Dainik Navajyoti Logo
Monday 1st of June 2020
 
ओपिनियन

मोदी विरोधी नेताओं की पीड़ा

Tuesday, May 14, 2019 09:55 AM
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (फाइल फोटो)

विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ने की चुनौती देने वाले विपक्षी नेता अन्तत: गाली गलौज पर उतर आए। कांग्रेस के नेता राहुल गांधी हो या ममता बनर्जी अथवा राबड़ी देवी हों, इनमें इस बात की होड़ लगी कौन सबसे ज्यादा गाली मोदी को देगा। कई विपक्षी नेताओं की सबसे बड़ी पीड़ा यह है कि मोदी बेईमान और चोर क्यों नहीं है। यदि वह भी उनकी तरह ही बेईमान और चोर होते तो उन्हें कोई परेशानी नहीं होती क्योंकि राजनीति में चोर-चोर मौसेरे भाई माने जाते हैं। घोटालों का लम्बा इतिहास समेटे कांग्रेस पार्टी की समस्या यही है कि उनकी तमाम कोशिशों के बाद भी मोदी की छवि खराब नहीं हो पा रही है।

क्षेत्रीय दलों ने जिन्होंने राजनीतिक सत्ता को अपने निजी स्वार्थों की पूर्ति का जरिया मान रखा है और जातिवाद के माध्यम से अपनी राजनीति चमकाते हैं वे भी मोदी को चुनौती नहीं दे पा रहे हैं। इसलिए वे उनकी पिछड़ी जाति पर सवाल उठाकर भ्रम पैदा करके राजनीतिक लाभ उठाना चाहते हैं। लेकिन जनता अब जाति और धर्म के बन्धन से ऊपर उठ रही है। गरीबी और पेट की आग में ये सारे बन्धन भस्म हो रहे हैं क्योंकि मोदी का काम जमीन पर दिखाई दे रहा है।

जिन गरीबों को प्रधानमंत्री आवास योजना में घर, शौचालय, बिजली, गैस का चूल्हा और आयुष्मान योजना का लाभ मिला है वे जातिवाद की राजनीति करने वालों के लिए चुनौती बन गए हैं। वे राहुल गांधी के मोदी पर लगाए गए आरोपों को खारिज कर चुके हैं। प्रियंका गांधी वाड्रा कहती हैं कि मोदी सबसे कमजोर और कायर प्रधानमंत्री हैं कुछ हद तक उनकी बात सही है क्योंकि श्रीमती इंदिरा गांधी की तरह कानून को ताक पर रखकर जमीन घोटालों की हेराफेरी के मामले में राबर्ट वाड्रा को वे जेल नहीं भेजवा पा रहे हैं। कांग्रेस के कुछ नेता कहते हैं कि जीएसटी और नोटबंदी पर मोदी चुनाव लड़ें पर नोटबंदी और जीएसटी के लागू होने के बाद कई राज्यों में चुनाव हो चुके हैं।

इन चुनावों में बीजेपी ने अपनी जीत दर्ज की है। म.प्र., राजस्थान, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस जीती जरूर है लेकिन किसानों का कर्ज माफी का वादा पूरा नहीं करने के कारण जनता कांग्रेस से नाराज है। वहां बीजेपी की ताकत फिर बढ़ गई है। पहले विपक्षी नेता कहते थे कि मोदी ने पांच साल में किया ही क्या है? पर जब देखा कि इस मुद्दे पर मोदी को मात नहीं दी जा सकती है तो गाली गलौज पर उतर आये। वे जानते हैं कि मोदी सरकार के पांच साल के कामों पर उन्हें चुनाव में नहीं हराया जा सकता है। इसलिए एक दूसरे को जेल भेजने वाले परस्पर विरोधी दल अपने पापों पर पर्दा डालने के लिए एकजुट हो गए। लेकिन बिना नीतियों और कार्यक्रमों के अभाव में यह एकता सिर्फ  मोदी को हटाने पर आकर टिक गई।

