Dainik Navajyoti Logo
Sunday 19th of January 2020
 
ओपिनियन

जानिए, राजकाज में क्या है खास?

Monday, July 15, 2019 13:05 PM

चर्चा में सुन्दरकांड
इन दिनों सुन्दरकांड को लेकर सूबे की सबसे बड़ी पंचायत में चर्चा जोरों पर है। सुन्दरकांड भी कोई छोटा-मोटा पंडित नहीं बांच रहा, बल्कि राज के रत्नों में तीसरे नंबर पर है, और बीकाजी की नगरी से ताल्लुकात रखते हैं। जब से हाथ वाली पार्टी में दो-दो हाथ की नौबत आई है, तभी से भाईसाहब ने सुन्दरकांड को पढ़ना शुरू किया है। भाईसाहब न जगह देखते है और नहीं वक्त। जब भी मन में आया, छोटी सी किताब जेब से निकाली और पढ़ना शुरू कर देते हैं। उनके अगल-बगल वाले कई मायने भी निकालते हैं, मगर भाई साहब अपनी धुन में मस्त रहते हैं। राज का काज करने वालों में चर्चा है, कि पंडितजी को भी किसी दूसरे पंडितजी ने बिन मांगे सलाह दे दी, कि जो चल रहा है, वह ठीक नहीं है, सो सुन्दरकांड का पाठ करने में ही भलाई है।

अब अन्तर्रात्मा की बात
जोधपुर वाले अशोकजी भाईसाहब ने बुध को जनता की अन्तर्रात्मा की आवाज का खुलासा क्या किया, कइयों का हाजमा बिगड़ गया। पिंकसिटी से लेकर लालकिले की नगरी तक हलचल जो मच गई। इंदिरा गांधी भवन में बने पीसीसी के ठिकाने पर भी बैठक में देर रात तक चिंतन-मंथन हुए बिना नहीं रह सका। सरदार पटेल मार्ग स्थित बंगला नंबर 51 में बने भगवा वालों के दफ्तर में भी खुसर फुसर रही कि हमारे गुजरात वाले नमोजी तो सिर्फ अपने मन की बात करते हैं, मरु प्रदेश के हाथ वाले जादूगरजी तो एक कदम आगे निकले। वो तो सूबे में राज के लिए हुई चुनावी जंग से पहले ही जनता की अन्तर्रात्मा की आवाज से भी वाकिफ थे। अब सामने वालों को कौन समझाए कि भाईसाहब की बात को समझने वाले समझ गए ना समझे वो अनाड़ी हैं।

बाहरी की आड़ में
हाथ वाले भाई लोगों का भी कोई जवाब नहीं है। जब किसी से दो-दो हाथ करने की ठान लेते है, तो उसका बेड़ा गर्क करके ही दम लेते हैं। चाहे वह अपनी ही पार्टी का बड़ा नेता क्यों ना हो। अब देखो ना इन दिनों इंदिरा गांधी भवन में बने पीसीसी चीफ के ठिकाने पर आने वाले कई भाई लोगों ने दो-दो हाथ करने की ठान ली है। दो-दो हाथ भी और किसी से नहीं बल्कि अपने ही जहाज के पायलट से करने पर उतारू है। इसके लिए बहाना भी सहारनपुर का ढूंढा है। सहारनपुर कोई सूबे का हिस्सा नहीं, बल्कि पिंकसिटी से सैकड़ों मील दूर है। सो एक खेमे के भाई लोग छोटे पायलट साहब को बाहरी का खिताब देकर निपटाने के मूड में नजर आ रहे हैं।

ट्रेनिंग मुखबंद की
दरबार के बाहर राजा के बिना हुक्म के कोई भी वजीर मुंह नहीं खोल सकता। कुछ इसी तरह के संकेतों से हमारे सूबे के वजीरों के चेहरों पर भी चिंता की लकीरें दिखाई देने लगी हैं। हमारे मरु प्रदेश के नेता काफी वाचाल हैं और यह आदत उनकी काफी पुरानी है। चूंकि उनका खान-पान भी खास है। छपास के रोगियों की तो अर्द्ध-रात्रि तक भी नींद गायब रहती है, लेकिन अब मामला उल्टा नजर आ रहा है। शेखावाटी के भाईसाहब अर्द्ध-रात्रि को भी हालचाल पूछ कर एक लाइन छापने की गुहार करते थे, वो अब देखते ही बगलें झांक कर निकल जाते हैं। राज का काज करने वालों ने इसका राज खोला तो अपने भी कान खड़े हो गए। उन बेचारों का कोई कसूर नहीं है, चूंकि उन्हें अभी से मुखबंद की ट्रेनिंग जो दी जा रही है। उनको साफ कहा गया है कि अंदर की बात की गंध खबर सूंघने वालों की नाक से कौसों दूर होनी चाहिए।

