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Thursday 21st of November 2019
 
जोधपुर

सलाखें मोड़ कर निकला, सरगर्मी से तलाश, अपहरण के प्रकरण में लाया गया था पेशी पर कोर्ट परिसर की अस्थाई हवालात से कै दी भागा

Wednesday, October 16, 2019 02:20 AM
सर्च अभियान के तहत पुलिस की टीम कैदी को तलाशती एवं फरार कैदी

जोधपुर । जोधपुर केंद्रीय कारागाह से बुधवार को पेशी पर लाया गया एक कैदी कोर्ट परिसर में सलाखें मोड़ कर भाग निकला। इसकी जानकारी मिलते ही पुलिस व चालानी गार्ड में हड़कंप मच गया। देर रात तक उसका पता नहीं लगा। पुलिस ने नजदीक पब्लिक पार्क, रेलवे स्टेशन और बस स्टॉप आदि जगहों पर सर्च अभियान चलाया। मगर वह रात तक नहीं मिल पाया।  पुलिस ने बताया कि पीपाड़ रोड के रहने वाले जितेंद्र सिंह उर्फ जीतू पुत्र कल्याण सिंह राजपूत को वर्ष 2016 मार्च में अपहरण के एक मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। इसकी बुधवार को पेशी थी।


तब केंद्रीय कारागाह से 20 बंदियों को चालानी गार्ड लेकर कोर्ट आए थे। शाम सवा चार बजे से पहले जितेंद्र की पेशी होने पर उसे कोर्ट परिसर की अस्थाई हवालात में डाला गया था।  इसी बीच वह कोर्ट परिसर की बैरक के सलाखें काटने के साथ लोहे का दरवाजें काट कर निकल गया। वह पिछले रास्ते से निकल गया। इसके बाद गिनती करने पर वह बैरक में नहीं मिलने पर तत्काल पुलिस अधिकारियों को सूचना दी गई। इस पर शहर के आस पास रेलवे स्टेशन, बस स्टॉप एवं पब्लिक पार्क एरिया में उसकी तलाश करवाई गई। मगर उसका पता रात तक नहीं चल पाया।


बच्चे का अपहरण किया था
प्रथम दृष्टया बताया गया कि उसने वर्ष 2016 मार्च में एक बच्चे का चार लोगों के साथ अपहरण किया था। इसमें वह मुख्य आरोपी था। बच्चे के पिता बनाड़ के नांदड़ी निवासी सियाराम की तरफ से बनाड़ थाने में अपहरण की रिपोर्ट दी गई थी। 16 मार्च 16 को उसे जेल भेजा गया था। इसके बाद उसकी कोर्ट में पेशियां चल रही थी।


एडीजे कोर्ट संख्या 4 में थी पेशी
पुलिस सूत्रों के अनुसार जितेंद्र सिंह की पेशी आज एडीजे कोर्ट संख्या 4 में पेशी थी। पेशी के बाद उसे कोर्ट की बैरक में डाला गया था। इसके बाद सवा चार बजे उसकी फरारी का पता लगा।


डेढ़ करोड़ की मांगी थी फिरौती
वक्त घटना मार्च 16 में आरोपी जितेंद्र सिंह और उसके सहयोगियों ने बच्चे के अपहरण के लिए डेढ़ करोड़ की फिरौती मांगी थी। मगर पुलिस ने उससे पहले ही गिरफ्तार कर लिया।


योजनाबद्ध कार्य को दिया अंजाम
संदेह है कि इस पूरे घटनाक्रम को योजनाबद्ध तरीके से किया गया है। सबसे बड़ी बात है कि जितेंद्र के पास कटर कहां से आया था। या पहले से ही सलाखें काटी जा चुकी थी। उसके साथ वाले कैदियों ने कटर उपलब्ध करवाई इस बारे में पुलिस पता लगाने का प्रयास कर रही है।


कटर से काटी सलाखें
प्रथम दृष्टया बताया जाता है कि बैरक की सलाखें कटर से काटी गई है। इसके बाद लोहे का दरवाजा भी काटा गया।