Dainik Navajyoti Logo
Thursday 9th of July 2020
 
भारत

व्हिप को अविश्वास प्रस्ताव तक सीमित करें

Wednesday, May 22, 2019 10:25 AM

भारत में सांसदों की इस स्वतंत्रता का दुरुपयोग होने लगा। 80 के दशक में कई राज्यों के विधायक सुबह से शाम तक दो या तीन बार पार्टियों को बदलने लगे। जो पार्टी अधिक धन देती थी, वह उस पार्टी में सम्मिलित हो जाते थे। राज्यों में स्थिर सरकार बनाना असंभव हो गया। उस समय विधायकों को आया राम गया राम के नाम से संबोधित किया जाने लगा। नावी लोकतंत्र का वैचारिक आधार जीन जैक्स रूसो नाम के विचारक ने दिया था। उन्होंने कहा था कि जनता द्वारा चयनित लोगों को जनता पर शासन का अधिकार है। वे जनता द्वारा चयनित होते हैं इसलिए अपेक्षा की जाती है कि वह जनता के हित में काम करेंगे। इसी विचारधारा को अपनाते हुए गांधी जी ने स्वतंत्रता के बाद सुझाव दिया था कि कांग्रेस पार्टी को समाप्त कर देना चाहिए और हमें बिना पार्टी के लोकतंत्र को अपनाना चाहिए जिसमें जनता बिना पार्टी की मुहर के स्वतंत्र व्यक्तियों का चुनाव करें और इनके द्वारा जनता के हित में शासन किया जाए। लेकिन हमारे संविधान के निर्माताओं ने पार्टी विहीन लोकतंत्र के स्थान पर पार्टी समेत लोकतंत्र को अपनाया है जिसमें पार्टी केआधार पर चुनाव होते हैं। इस व्यवस्था के सही संचालन के लिए जरूरी है कि सत्तारूढ़ और विपक्ष की पार्टियों के सांसद पर्याप्त संख्या में सदन में उपस्थित हों विशेषकर प्रमुख मुद्दों पर चर्चा के दौरान अथवा अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान के समय।

इसलिए इंग्लैंड में व्हिप की व्यवस्था की गईण्व्हिप यानी चाबुक। इस व्यवस्था केअंतर्गत हर पार्टी किसी एक सांसद को व्हिप के रूप में नामित किया जाता है। व्हिप की जिम्मेदारी होती है कि प्रमुख विषयों पर चर्चा के समय पार्टी के सभी सांसदों को संसद में उपस्थित होना सुनिश्चित करें। इस शब्द का स्रोत इंग्लैंड में शिकार की व्यवस्था से लिया गया है। शिकार के लिए कुछ शिकारी कुत्ते रखे जाते थे जिन्हें चाबुक से मार कर एक स्थान पर लाया जाता था। इसी प्रकार सांसदों को संसद में लाने के लिए व्हिप शब्द का उपयोग किया गया। यह व्यवस्था आज सभी प्रमुख लोकतांत्रिक देशों में उपलब्ध है। लेकिन इस व्यवस्था में सांसद द्वारा संसद में किस मुद्दे पर किस प्रकार मतदान किया जाता है इस पर व्हिप का अथवा पार्टी का कोई नियंत्रण नहीं रहता है व्हिप की भूमिका मात्र इतनी रहती है कि वह सांसद की उपस्थिति संसद में सुनिश्चित करें। संसद में आने के बाद सांसद अपने विवेकानुसार मत देने के लिए स्वतंत्र रहता है। इसका ज्वलंत उदाहरण हाल में इंग्लैंड में हुआ ब्रेक्जिट मतदान है, ब्रेक्जिट यानी इंग्लैंड का यूरोपियन यूनियन से अलग होने का प्रस्ताव पर मतदान है। यह प्रस्ताव कंजरवेटिव पार्टी द्वारा संसद में लाया गया। कंजरवेटिव पार्टी का बहुमत भी था लेकिन कंजरवेटिव पार्टी के कई सांसदों ने अपनी ही पार्टी द्वारा लाए गए प्रस्ताव का विरोध किया और ब्रेक्जिट का प्रस्ताव गिर गया। इसी प्रकार अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी ने प्रस्ताव लाया था कीडेमोक्रेटिक राष्टÑपति ओबामा द्वारा स्वास्थ्य व्यवस्था संबंधित बनाए गए कानून को रद्द कर दिया जाए लेकिन रिपब्लिकन पार्टी के ही कुछ सांसदों ने अपनी ही पार्टी के प्रस्ताव के विरोध में मतदान किया और वह प्रस्ताव भी गिर गया। इन उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि विश्व के प्रमुख देशों में सांसद अपने विवेकानुसार मतदान करने को स्वतंत्र होते थे और पार्टी के व्हिप की भूमिका मात्र इतनी होती थी कि वह सांसदों की संसद में उपस्थिति सुनिश्चित करें।

