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ओपिनियन

भारत के चुनाव और विदेशी मीडिया

Friday, May 10, 2019 09:00 AM

भारत के लोकसभा के आम चुनाव पर सारे संसार की नजरे टिकी हुई हैं। संसार के सभी प्रमुख समाचारपत्र इस चुनाव का विश्लेषण कर रहे हैं। इन समाचार पत्रों में सबसे अधिक दिलचस्प समाचार लंदन की प्रख्यात पत्रिका ‘द इकोनोमिस्ट’ में प्रकाशित हुए हैं। इकोनोमिस्ट ने अपने दर्जनों संवाददाताओं को भारत भेजकर इस चुनाव के पल-पल की खबरें प्रकाशित की हैं। इस पत्रिका को सारे संसार में सभी प्रतिष्ठित लोग पढ़ते हैं। इस पत्रिका ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि जिस तरह की हवा भारत में बह रही है उसे देखकर ऐसा लगता है कि नरेन्द्र मोदी दुबारा से प्रधानमंत्री बन जाएंगे। इस पत्रिका का कहना है कि पूरे भारत में राष्ट्रवाद की लहर बह रही है और इसका पूरा श्रेय नरेन्द्र मोदी को जाता है।

इस पत्रिका ने लिखा है कि इस आम चुनाव में भारत में 90 करोड़ से अधिक मतदाता भाग ले रहे हैं और 10 लाख से अधिक मतदान केन्द्र स्थापित किए हैं। भारत के आम चुनाव को देखते हुए ऐसा लगता है कि यदि यूरोपीयन यूनियन के सभी देश, अमेरिका, कनाडा, मैक्सिको, जापान और दक्षिण कोरिया को मिला दिया जाए और वहां एक साथ चुनाव कराए जाएं तो भारत की लोकसभा के आम चुनाव उनके बराबर होंगे। लेकिन भारत की जनता और भारत के चुनाव आयोग की मुस्तैदी है कि इतने बड़े चुनाव को बड़े ही शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थ्ति तरीके से चुनाव कराया जा रहा है।

लोकसभा का यह चुनाव 11 अप्रैल को शुरू हुआ और 7 खंडों में यह चुनाव होगा जिससे चुनाव आयोग के अफसरों और देश के सुरक्षा बलों पर कोई बोझ नहीं पड़ सके, 40 लाख से अधिक ईवीएम मशीने जो बैटरी से चलती हैं। सभी मतों की गिनती 23 मई को संपन्न हो जाने की संभावना और उसी दिन पता चल जाएगा कि अगली सरकार किस दल या गठबंधन की बनेगी और देश का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा?

इस पत्रिका के संवाददाताओं ने लिखा है कि चुनाव का सारा काम इतने सुव्यवस्थित तरीके से चल रहा है जिसे देखकर आश्चर्य होता है कि इन लोगों ने इतना बड़ा प्रबंध कैसे किया होगा? इस चुनाव में कुल मिलाकर 8 हजार प्रत्याशी और दो हजार से ज्यादा दल चुनाव मैदान में हैं। ‘इकोनोमिस्ट’ ने अपने विश्लेषण में विभिन्न राजनैतिक दलों को मिलने वाली अनुमानित सीटों का आकलन किया है जिसके अनुसार भाजपा को 2014 में 282 सीटें मिली थी तो इस बार 220 से 232 सीटें मिलने की संभावना जताई है। भाजपा के सहयोगी दलों को 2014 में 54 सीटें मिली थी। इस बार उन्हें 41 से 51 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है। कांग्रेस को पिछली बार से ज्यादा सीटें मिलने की संभावना है लेकिन वह सरकार बना पाएगी यह कहना गलत है। पिछले बार कांग्रेस को 44 सीटें मिली थी

इस बार 74 से 84 तक सीटें मिलने का अनुमान है। कांग्रेस के सहयोगी दलों को पिछली बार 15 सीटें मिली थी, इस बार 41 से 51 सीटें मिल सकती हैं। सबसे अधिक फायदा में एसपी और बीएसपी का गठनबंधन रहता हुआ लग रहा है जिसे पिछली बार केवल 5 सीटें मिली थी, इस 37 से  47 सीटें मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है। वामदलों की हालत खस्ता होगी, उसे पिछली बार 12 सीटें मिली थी। इस बार उन्हें 5 से 15 सीटें मिल सकती हैं। अन्य छोटे दलों को पिछली बार 131 सीटें मिली थी। इस बार उनकी संख्या घटकर 88 से 98 तक रहने की संभावना है।

‘इकोनोमिस्ट’ का कहना है कि मोदी ने जिस तरह पूरे देश में राष्ट्रवाद की लहर फैला दी है उससे उनकी पार्टी का दुबारा से सत्ता पर आसीन होना आसान हो जाएगा। कांग्रेस को पिछली बार मात्र 44 सीटें मिली थी। इस बार इसमें कोई बहुत बड़ा ईजाफा होने का अनुमान नहीं है। परन्तु सदन में उसकी स्थिति मजबूत अवश्य होती दीख रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जिस प्रकार कठोर परिश्रम करके चिल-चिलाती गर्मी में देश के एक कोने से दूसरे कोने में जा रहे हैं उसका असर भी लोगों पर पड़ रहा है। इस पत्रिका का कहना है कि यह सच है कि किसान और छोटे दुकानदार तथा अल्पसंख्यक कुछ  हद तक मोदी की नीतियों से नाराज हैं। परन्तु अंत में वोट तो वे उन्हीं को देंगे। यदि भारी मत नहीं दे सके तो 50 प्रतिशत तक मत उन्हें अवश्य देंगे।

इस पत्रिका का कहना है कि मोदी शुरू से राष्ट्रवाद और देश की सुरक्षा की बातें करते आ रहे हैं। जब 14 फरवरी को 20 वर्ष के एक आतंकी आदिल अहमद डार ने विस्फोटक से भरी एक कार को सुरक्षा बलों के काफिल के बीच में घुसाकर उड़ा लिया जिसमें 40 से अधिक जवान शहीद हो गए। इस पर मोदी ने ऐलान किया था कि इसका बदला हर हालत में लिया जाएगा और इसके तुरन्त बाद उन्होंने सुरक्षा बलों को खुली छूट दे दी। हमारे सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान की सीमा में प्रवेश कर आतंकवादी ठिकानों को बम बरसा कर नेस्तनाबूद कर दिया।

इससे पूरे देश की जनता को ऐसा लगा कि मोदी जो कहते हैं वह करते हैं। अपने विभिन्न भाषणों में देश के कोने कोने में जाकर मोदी ने कहा वक्त की जरूरत है ‘देश की सुरक्षा’ और देश की सुरक्षा सर्वोपरि है। उन्होंने श्रीलंका का भी उदाहरण दिया। उनकी बातों से पूरे देशवासी सहमत हो गए और ‘इकोनोमिस्ट’ पत्रिका का कहना है कि भारत की वर्तमान स्थिति को देखकर ऐसा लगता है कि किसी विपक्षी दल द्वारा भाजपा को हराना आसान नहीं होगा और मोदी निश्चित रूप से फिर से प्रधानमंत्री बन जाएंगे।

 - डॉ. गौरीशंकर राजहंस
 

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