तीतर गए 13 के भाव
बीकाणा में इन दिनों तीतर गए 13 के भाव और खरगोश हो गए खालसा वाली कहावत काफी चर्चा में हैं। बीकाजी की नमकीन के चटकारों के साथ जमाली चौक के पाटों पर लोग बतियाते हैं कि पूरी 25 सीटें देने वाला मरु प्रदेश जिस ढंग से नमो टीम के बाद निर्मला सीतारमणजी के बजट में भागीदारी नहीं पा सका, उसी तरह तीन दिन राज के ठहरने के बावजूद बीकाणा की उम्मीदों पर पानी फिर गया। राज का काज करने वाले भी लंच केबिनों में बतियाते हैं कि तीतर और खरगोशों की संख्या के अनुपात में बीकाणा का खयाल रखा गया तो सूरसागर की पाल पर बनी चौपाटी की ठण्डी हवा के झौंकों का भी अलग ही आनंद होगा। (यह लेखक के अपने विचार हैं)

यह भी पढ़ें:

वायु प्रदूषण बना बड़ी चुनौती

वायु प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकारों को लताड़ा- आप सड़क की धूल निर्माण, ध्वंस और कूड़े के निस्तारण से नहीं निपट सकते हैं तो आप इस पद पर क्यों बने हुए हैं? आपको लोगों के अरमानों को पूरा करना है। अगर आप ये नहीं कर सकते तो आप यहां क्यों रहेंगे? आप अपनी ड्यूटी निभाने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं। आपने किस तरह का रोडमैप अपनाया है?

18/11/2019

पाठ्यक्रमों में बदलाव

थानागाजी सामूहिक बलात्कार-कांड को लेकर गरमाया राजनीतिक बवेला, अभी शांत हुआ भी नहीं था कि विद्यालयीय पाठ्यक्रम में बदलाव को लेकर प्रदेश में नया सियासी-बखेड़ा उठ खड़ा हुआ है।

15/05/2019

आयुर्वेद के जन्मदाता हैं धन्वंतरि

दीवाली से दो दिन पूर्व ‘धनतेरस’ त्यौहार मनाया जाता है। सही मायनों में दीवाली के पंच पर्व की शुरूआत ही स्वास्थ्य चेतना जागृति के इसी पर्व से होती है। ‘धनवंतरि जयंती’ आरोग्य के देवता धन्वंतरि का अवतरण दिवस है। भगवान विष्णु के 24 अवतारों में 12वां अवतार धन्वंतरि का माना गया है।

25/10/2019

तमिलनाडु : दक्षिण में हिंदी विरोध का केंद्र

उत्तर भारत में आमतौर पर यह समझा जाता है कि दक्षिण के सभी राज्य हिंदी का विरोध करते है। पर सच्चाई यह है कि हिंदी का विरोध मोटे तौर पर तमिलनाडु में ही है। केरल, कर्नाटक, आन्ध्र प्रदेश और तेलंगाना में इसका विरोध बहुत कम और इन राज्यों में हिंदी के विरुद्ध खुलकर अथवा कोई बड़ा विरोध या आन्दोलन नहीं हुआ।

23/09/2019

राज-काज में क्या है खास

इंदिरा गांधी भवन में बने हाथ वालों के ठिकाने पर शनि को छोटे पायलट साहब के बर्थ डे पर उमड़ी भीड़ को लेकर कई तरह के मायने निकाले जा रहे हैं।

09/09/2019

इतने राम कहां से लाऊं?

भारत वर्ष हजारों साल से गांव और गरीबी प्रधान देश है। हमें वैदिक काल से ही एक प्रजा के रूप में देवी-देवताओं और राजा की विजय के दिवस मनाने की आदत है। हमारा इतिहास, संस्कृति और परम्परा में हर दिन शक्ति और भक्ति का उत्सव मनाता है। दुनिया में सत्य, शिव और सुंदर की महाखोज करते रहना भी हमारी इस बात का प्रमाण है कि मनुष्य की जीवनधारा को सुख-दु:ख का संगीत मानकर ही चलते रहना चाहिए।

10/10/2019

चुनावी परिदृश्य पहले से साफ था

लोकसभा के चुनाव परिणाम बिल्कुल अपेक्षित हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राजग राष्टÑीय स्तर पर विचारधारा एवं रणनीति के मामले में संगठित ईकाई के रुप में उतरा था तथा पांच-छ: राज्यों को छोड़ दें तो उसका

28/05/2019