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इंडिया गेट

शर्मसार करता चुनाव प्रचार

Tuesday, May 14, 2019 09:35 AM

- शिवेश गर्ग
अपन भी रविवार को वोट डाल आए। पर चुनाव प्रचार का ऐसा स्तरहीन सिलसिला शायद ही कभी मुल्क में दिखा हो। यों तो महापुरुषों पर बेवजह की अभद्र टिप्पणियां, विरोधी दलों के नेताओं पर निजी हमले, महिलाओं के बारे में शर्मनाक टिप्पणियां और सबसे बढ़कर चुनाव आयोग का दोहरा चरित्र, स्तरहीनता की इतनी कहानियां हैं कि जिसे बयां किया जाए तो हजारों पन्ने काले करने पड़ेंगे। अपन पूर्वी दिल्ली के मतदाता हैं। और वहां जिस मुद्दे की चर्चा सबसे अधिक रही वह किसी को भी शर्मसार कर सकता है।

पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट से आम आदमी पार्टी की प्रत्याशी आतिशी मरलेना के नाम हाल ही में एक पर्चा इस क्षेत्र के घरों में बांटा गया है। पर्चा अंग्रेजी में है और मजमून ऐसा है जिसे शब्दश: बयां करना तक मुमकिन नहीं है। पर्चे का लब्बोलुआब इतना है कि उसमें आतिशी, मुख्यमंत्री केजरीवाल और उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का चरित्र हनन करते हुए जनता से आम आदमी पार्टी को वोट न करने की अपील की गई है।

इस पर्चे में लिखी अधिकतर बातें जातिवादी और लिंगभेद से भरी हुई हैं। एक महिला के तौर पर आतिशी के खिलाफ शर्मनाक टिप्पणियां की गई हैं। पर्चे में आतिशी के परिवार पर हमला करते हुए लिखा गया है कि वो एक ‘मिश्रित प्रजाति’ हैं और ‘बीफ’ (गौमांस) खाने वाली हैं। जानकारी के तौर पर बता दें कि आतिशी के पिता विजय सिंह दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाते रहे हैं और एक शिक्षक के तौर पर उनका काफी सम्मान रहा है। पर्चे का मकसद यह साबित करना है क्यों आतिशी पूर्वी दिल्ली के लिए एक सही उम्मीदवार नहीं हैं।

वजह महिला के तौर पर उनके चरित्र को बताया गया है। आतिशी के निजी रिश्ते के बारे में भद्दी बातें लिखी गई हैं। बताया गया है कि उनके चरित्र में तमाम दोष है क्योंकि वे आजाद ख्याल महिला हैं और अकेली रहती हैं। पर्चे में मनीष सिसोदिया को एक जाति विशेष की गाली से संबोधित किया गया है और उनके एवं आतिशी के रिश्ते को लेकर आपत्तिजनक बातें कही गई हैं। पर्चा किस कदर शर्मनाक है उसको बयां करना भी मुश्किल है। केजरीवाल को गाली दी गई है, और अंत में जनता से अपील की गई है कि आम आदमी पार्टी या कांग्रेस को वोट न करें।

हालांकि, ये बात साफ नहीं है कि ये पर्चा किसने छपवाया है या बांटा है, लेकिन 9 मई को आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि यह पर्चा भाजपा के पूर्वी दिल्ली से प्रत्याशी गौतम गंभीर ने बंटवाया है। हालांकि गंभीर ने इन आरोप को सिरे के खारिज किया है और उनने शुक्रवार को आतिशी, सिसोदिया और केजरीवाल पर मानहानि का आरोप लगा कर मुकदमा दर्ज कर दिया है। यह पहला मौका नहीं है जब अबके चुनाव में किसी महिला उम्मीदवार के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की गई है। यूपी के रामपुर से भाजपा उम्मीदवार जयाप्रदा के कपड़ों को लेकर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार आजम खान ने शर्मनाक बयानबाजी की थी।

केन्द्रीय मंत्री और भाजपा नेता महेश शर्मा पिछले दिनों राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पर ‘पप्पू की पप्पी’ जैसी टिप्पणी इसी चुनाव में कर चुके हैं। यों तो महिलाओं के लिए सियासत में ऐसी टिप्पणियां नई नहीं है। खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी अपने पद की गरिमा के उलट जाकर कांग्रेस नेता शशि थरूर पर  ‘50 करोड़ की गर्लफ्रेंड’ और कांग्रेस की विधवा जैसी टिप्पणी कर चुके हैं। प्रधानमंत्री संसद के उपरी सदन यानी राज्यसभा में कांग्रेस की महिला नेता रेणुका चौधरी के की तुलना शूर्पनखां से कर चुके हैं।

मायावती और उनके परिवार को बलात्कार की धमकियां मिलती रही हैं। बेशक, मुल्क के प्रधानमंत्री सहित तमाम नेता लोकसभा के चुनाव को लोकतंत्र का महापर्व बताते रहे हों, पर बात जब विरोधियों पर हमले की आती है, तो न कोई अपनी सियासी और सामाजिक मर्यादा का ख्याल रखता है और न ही इस कथित महापर्व की पवित्रता का। असल में, ऐसी समस्या की जड़ें भी लोकतंत्र में ही छुपी हैं। बेशक, हम कहने को दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक मुल्क हों, पर यह मुल्क और हमारा समाज लोकतंत्र को कभी मन से स्वीकार नहीं कर पाया है। हमने एक राजनीतिक प्रक्रिया के तौर पर तो लोकतंत्र को अपनाया है पर मन के लोकतंत्र को हम अबतक नहीं समझ पाए हैं।

वजह साफ है कि हम अब तक लोकतंत्र को एक बुनियादी मूल्य के तौर पर न समझ पाए हैं और न ही समझने की जरूरत ही महसूस करते हैं। और जब लोकतांत्रिक प्रक्रिया का इस्तेमाल कर मुल्क के नीति नियंता बन बैठने वाले हमारे नेता ही इस बुनियादी मूल्य को नहीं समझ सके हैं तो बाकी जनता के आखिर कितनी उम्मीद की जाए? गांधी और नेहरू जैसे नेताओं को गाली देना आज मुल्क के एक तबके की आदत में शुमार हो गया है। पर भारत सरीखे एक सामंतवादी समाज को लोकतांत्रिक बनाने की दिशा में हम उनके योगदान को समझने की कभी जहमत नहीं उठाते। यह आज के समय की एक बड़ी त्रासदी है।
 

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