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भारत

वीर सावरकर ने दिया 1857 को पहला स्वतंत्रता संग्राम का नाम : अमित शाह

Thursday, October 17, 2019 12:55 PM
काशी विश्वविद्यालय में सेमिनार को संबोधित करते हुए अमित शाह।

वाराणसी। दुनिया में भारतीय संस्कृति को सर्वोच्च स्थान दिलाने का श्रेय मौर्य वंश और गुप्त वंश को देते हुये केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सम्राट स्कंदगुप्त के पराक्रम और उनके शासन चलाने की कला पर चर्चा किये जाने और देश के गौरवशाली इतिहास को संदर्भ ग्रंथ बनाकर पुन: लेखन की जरूरत पर बल दिया है। ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में गुरूवार को 'गुप्तवंशक-वीर : स्कंदगुप्त विक्रमादित्य' विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ करते हुए कहा कि महाभारत काल के दो हजार साल बाद 800 वर्ष का कालखंड दो प्रमुख शासन व्यवस्थाओं मौर्य वंश और गुप्त वंश के कारण जाना गया। दोनों वंशों ने भारतीय संस्कृति को तब विश्व के अंदर सर्वोच्च स्थान पर प्रस्थापित किया।

उन्होंने कहा कि गुप्त साम्राज्य की सबसे बड़ी सफलता हमेशा के लिए वैशाली और मगध साम्राज्य के बीच टकराव को खत्म कर अखंड भारत का निर्माण करना था। चंद्रगुप्त विक्रमादित्य को प्रसिद्धि मिलने के बावजूद लगता है कि उनके साथ इतिहास में बहुत अन्याय भी हुआ है। उनके पराक्रम की जितनी प्रशंसा होनी थी, उतनी शायद नहीं हुई वहीं सम्राट स्कन्दगुप्त ने भारत की संस्कृति, भाषा, कला, साहित्य, शासन प्रणाली, नगर रचना प्रणाली को हमेशा से बचाने को प्रयास किया है लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि आज स्कंदगुप्त पर अध्ययन के लिए कोई 100 पेज भी मांगेगा, तो वो उपलब्ध नहीं हैं।

सम्राट स्कंदगुप्त के पराक्रम और उनके शासन चलाने की कला पर चर्चा की जरूरत है। स्कंदगुप्त के इतिहास को पन्नों पर स्थापित कराने की जरूरत है। इतनी ऊंचाई पर रहने के दौरान शासन व्यवस्था के लिए उन्होंने शिलालेख बनाए। स्कंदगुप्त ने रेवेन्यू नियम भी बनाए जो आज की जरूरत है। लंबे गुलामी के दौर के बाद भी उनके बारे में कम ही जानकारी उपलब्ध है।

गृहमंत्री ने इतिहासकारों से अपील की कि वे देश के गौरवशाली इतिहास के साथ छेड़छाड़ करने वाले अंग्रेजो और वामपंथियों को कोसना बंद करें और उस इतिहास को सत्य के आधार पर लिखें, जिनके साथ अन्याय हुआ। इतिहास में विस्मृत किए गए ऐसे 200 महापुरुषों और 25 साम्राज्यों पर विस्तार से लिखें। आज देश स्वतंत्र है और इसलिए देश के गौरवशाली इतिहास का संशोधन करके संदर्भ ग्रंथ बनाकर इतिहास का पुन: लेखन किए जाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि पंडित मदन मोहन मालवीय ने जब काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना की तब उनकी सोच चाहे जो भी रही हो, लेकिन स्थापना के इतने वर्षों बाद भी यह विश्वविद्यालय हिंदू संस्कृति को बनाए रखने के लिए अडिग खड़ा है और हिंदू संस्कृति को आगे बढ़ा रहा है। स्वतंत्रता संग्राम में वीर सावरकर के योगदान की चर्चा करते हुए अमित शाह ने कहा कि वीर सावरकर न होते तो 1857 की क्रांति भी इतिहास न बनती, उसे भी हम अंग्रेजों की दृष्टि से देखते। वीर सावरकर ने ही 1857 को पहला स्वतंत्रता संग्राम का नाम दिया।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आज देश फिर से एक बार अपनी गरिमा पुन: प्राप्त कर रहा है। पूरी दुनिया के अंदर भारत दुनिया के अंदर सबसे बड़ा लोकतंत्र है इसकी स्वीकृति आज जगह-जगह पर दिखाई पड़ती है। पूरी दुनिया आज भारत के विचार को महत्व देती है।