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जयपुर

सरकारी दफ्तरों का ऐसा है हाल, कर्मचारी तो दूर, अफसर तक नहीं पहुंचते समय पर

Wednesday, October 09, 2019 23:05 PM
सचिवालय (फाइल फोटो)

जयपुर। छोटे कर्मचारी तो दूर की बात, बड़े अफसर भी समय के पाबंद नहीं है। वे तय समय पर दफतरों में नहीं पहुंचते हैं। इसका खुलासा बुधवार को एक बार फिर से हुआ।

प्रशासनिक सुधार एवं समन्वय विभाग के दलों ने बुधवार को दस विभागों में औचक निरीक्षण किया। इस दौरान 60 प्रतिशत राजपत्रित अधिकारी और 59 फीसदी अराजपत्रित अधिकारी गैर हाजिर मिले। विभागों के दलों का यह चौथा निरीक्षण था। इससे पहले वे तीन दिन तक कई विभागों का औचक निरीक्षण कर चुके थे। विभाग के सहायक शासन सचिव अनिल चतुर्वेदी ने बताया कि बुधवार को विभिन्न दलों ने क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी जयपुर, अरण्य भवन, वाणिज्यिक कर विभाग, महिला अधिकारिता विभाग, राज्य प्रदूषण मंडल, राजस्थान राज्य सड़क विकास निगम, पाठ्य पुस्तक मंडल, राजस्थान राज्य सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण, राजस्थान राज्य आजिविका मिशन और भूजल विभाग ने सुबह नौ बजकर 40 मिनट पर औचक निरीक्षण किया। इन सभी विभागों में 360 राजपत्रित अधिकारी है। इनमें से 215 गैर हाजिर मिले हैं। इसी प्रकार 772 अराजपत्रित कर्मचारियों में 450 अनुपस्थित पाए गए हैं। निरीक्षण के दौरान सबसे ज्यादा आरटीओ जयपुर कार्यालय में 90 प्रतिशत राजपत्रित अधिकारी अनुपस्थित पाए गए। इसी कार्यालय में सबसे ज्यादा 83 प्रतिशत अराजपत्रित कर्मचारी गैर हाजिर मिले। विभाग के दलों ने पहला औचक निरीक्षण तीस सितम्बर को सचिवालय में किया था, उस दिन करीब 71 प्रतिशत कर्मचारी और अधिकारी गैर हाजिर मिले थे। दूसरा औचक निरीक्षण एक अक्टूबर को किया था, जब 30 फीसदी कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए थे। इसके बाद तीसरा और निरीक्षण तीन अक्टूबर को स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न दफ्तरों में किया गया था, जिनमें 16 प्रतिशत कर्मचारी गैर हाजिर मिले थे।

रोकी जा सकती है वेतन वृद्धि
विभिन्न विभागों में देरी से आने वाले अधिकारियों की वेतन वृद्धि रोकी जा सकती है। इसके साथ ही उनकी वार्षिक कार्य मूल्यांकल रिपोर्ट में प्रतिकूल टिप्पणी लिखी जा सकती है।


प्रशासनिक सुधार विभाग के प्रमुख शासन सचिव डॉ. आर. वेंकटेश्वरन ने दैनिक नवज्योति को बताया कि पिछले चार दिनों में किए गए औचक निरीक्षणों में यह तथ्स सामने आया कि सचिवालय के अधिकांश अधिकारियों और कर्मचारियों में देरी से आने की आदत है। ऐसे कर्मचारियों की संख्या आधी से ज्यादा है। उन्होंने बताया कि इस औचक निरीक्षण के पीछे मकसद यह है कि कर्मचारियों की लेटलतीफी की आदत पर अंकुश लगे। देरी से आने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची कार्रवाई करने की टिप्पणी के साथ संबंधित विभागाध्यक्षों के पास भेज दी गई। उन्होंने बताया कि अगर कर्मचारियों की इस आदत में सुधार नहीं हुआ तो भविष्य में उनकी वेतन वृद्धि रोकी जाएगी। इसके साथ उनकी एसीआर बुक में प्रतिकूल टिप्पणी अंकित की जाएगी। प्रशासनिक सुधार विभाग की ओर से समय-समय पर प्रदेशभर में औचक निरीक्षण किए जाएंगे।

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