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जयपुर

एयरपोर्ट पर एसीडीएम सिस्टम लागू, विमानों का संचालन होगा आसान

Sunday, October 13, 2019 10:00 AM
फाइल फोटो

जयपुर। पर्यावरण सुधार के साथ ही विमानों के संचालन में सुगमता लाने के लिए जयपुर हवाई अड्डे पर एयरपोर्ट कोलाबोरेटिव डिसिसन मेकिंग प्रोजेक्ट का कार्य पूरा हो गया। कार्य पूरा होने के बाद भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण बोर्ड के सदस्य एन एस विनीत गुलाटी ने इस प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया गया। जयपुर एयरपोर्ट के निदेशक जे. एस. बलहारा ने बताया कि एसीडीएम प्रोजेक्ट भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण का पूरी तरह से इन हाउस प्रोजेक्ट है। इसे भारतीय विमानन प्राधिकरण के अधिकारियों ने बिना किसी बाहरी सहायता के तैयार किया है। उन्होंने बताया कि यह प्रोजेक्ट में एक कॉमन सूचना शेयरिंग प्लेट्फार्म है जिससे सभी स्टेक होल्डर्स सूचना शेयर करके सिस्टम को और भी पारदर्शी बना सकते हैं। यह विमानों के आगमन समय, प्रस्थान समय, रनवे की क्षमता को ध्यान में रखते हुए उनका क्रम निर्धारण करता है और क्रम के आधार पर टार्गेट प्रस्थान समय का निर्धारण करता है। इस सुविधा से जयपुर में विमानों की जमीन पर रनवे के पास होल्डिंग समाप्त हो जाएगी और ईंधन की खपत में कमी आएगी जिससे वातावरण में कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी। मौसम या किसी भी वजह से विमानों के आवागमन में होने वाली देरी को ग्राउंड पर ही कंट्रोल कर लिया जाएगा और हवा में उन्हें होल्ड नही करना पड़ेगा।

अन्य एयरपोर्ट पर भी है यह सुविधा
भारत में यह सिस्टम सबसे पहले मुम्बई में लागू हुआ उसके बाद यह चेन्नई तथा कोलकाता में लागू हुआ। वर्तमान मेंजयपुर के अलावा अहमदाबाद, गुवाहाटी तथा त्रिवेन्द्रम में भी एसीडीएम का कार्य प्रगति पर है। भारत में ही नहीं वरन पडोसी देशो में भी इस प्रोजेक्ट की डिमांड है और भारत में भी प्राइवेट एयरपोर्ट आॅपरेटर इसकी डिमांड कर रहे हैं। हैदराबाद, कोच्चि, बैंगलुरु, दिल्ली एवं काठमांडू हवाई अड्डों ने इस प्रोजेक्ट मे अपनी रुचि दिखाई है। स्वच्छ भारत अभियान की दिशा में जयपुर हवाई अड्डे यह प्रोजेक्ट एक मील का पत्थर है जो कि कार्बन उत्सर्जनको कम करके वातावरण को और भी स्वच्छ रखने में मदद करेगा। 

यह होंगे फायदे
- प्रचालन क्षमता में सुधार
- प्रस्थान करने वाले विमानो की होल्डिंग प्वाइंट पर देरी में कमी
- एविएशन ईंधन की बर्बादी में कमी
- कार्बन उत्सर्जन में कमी तथा वातारवरण प्रदूषण में कमी
- आर टी कंजेशन में कमी
- सभी स्टेक होल्डर्स को विमानों की वास्तविक स्थिति की जानकारी
- ग्राउंड हैंडलिंग रिसोर्सेज का बेहतर उपयोग
- हवाई अड्डे की पार्किंग क्षमता तथा टर्मिनल का बेहतर उपयोग
- एप्रन एवं टैक्सीवे पर कंजेशन में कमी
- करेंट मौसम की जानकारी