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साइकिल वाले ने बनाई महादानियों की सेना, जो हमेशा रक्तदान के लिए रहती है तैयार

Friday, August 30, 2019 09:50 AM
10वीं पास अमजद ने महज 60 दिन में 7 हजार ऐसे महादानियों की फौज तैयार की है, जो हमेशा रक्तदान के लिए तैयार रहते हैं।

चूरू। मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंजिल, लोग मिलते गए और कारवां बनता गया। एक शायर का यह शेर चूरू में साइकिल की दुकान चलाने वाले अमजद तुगलक पर सटीक चरितार्थ होता नजर आ रहा है। उन्होंने जागरूक रहकर ऐसी मिशाल पेश की है, जिसने सैकड़ों लोगों की जिंदगियां बचाई हैं।

10वीं पास अमजद ने महज 60 दिन में 7 हजार ऐसे महादानियों की फौज तैयार की है, जो हमेशा रक्तदान के लिए तैयार रहते हैं। उनका सोशल मीडिया पर चलाया गया यह अभियान जारी है और रक्तदाताओं की संख्या में  लगातार इजाफा हो रहा है। खास बात यह है कि इसके जरिए खाड़ी देशों में भी रक्तदान किया जा रहा है।

ऐसे हुई शुरुआत
दरअसल ए पॉजिटिव गु्रप के अमजद ने कुछ माह पूर्व एक अनजान व्यक्ति को एक यूनिट रक्तदान किया था, लेकिन एक यूनिट रक्त मरीज के लिए कम था। उसे दो यूनिट रक्त की आवश्यकता थी। अमजद ने बिना देर किए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हुए फेसबुक पर ए पॉजिटिव गु्रप की आवश्यकता की पोस्ट डाल दी। मात्र 2 घंटे में 257 लोगों ने रक्तदान की पेशकश की। लोगों में यह जागरुकता देख अमजद ने नि:शुल्क रक्तदान के लिए चूरू हेल्पलाइन नाम से एक व्हाट्सएप गु्रप बना डाला। जल्द ही इस गु्रप में सदस्यों की संख्या 250 पहुंच गई। इसके बाद एक और गु्रप बनाया गया। सदस्यों की बढ़ती संख्या देख अमजद ने चूरू हेल्पलाइन नाम से ही फेसबुक पेज बना दिया।

किसी की जान ना जाए
अमजद के अनुसार इस गु्रप में ब्लड बैंक के कर्मचारी तक जुड़े हैं। ये कर्मचारी आवश्यकता होने पर गु्रप में रक्त की जरूरत बताते हैं। रक्तदाताओं की सूची में छात्र, व्यापारी, अधिवक्ता, किसान, मजदूर, पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। चूरू के अलावा बीकानेर, सीकर या जयपुर के अस्पतालों में भी रक्त की आवश्यकता का संदेश दिया जाता है। गु्रप के सदस्यों की मानें तो उनका लक्ष्य रक्त के अभाव में किसी की जान नहीं जाना है।