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Saturday 7th of December 2019
 
ओपिनियन

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इतने राम कहां से लाऊं?

भारत वर्ष हजारों साल से गांव और गरीबी प्रधान देश है। हमें वैदिक काल से ही एक प्रजा के रूप में देवी-देवताओं और राजा की विजय के दिवस मनाने की आदत है। हमारा इतिहास, संस्कृति और परम्परा में हर दिन शक्ति और भक्ति का उत्सव मनाता है। दुनिया में सत्य, शिव और सुंदर की महाखोज करते रहना भी हमारी इस बात का प्रमाण है कि मनुष्य की जीवनधारा को सुख-दु:ख का संगीत मानकर ही चलते रहना चाहिए।

10/10/2019

जानिए, राजकाज में क्या है खास?

राज का काज करने वालों की जुबान पर आजकल दो नाम चढ़े हुए हैं। इनमें एक सबसे बड़े सरकारी साहब हैं, तो दूसरे वे अफसर हैं, जिन्होंने राज के खजाने की चाबी संभाल रखी है।

12/08/2019

चक्रव्यूह रचने में माहिर अमित शाह

तमाम अंतर्विरोधों और विरोधाभासों के बावजूद भाजपा लगातार दूसरी बार अपने ही बूते पर सरकार बनाने में सफल हुई है, इसके पीछे नरेन्द्र मोदी की करिश्माई शख्सियत की तो सबसे बड़ी भूमिका रही ही लेकिन साथ ही इसमें भाजपा

29/05/2019

संविधान और डॉ. आम्बेडकर

डॉ. भीमराव अम्बेडकर को सिर्फ दलितों के उद्धार नायक के रूप में देखकर उनका स्मरण करना दरअसल उनके सम्पूर्ण और विराट व्यक्तित्व की अनदेखी करना होगा। उन्होंने स्वतंत्र भारत के संविधान का जो खाका (1947-1950) के बीच तैयार किया था, उसे आज भी भारत में कई विद्वान अमर कृति तक कहते हैं।

06/12/2019

जलवायु परिवर्तन से बंजर होती जमीन

जलवायु परिवर्तन समूची दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है। जलवायु परिवर्तन से जहां समुद्र का जलस्तर बढ़ने से कई द्वीपों और दुनिया के तटीय महानगरों के डूबने का खतरा पैदा हो गया है।

08/11/2019

भारत की कूटनीतिक उपलब्धि

भारत सरकार के अथक प्रयासें के बाद अंतर्राष्ट्रीय दबाव में जर्जर अर्थव्यवस्था वाले पाकिस्तान ने स्वीकारा है कि उसकी धरती पर मदरसों में घृणा का पाठ पढ़ाया जाता रहा है। स

06/05/2019

प्रधानमंत्री मोदी की सफल विदेश नीति

17वीं लोकसभा के लिए चुनाव का दौर शुरू हो गया है। भारत में और भारत के बाहर भी मीडिया में इस बात की चर्चा हो रही है कि गत पांच वर्षों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विभिन्न क्षेत्रों में क्या उपलब्धि रही?

19/04/2019