भारत में सांसदों की इस स्वतंत्रता का दुरुपयोग होने लगा। 80 के दशक में कई राज्यों के विधायक सुबह से शाम तक दो या तीन बार पार्टियों को बदलने लगे। जो पार्टी अधिक धन देती थी, वह उस पार्टी में सम्मिलित हो जाते थे। राज्यों में स्थिर सरकार बनाना असंभव हो गया। उस समय विधायकों को आया राम गया राम के नाम से संबोधित किया जाने लगा। उस अस्थिरता से बचने के लिए 1985 में हमने 52वां संविधान संशोधन पारित किया। इसमें व्यवस्था थी कि हर विधायक या सांसद को पार्टी के निर्देशानुसार ही मतदान करना पड़ेगा। यदि वह पार्टी के निर्देशों का उल्लंघन करता है तो विधानसभा अथवा संसद में उसकी सदस्यता समाप्त कर दी जाएगी। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए अपने देश में व्हिप की व्यवस्था की गई। व्हिप का कार्य अब केवल यह नहीं रह गया कि विधायकों और सांसदों की उपस्थिति सुनिश्चित करें, बल्कि यह हो गया कि देखें की विधायकों की सदस्यों ने पार्टी के अनुसार मतदान किया या नहीं। जैसे यदि भारत में सरकार ने प्रस्ताव लाया की खुदरा व्यापार में विदेशी निवेश को स्वीकृति दी जाए और किसी सांसद ने उस प्रस्ताव के विरोध में मतदान किया तो उस सांसद की सदस्यता समाप्त हो जाएगी। ऐसा करके हमने सांसदों की स्वतंत्रता अथवा विवेक के उपयोग को समाप्त कर दिया। अब सांसद केवलचपरासी हो गए हैं जिनका कार्य है कि उपस्थित होकर पार्टी के आदेशानुसार बटन दबा दें। यह व्यवस्था गांधीजी के कल्पना के पूर्ण विपरीत है। गांधी ने सोचा था कि बिना पार्टी की मुहर के व्यक्ति संसद में पहुंचेंगे और जनता की समस्याओं को उठाएंगे। अब 1985 के बाद हमारी व्यवस्था में पार्टी द्वारा नामित व्यक्ति संसद में पहुंचकर पार्टी के आदेशानुसार मतदान करते हैं। जनता की भूमिका मात्र इतनी रह गई है कि वह पार्टियों में चयन करती है कि वह अमुख पार्टी को वोट देगी। इसलिए आज हमारे देश में आसानी से जन विरोधी कानून पारित हो रहे हैं जैसे भूमि अधिग्रहण कानून में जो सुधार किए गए थे उनको निरस्त करने के प्रयास किए गए अथवा गंगा नदी के संरक्षण के लिए बनाई गई कमेटी में पर्यावरणविदों को बाहर कर दिया गया इत्यादि इत्यादि। हमारे सामने दो समस्याएं उपलब्ध हैं। एक तरफ हमें निश्चित करना है की सरकारें स्थिर रहे और आया राम गया राम से हमें मुक्ति पानी है जिससे कि सत्तारूढ़ पार्टी अपना कार्य बिना भय के कर सके। दूसरी तरफ हमें विधायकों और सांसदों पर पार्टी के दबाव को समाप्त करना है इसका जिससे कि लोकतंत्र सही मायने में पुन: बहाल हो सके।     

(ये लेखक के अपने विचार हैं)

 

यह भी पढ़ें:

कृषि क्षेत्र के लिए ऋण का लक्ष्य हासिल करेंगे : सीतारमण

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में सरकार अगले वित्त वर्ष में कृषि क्षेत्र के लिए 15 लाख करोड़ रुपये का ऋण लक्ष्य हासिल कर लेगी।

15/02/2020

गुजरात: निसर्ग तूफान के मद्देनजर 50 हजार से अधिक लोगों को पहुंचाया सुरक्षित स्थानों पर

गुजरात में निसर्ग तूफान के प्रभाव को कम करने के लिए राज्य सरकार ने कोविड संबंधी दिशानिर्देशों का पालन करते हुए समुद्र तटीय क्षेत्रों से 50 हजार से अधिक लोगों का सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है। इसके अलावा राज्य सरकार ने कई और एहतियाती कदम उठाए हैं।

03/06/2020

कोरोना अपडेट: देश में अबतक 5865 संक्रमितों की पुष्टि, 169 लोगों की गई जान

देश में कोरोना का कहर बढ़ता जा रहा है। इस जानलेवा महामारी से देश में अब तक 169 लोगों की जान जा चुकी है। वहीं, देश में अबतक कोरोना के 5865 केस की पुष्टि हुई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अब तक कुल 169 लोगों की जान कोरोना वायरस के कारण जा चुकी है जबकि 478 लोग ठीक हो चुके हैं।

09/04/2020

केन्द्रीय मंत्रियों और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने अरुण जेटली को दी श्रद्धांजलि

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, रेल मंत्री पीयूष गोयल और कई केन्द्रीय मंत्रियों व भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने शनिवार को पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली की जयंती पर उन्हें नमन किया।

28/12/2019

संयुक्त राष्ट्र महासभा अध्यक्ष ने सुषमा के निधन पर जताया शोक

अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई सहित कई देशों के नेताओं और राजनयिकों ने भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के निधन पर शोक व्यक्त किया है।

07/08/2019

मोदी को बाजार का सलाम

पीएम नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को मिले प्रचंड बहुमत से निवेश धारणा मजबूत रही जिससे शुक्रवार को बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक

25/05/2019

राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति ने दी ईदुलजुहा की मुबारकबाद

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने ईदुलजुहा की पूर्व संध्या पर देशवासियों को शुभकानाएं दी और इस त्योहार को साझी संस्कृति का प्रतीक बताया।

11/08/2019