विपक्षी दलों के बेईमान और भ्रष्ट नेता इस बात  को समझते हैं यदि मोदी दोबारा सत्ता में आ गये तो हम लोगों को जेल जाना पड़ सकता है। इसलिए उनके सामने अब अस्तित्व बचाने की मजबूरी है। कांग्रेस के नेता राहुल गांधी बिना किसी आधार के चौकीदार के चोर-चोर होने का नारा लगा रहे हैं। जबकि वे स्वयं नेशनल हेराल्ड के मामले में जमानत पर हैं। प्रियंका वाड्रा के पति राबर्ट वाड्रा पर भी जमीनों की हेराफेरी के मामले की जांच चल रही है। ऐसे में राहुल गांधी की भी यह मजबूरी समझी जा सकती है कि अब वह ‘चौकीदार चोर है’ का हल्ला मचाकर अपना बचाव करना चाहते हैं।

राहुल सिर्फ  प्रधानमंत्री को चोर ही नहीं कह रहे, बल्कि यह झूठा दावा भी कर रहे हैं कि उन्होंने अनिल अंबानी के खाते में 30 हजार करोड़ रूपये डाले। मुश्किल यह है कि राहुल गांधी और उनके साथी यह भी साबित करना चाह रहे हैं कि मौजूदा प्रधानमंत्री को तो चोर कहना उनका अधिकार है, लेकिन अगर कोई पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के खिलाफ टिप्पणी करे तो वह अपराध और अनैतिक है। अगर चौकीदार चोर कहना सही है तो फिर ‘भ्रष्टाचारी नम्बर वन’ से आपत्ति क्यों है। राजनीति में व्यक्तियों के कामकाज का लेखा जोखा किसी भी समय हो सकता है।

आज यह देश कश्मीर के मामले में नेहरू की गलतियों का ही नतीजा भुगत रहा है। आजादी के तुरन्त बाद पाकिस्तान ने एक तिहाई कश्मीर पर कब्जा कर लिया और नेहरू देखते रह गये। उन्होंने यूएनओ में जाकर पूरे मामले को उलझा दिया। नेहरू के प्रधानमंत्रित्व काल में ही भारत के लद्दाख के एक बहुत बड़े हिस्से पर चीन ने कब्जा कर लिया। श्रीमती इंदिरा गांधी के भी काले कारनामे कम नहीं हैं। इमरजेंसी लगाकर उन्होंने पूरे देश को जेलखाना बना दिया था। लाखों लोगों को बिना किसी कसूर के जेल में डाल दिया था। जयप्रकाश नारायण जैसे देशभक्त स्वतंत्रता सेनानी को जेल की तनहाई में बंद करके यातनाएं दी गयीं।

नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन किया गया और समाचार पत्रों पर सेंसरशिप लगाकर उनकी आवाज को बंद कर दिया गया था। राजीव गांधी के प्रधानमंत्रित्व काल में ही भोपाल गैस त्रासदी के समय हजारों लोग बेमौत मारे गए थे। उन्होंने उसके गुनहगार एंडरसन को जेल भेजने के बजाए सरकारी प्लेन से विदेश भगा दिया गया था। सिखों के सामूहिक कत्लेआम पर आंखें मंूदे रखना क्या राजीव गांधी का पाप नहीं है। राजनीति में जब आप वर्तमान प्रधानमंत्री पर बेबुनियाद आरोप लगाते और गाली गलौज करते हैं तो कम से कम सच्चाई सुनने के लिए भी तैयार रहिए।

यह देश नेहरू, इंदिरा और राजीव की जागीर नहीं है। देश में लोकतंत्र है और नरेन्द्र मोदी भी देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत चुने गये प्रधानमंत्री हैं। वह देश की जनता की आशाओं और आकांक्षाओं के प्रतीक हैं, उनकी आलोचना तथ्यों के साथ की जा सकती है पर गाली गलौज से उनका अपमान करने का किसी को हक नहीं है। कांग्रेसियों को चौकीदार चोर है कहने में तो मजा आता है पर राजीव गांधी ‘भ्रष्टाचारी नम्बर वन’ कहने पर मिर्ची क्यों लगती है। सभी जानते हैं कि बोफोर्स के मामले में दलाली ली गई थी और यूपीए के शासनकाल में ही क्वात्रोची को देश से भाग जाने दिया गया था।

