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Thursday 21st of November 2019
 
जयपुर

रफ्तार नहीं पकड़ पा रहे जेडीए के प्रोजेक्ट, विकास कार्यों पर लगी लगाम

Wednesday, October 09, 2019 09:00 AM
जयपुर विकास प्राधिकरण की वित्तीय व्यवस्था गड़बड़ाने से शहर में चल रहे विकास कार्यों पर अब लगाम लग गई है।

जयपुर। जयपुर विकास प्राधिकरण की वित्तीय व्यवस्था गड़बड़ाने से शहर में चल रहे विकास कार्यों पर अब लगाम लग गई है। प्रोजेक्टों की रफ्तार धीमी होने से आमजन की परेशानियां कम नहीं हो पा रही है। अब जेडीए पृथ्वीराज नगर की कॉलोनियों के नियमन के साथ ही जमीनों की नीलामी कर वित्तीय स्थिति में सुधार करने के लिए काम रहा है। वहीं प्रोजेक्टों की धीमी रफ्तार के कारण निर्धारित समय सीमा में कई बार छूट देनी पड़ रही है। इससे प्रोजेक्टों की लागत में भी बढ़ जाती है, जिसका भार जेडीए पर पड़ रहा है। जेडीए की ओर से शहर में आधा दर्जन से अधिक बड़े प्रोजेक्ट चलाए जा रहे हैं। इसमें द्रव्यवती नदी सौन्दर्यीकरण योजना, सोढाला एलीवेटेड रोड, सीतापुरा ओवरब्रिज प्रोजेक्टों सहित नई कॉलोनियों में सीवर, पेयजल एवं सड़क निर्माण संबंधी विकास कार्यों को गति नहीं मिल रही है। यह प्रोजेक्ट निर्धारित समय सीमा से पीछे चल रहे हैं। जेडीए की वर्तमान आर्थिक स्थिति इन विकास कार्यों को गति देने में आड़े आ रही है। इसके चलते प्रोजेक्टों में काम करने वाली फर्म भी कम रूचि ले रही है। 

नियमन से आस
जेडीए वित्तीय स्थिति में सुधार के लिए पृथ्वीराज नगर योजना की कॉलानियों के नियमन को लेकर पिछले दो साल से तैयारी कर रहा है। अब सरकार की मंजूरी के बाद जेडीए नियमन शिविर लगाने जा रहा है। साथ ही राज्य सरकार से उम्मीद लगा रहा है कि एक हजार वर्गमीटर या उससे बड़े भूखंडों को भी नियमन करने की मंजूरी मिले तो जेडीए को बड़ा राजस्व मिल सकता है। बड़े भूखंडों में मुख्य रूप से विवाह स्थल, संस्थानिक भूखंड, व्यावसायिक भूखंड, बिल्डर्स की जमीन, फार्म हाउस सहित अन्य बड़े भूखंड हैं, जहां निर्धारित शुल्क से डेढ़ गुना ज्यादा शुल्क लेकर उनका नियमन किया जा सके।

जमीनों में नहीं हो रहा निवेश
वित्तीय संसाधनों में जीएसटी एवं नोटबंदी ने भी जमीनों के कारोबार को प्रभावित किया है। इसका खामियाजा भी जेडीए को उठाना पड़ा और जमीनों में होने वाला निवेश भी कम हो गया। इसके चलते जेडीए को आर्थिक तंगी से जूझना पड़ा रहा है और नए विकास के कार्य शुरू करने के लिए जेडीए ऋण लेने की भी स्थिति में कम ही है।