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तेजी से गिर रही देश की आर्थिक विकास दर, दूसरी तिमाही में 4.5 प्रतिशत

Friday, November 29, 2019 17:50 PM
कांसेप्ट फोटो

नई दिल्ली। आर्थिक सुस्ती के कारण विनिर्माण, कृषि और खान एवं खनन क्षेत्र के निराशाजनक प्रदर्शन से चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 26 तिमाहियों के निचले स्तर 4.5 प्रतिशत पर आ गई, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 7.0 प्रतिशत रही थी। इस अवधि में सकल मूल्य संवर्धन (जीवीए) वृद्धि दर 4.3 प्रतिशत रही जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 6.9 प्रतिशत रही थी। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 5.0 प्रतिशत रही थी। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही की जीडीपी वृद्धि दर जनवरी मार्च 2013 की तिमाही के बाद का निचला स्तर है।

कोर उत्पादन में भी गिरावट
विनिर्माण क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों के धीमे पड़ने से औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (कोर उत्पादन) में शामिल 8 उद्योगों का उत्पादन मौजूदा वर्ष के अक्टूबर में 5.8 प्रतिशत गिरावट में दर्ज किया गया है। चालू वित्त वर्ष में कोर उत्पादन में 0.2 प्रतिशत की गिरावट आई है। इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में कोर उत्पादन की दर 4.8 प्रतिशत रही थी। वर्ष 2018 के अक्टूबर में कोर उत्पादन की दर 4.8 प्रतिशत थी। सितंबर 2019 में यह आंकड़ा 5.1 प्रतिशत गिरावट में था। कोर उत्पादन में लगातार दूसरे महीने गिरावट की गई है। कोर उत्पादन समूह में बुनियादी क्षेत्र के आठ उद्योग कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी, उवरक, इस्पात, सीमेंट और बिजली शामिल होते हैं।

विनिर्माण गतिविधियों में नकारात्मक बढ़ोतरी
केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा यहां जारी आंकड़ों के अनुसार देश में विनिर्माण गतिविधियों में नकारात्मक बढ़ोतरी देखी गई है जिसके कारण विकास पर भारी दबाव बना है। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 2.1 प्रतिशत रही है जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 4.9 प्रतिशत रही थी।

50 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था लक्ष्य हुआ दूर
आर्थिक मामलात विभाग के पूर्व सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) को लेकर आंकड़े जारी किए जाने के बाद कहा कि 50 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य एक वर्ष पिछड़ गया है। उन्होंने अपने ब्लॉग में कहा कि रियल टाइम के मामले में जीडीपी वृद्धि दर एक दशक के निचले स्तर पर आ गई है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1991 में आर्थिक उदारीकरण के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था कभी-कभार ही पांच प्रतिशत से कम दर से बढ़ी है। उन्होंने लिखा कि तकनीकी तौर पर देखा जाए तो भारत मंदी के चपेट में नहीं है क्योंकि विकसित देशों की विकास दर 0.3 प्रतिशत है।

हमलावर हुई कांग्रेस
कांग्रेस ने जीडीपी में रिकॉर्ड गिरावट को लेकर मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि ‘मोदीनॉमिक्स’ और ‘पकौड़ाइकोनोमिक’ भारतीय अर्थव्यवस्था को ले डूबी। कांग्रेस के मीडिया प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में जीडीपी के आंकड़े जारी होने के बाद कहा कि भाजपा को जीडीपी का अर्थ केवल ‘गोडसे डिवाइसिव पोलिटिक्स’ समझ में आता है। मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था गंभीर मंदी में फंस गई है। इस स्थिति के बारे में साख निर्धारण एजेंसियों ने विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, मूडीज, फिच, भारतीय जनता पार्टी और भारतीय स्टेट बैंक ने आशंका जताई थी।

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