कांग्रेस के नेता प्रधानमंत्री की तर्कसंगत आलोचना के बजाए जिस घटिया स्तर पर गाली गलौज कर रहे हैं उसकी किसी लोकतांत्रिक देश में मिसाल नहीं मिलती है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी प्रेम की भाषा बोलने का दावा करते हैं। लेकिन प्रधानमंत्री को वे और उनकी पार्टी के नेता मोस्ट स्टूपिड पीएम, जवानों के खून का दलाल, गद्दाफी, हिटलर, मुसोलिनी, मानसिक तौर पर बीमार, नीच, मां को गाली दी, मोदी के पिता-दादा का नाम नहीं मालूम, नालायक, नकारा बेटा, निकम्मा, नशेड़ी औरंगजेब कहते हैं। यह प्रधानमंत्री का अपमान नहीं तो और क्या है? पर कांग्रेस और विपक्ष के नेता मोदी को जितनी अधिक गालियां देंगे उससे उनका ही नुकसान होगा। चुनावों में इसका जवाब विपक्षी दलों को जनता देगी क्योंकि आम जनता के लिए उन्होंने बहुुत काम किया।

- निरंकार सिंह













 

यह भी पढ़ें:

चक्रव्यूह रचने में माहिर अमित शाह

तमाम अंतर्विरोधों और विरोधाभासों के बावजूद भाजपा लगातार दूसरी बार अपने ही बूते पर सरकार बनाने में सफल हुई है, इसके पीछे नरेन्द्र मोदी की करिश्माई शख्सियत की तो सबसे बड़ी भूमिका रही ही लेकिन साथ ही इसमें भाजपा

29/05/2019

जानिए, राजकाज में क्या है खास?

इन दिनों सवाई गुणा मदद को लेकर दोनों दलों में चिंतन-मंथन जोरों पर है। हो भी क्यों ना मामला मदद से ताल्लुकात रखता है और वो भी चुनावों में।

15/04/2019

श्वानजी का कहर!

डॉगीजी यानी श्वानजी आजकल अखबारों की सुर्खियों में हैं। खासकर प्रदेश की राजधानी जयपुर में। वो भी देशभक्ति और चौकीदार के शोर-शराबों के बीच ‘स्वामिभक्ति’ के तमगेधारी।

17/05/2019

वैश्विक तापमान बढ़ोतरी का संकट

बीते दिनों वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी के खिलाफ नए सिरे से कदम उठाने और विश्व नेताओं पर दबाव बनाने के लिए यूरोप में लाखों लोग सड़क पर उतरे। कारण तापमान में दिनोंदिन हो रही बढ़ोतरी समूची दुनिया के लिए भीषण खतरा बनती जा रही है। दुनिया के वैज्ञानिक सबसे अधिक इसी बात से चिंतित हैं।

06/12/2019

सबसे तेज अर्थव्यवस्था का सच

वर्ष 2014 में भाजपा ने आर्थिक विकास के मुद्दे पर चुनाव जीते थे। भाजपा का कहना था कि कांग्रेस में निर्णय लेने की क्षमता नहीं रह गई थी।

30/04/2019

ई-वाहनों के लिए पेट्रोल पर सेस लगाना कहां तक उचित?

हाल ही में सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रमोट करने के लिए सेस लगाया है। केन्द्र सरकार वर्ष 2030 से देश में सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहनों की ही बिक्री के लिए जोर दे रही है। सरकार का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन दिया जाए और पेट्रोल-डीजल पर 1-1 रुपए का अतिरिक्त सेस लगाया जाएगा। इस तरह का सेस लगाना कहां तक उचित है?

19/08/2019

मेडिकल कॉलेज दाखिला का महा स्कैम

कुछ महीने पहले कर्नाटक में कार्यरत आयकर विभाग के अधिकारियों ने सरसरी तौर पर कुछ बैंक खातों की जांच में पाया कि राज्य के दो निजी मेडिकल संस्थानों और और एक इंजीनियर संस्थान के कुछ कर्मचारियों के खातों में नियमित अन्तराल से मोटी राशि नकदी के रूप में जमा करवाई जा रही है।

21/10/2019