चुके है  शहर में करीब 28 हजार लड़कियों को सेल्फ डिफेन्स की ट्रेनिंग दी है। आज जिस मुकाम पर हूं यहां तक पहुंचने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा। मैं फेम चाहता था। इसलिए कोच बना। जिससे ताइक्वांडो में बच्चों को सिखा कर उनकी प्रतिभा को आगे बढ़ा सकूं।
 
 
अधिकारियों का कहना
यूआईटी सचिव भवानी सिंह पालावत का कहना है अभी डीपीआर बनने की प्रक्रिया में है। डीपीआर बनने के बाद जल्दी ही काम शुरू कराया जाएगा।
 
 
जिला खेल अधिकारी महेश गौतम  का कहना है स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत यूआईटी की वर्किंग एजेन्सी निर्माण कार्य करने जा रही है। डीपीआर बना रही है। स्मार्ट सिटी के तहत डवलपमेंट होने जा रहा है इसमें स्पोर्ट्स के लिए पहली बार 25 करोड रूपए स्मार्ट सिटी के तहत सेंशन हुए हैं। जेके पेवेलियन प्रिमाइसिस में बास्केटबॉल, वॉलीबॉल, हॉकी के लिए एस्ट्रो एरेना, हैंडबॉल और मल्टीपरपज इंडोर स्टेडियम बनाने का प्लान है। उम्मेद सिंह स्टेडियम में सिंथेटिक एथलेटिक ट्रेक का भी प्रोवीजन है। सभी खेलों की सुविधाएं इसमें रहेगी।
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