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इंडिया गेट

एक चोट भाजपा पर भारी

Saturday, March 13, 2021 12:15 PM
फाइल फोटो।

लोकसभा चुनाव के बाद से ही बंगाल विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रहे भाजपा के रणनीतिकारों को अब इस बात का बखूबी एहसास हो चला होगा कि ममता बनर्जी से निपटना किस कदर मुश्किल है। मुल्क के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ब्रिगेड मैदान की रैली में ममता बनर्जी के स्कूटी चलाने पर तंज कसते हुए कहा था कि दीदी की स्कूटी नंदीग्राम में गिरना तय है, हम इसमें क्या कर सकते हैं। संयोग देखिए कि संकेत के तौर पर कही गई ये बात अलग तरह से सच हो गई। बुधवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नंदीग्राम की एक रैली के दौरान घायल हो गईं। दर्द से कराहते हुए उनने बताया कि चार-पांच लोगों ने उनके साथ बदसलूकी की और उन्हें चोट लगी, जबकि इस दौरान पुलिस की सुरक्षा उनके पास नहीं थी। टीएमसी इसके पीछे विरोधियों को और खासतौर से भाजपा को जिम्मेदार ठहरा रही है।

टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने आरोप लगाया है कि 9 मार्च को सूबे के डीजीपी को चुनाव आयोग ने हटाया और 10 को दीदी के साथ ये हादसा हो गया। उनने जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग करते हुए सवाल उठाया कि जेड प्लस सुरक्षा में होने के बावजूद एक मुख्यमंत्री और चुनाव प्रत्याशी पर हमला कैसे हुआ। सवाल वाजिब है क्योंकि किसी सूबे के मुख्यमंत्री की सुरक्षा में ऐसी चूक आखिर कैसे हुई। फिलहाल ममता बनर्जी अस्पताल में हैं, उनके पैर पर प्लास्टर चढ़ा हुआ है। शायद अगले कुछ दिनों तक वे चुनावी रैली भी न कर सकें। ममता इस हमले को साजिश बता रही हैं और इस घटना ने भाजपा को बचाव की मुद्रा में ला खड़ा किया है। वह सफाई देती घूम रही है कि उसने यह हमला नहीं करवाया है। गोदी मीडिया भी सफाई की कवायद में जुटा है। तमाम चैनलों पर घटना के कथित चश्मदीद गवाह पेश किए जा रहे हैं। जिनके मुताबिक ममता बनर्जी की कार का खुला दरवाजा एक खंभे से टकरा गया और ममता बनर्जी को इसमें चोट लग गई।

इन गवाहों में से कुछ ने तो बाकायदा फैसला ही सुना दिया कि ये हादसा था, कोई साजिश नहीं। एक चैनल पर तो ये गवाह गवाही देते जयश्रीराम का नारा भी बुलंद कर बैठे। जो जाने अनजाने गवाहों की सच्चाई और निष्टा का खुद ही सवाल खड़ा करता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गालिबा चुनाव नतीजों के बाद ममता बनर्जी की स्कूटी गिरने की बात कही हो, मगर दीदी को चोट पहले लग गई। कमाल देखिए कि चोट दीदी को लगी है और दर्द भाजपा को हो रहा है। भाजपा ने मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। ताकि साबित किया जा सके कि यह साजिश नहीं हादसा है। यानी ममता बनर्जी को लगी इस चोट ने भाजपा के रणनीतिकारों को सिर के बल ला खड़ा किया है। वरना यह हकीकत है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिशें काफी हद तक सफल हुई है। भाजपा की ओर से ध्रुवीकरण की सियासत का ही नतीजा था कि ममता बनर्जी तक को देवी पूजा के श्लोक पढ़ने पड़ रहे थे। यानी जहां अब तक चुनाव में जनता से जुड़े मुद्दों की जिक्र होता था, वहां अब हिंदुत्व कार्ड के बरक्स ममता बनर्जी सरीखी नेताओं को भी खुलकर धार्मिक आस्था का प्रदर्शन करना पड़ रहा है।

हालांकि पश्चिम बंगाल में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिशें किसी मकाम तक पहुंचतीं। इससे पहले ममता के चोट ने सूबे की सियासत में एक नया मोड़ ला दिया है। फिलहाल ममता बनर्जी की चोट जेरेबहस है। विधानसभा चुनाव की अधिसूचना के साथ ही कानून व्यवस्था अब चुनाव आयोग के हाथों में हैं। कमाल देखिए कि इसी कानून-व्यवस्था की दुहाई देते हुए आठ चरणों में मतदान का ऐलान किया गया था। तब चुनाव आयोग की ओर से साफ तौर पर दलील दी गई थी कि सूबे की कानून व्यवस्था को देखते हुए ऐसा किया गया है। फिलहाल सूबे में कानून व्यवस्था चुनाव आयोग के हाथों में है और अब कानून व्यवस्था का आलम ये है कि राज्य की मुख्यमंत्री ही एक रैली के दौरान घायल हो जाती हैं। उनके पैर, कंधों में चोट आ जाती है और उनका कहना है कि उन पर साजिशन हमला किया गया है। ऐसे में कानून व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा सवाल पैदा होता है कि जब सूबे की मुख्यमंत्री खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रहे हैं, तो आम आदमी की बिसात ही क्या है? वह भी एक ऐसे माहौल में, जहां जंग जैसी हालत बनी हुई है।

गली मोहल्लों में रोजाना हिंसक झड़पें हो रही हैं। मरने मारने की बात खुलेआम मंचों से की जा रही है। अभी पिछले दिनों ही जिस ब्रिगेड मैदान की रैली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ममता बनर्जी की स्कूटी नंदीग्राम में गिरने का तंज कसा था, उसी मैदान में उनकी मौजूदगी में फिल्मी कलाकार मिथुन चक्रवर्ती ने खुद को कोबरा बताया था और कहा था कि कि यहां मारूंगा तो श्मशान में लाश मिलेगी। मुल्क के प्रधानमंत्री की मौजूदगी में ऐसी शब्दावली का इस्तेमाल साफ संकेत करता है कि बेशक तलवारें भले खुले आम न लहराई जा रही हों, चुनावों में धनबल, बाहुबल, छल-कपट, षड्यंत्रों का इस्तेमाल तो धड़ल्ले से हो रहा है। बहरहाल, ममता बनर्जी ने अस्पताल से संदेश जारी कर अपने समर्थकों से शांति बनाए रखने की अपील की है। कहने की दरकार नहीं कि ममता बनर्जी के पैर में लगी चोट भाजपा पर भारी पड़ सकती है। फिलहाल तो वह बैकफुट पर है।
-शिवेश गर्ग (ये लेखक के अपने विचार हैं)

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