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Thursday 24th of October 2019
 
जयपुर

वित्त आयोग रिपोर्ट सौंपते समय राजस्थान की विशेष परिस्थितियों का रखें ध्यान

Tuesday, September 10, 2019 10:05 AM
अशोक गहलोत (फाइल फोटो)

जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि 15वां वित्त आयोग केन्द्र सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपते समय राजस्थान की विशेष परिस्थितियों का ध्यान रखें। गहलोत ने सोमवार को आयोग के साथ हुई बैठक में कहा कि क्षेत्रफल की दृष्टि से देश के सबसे बड़े राज्य तथा छितरी आबादी के कारण राजस्थान में आमजन को सेवा प्रदायगी में प्रति इकाई लागत अन्य राज्यों के मुकाबले कहीं अधिक आती है, इसे देखते हुए आयोग संसाधनों का अंतरण करते समय राजस्थान की इस विशेष स्थिति का ध्यान रखे। उन्होंने कहा कि राज्य की लागत असमानताओं और बैठक में उठाए गए मुद्दों को हस्तांतरण फॉर्मूले में शामिल किया जाए। गहलोत ने कहा कि बीते कुछ समय से केंद्र प्रवर्तित योजनाओं के फंडिंग पैटर्न में किए गए बदलाव से राज्यांश में बढ़ोतरी हुई है। इस कारण राज्यों को इन योजनाओं में अधिक राशि खर्च करनी पड़ रही है। अधिकतर योजनाएं जो पहले शत-प्रतिशत केंद्रीय भागीदारी, 90 अनुपात 10 और  75 अनुपात 25 के आधार पर थीं, उन्हें अब 60 अनुपात 40 तथा बराबर की भागीदारी में बदल दिया है। इससे राज्यों के हित पर इससे प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जीएसटी से मिलने वाले राजस्व में निर्धारित वृद्धि नहीं होने के कारण केंद्र द्वारा राज्यों को होने वाले घाटे की क्षतिपूर्ति का भुगतान 2024-25 तक किया जाए। इसके लिए वित्त आयोग केंद्र सरकार से सिफारिश करे।

उदय योजना से पड़ा वित्तीय भार
मुख्यमंत्री ने कहा कि उदय योजना के कारण प्रदेश के राजकोष पर 62 हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ा है। उन्होंने राज्य के डिस्कॉम्स के लिए विशेष सहायता की सिफारिश करने का आग्रह किया।

अनुदान में हो ढ़ाई गुना बढ़ोतरी
गहलोत ने कहा कि लगभग सभी राज्यों में पंचायतीराज संस्थान और नगरीय निकाय नाजुक वित्तीय स्थिति का सामना कर रहे हैं। उन्होंने अनुरोध किया कि केंद्रीय वित्त आयोग 14वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं के तहत स्थानीय निकायों को देय अनुदान में न्यूनतम ढ़ाई गुना बढ़ोतरी की सिफारिश करे।

अब वित्त आयोग ही आशा
मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना आयोग के खत्म होने के बाद वित्त आयोग ही राज्यों के लिए वित्तीय संसाधनों के मामले में आशा की किरण है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में देश की अर्थव्यवस्था जिन हालातों से गुजर रही है। जीएसटी का कलेक्शन कम हो रहा है। तमाम राज्य भी इससे अछूते नहीं रहे हैं। राजस्थान को इस साल 1800 करोड़ रुपए केंद्र से कम मिले हैं। ऐसे विपरीत हालातों में 15वें वित्त आयोग को काम करना पड़ रहा है। जीएसटी आने के बाद तो राजस्व अर्जन के मामले में राज्य काफी हद तक केंद्र पर ही निर्भर हो गए हैं। वित्तीय हस्तांतरण में वित्त आयोग की बड़ी भूमिका है। आयोग राज्यों के हित में संवेदनशील रूख अपनाए।

सामाजिक सुरक्षा हमारी प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि वर्तमान दौर में गरीब एवं पिछड़े वर्गों को संबल देने के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का संचालन बेहद जरूरी है। राजस्थान में मुख्यमंत्री निशुल्क दवा एवं जांच योजना इस दिशा में सरकार की एक सफलतम योजना है। हमने इसका दायरा बढ़ाते हुए इसमें गंभीर बीमारियों की दवा को शामिल किया है और दवा एवं जांचों की संख्या भी बढ़ाई है। सामाजिक सुरक्षा की दृष्टि से राजस्थान सरकार की यह ऐसी पहल है, जिसका अनुकरण अन्य राज्यों को भी करना चाहिए।
 
संकट में हैं कई उद्योग
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में ऑटो मोबाइल, ट्रांसपोर्ट तथा टैक्सटाइल सहित अन्य कई क्षेत्र संकट के दौर से गुजर रहे हैं। राज्य सरकार अपने सीमित संसाधनों के बावजूद इन उद्योगों को बढ़ावा देने का हरसंभव प्रयास कर रही है। मुख्य सचिव के स्तर पर ऑटोमोबाइल एवं टेक्सटाइल उद्यमियों के साथ बैठक भी की गई है।