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घट स्थापना के साथ चैत्र नवरात्र की शुरुआत, पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा

Tuesday, March 24, 2020 12:00 PM
चैत्र नवरात्र 2020 में किसी तिथि का क्षय नहीं।

राजसमन्द। धर्म के अनुसार हर संप्रदाय का अपना अलग-अलग नववर्ष मनाया जाता है। हिंदू धर्म के अनुसार विक्रम संवत  का शुभारंभ चैत्र मास की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को होता है। इसी दिन से नवरात्र की शुरुआत होती है। आदि शक्ति की आराधना का पावन पर्व चैत्र नवरात्र इस वर्ष आज 25 मार्च (बुधवार) से शुरू हो गया है। इसे वासंतिक नवरात्र भी कहते हैं। इसके साथ ही हिन्दू नववर्ष यानी नवसंवत्सर 2077 का शुभारम्भ हो गया है। इस बार किसी तिथि का क्षय नहीं है। इस वर्ष चैत्र नवरात्र 25 मार्च को प्रारंभ होकर 2 अप्रैल को उत्थापन होगा। सविता ज्योतिष केन्द्र के आचार्य अर्जुनकृष्ण पालीवाल ने बताया कि इस वर्ष की प्रतिपदा 24 मार्च को दोपहर 1:58 पर प्रारंभ हो गई, जो 25 मार्च को सायं 5:27 पर समाप्त होगी। बसंत नवरात्रा को चैत्र नवरात्रि या वासंतीक नवरात्र भी कहते हैं। बसंत नवरात्रा का प्रारंभ चैत्र शुक्ल में उदय व्यापीनी प्रतिपदा में किया जाता है और प्रात: काल शुभ माना जाता है। इस वर्ष चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा का प्रात: काल 25 मार्च को है।

शास्त्र के अनुसार बसंत नवरात्र का प्रारंभ और घट स्थापना इसी दिन की जाएगी। चौघड़िया के अनुसार प्रात: 6:39 से 9:40 तक लाभ और अमृत का चौघड़िया रहेगा तथा दोपहर 11:10 से दोपहर 12:30 तक लाभ का चौघड़िया रहेगा। विक्रम संवत 2077 सूर्य उत्तरायण वसंत ऋतु एवं प्रमादी नामक संवत्सर माना जाएगा। इस वर्ष का शुभारंभ बुधवार से हो रहा है जो शुभ संकेत लेकर आ रहा है। इस नवरात्रि में चार सर्वार्थ सिद्धि योग पांच रवि योग और एक गुरु पुष्य योग रहेगा। बुधवार से प्रारंभ होने के कारण बुध ग्रह व्यापार लेकर आने वाला होगा। लेकिन व्यापारी असंतुष्ट रहेंगे, खाद्य सामग्रियों में तेजी होगी। संवत 2077 का राजा बुद्ध एवं मंत्री चंद्रमा है, यह प्रमादी संवत्सर होने के कारण वर्षभर अपराधों में बढ़त रहेगी। व्यापारी, शिल्पकार, चिकित्सक, लेखक, लाभान्वित रहेंगे। स्त्रियों का प्रतिनिधित्व बढ़ेगा।

नवरात्रि से वातावरण में तमस का अंत होता है और सात्विकता का शुभारंभ होता है। नवरात्रि से मन में उल्लास उमंग और उत्साह की वृद्धि होती है। 25 मार्च को मां की शैलपुत्री की पूजा होगी, 26 को ब्रह्मचारिणी, 27 को चंद्रघंटा, 28 को कुष्मांडा, 29 को स्कंदमाता, 30 को कात्यायनी व 31 मार्च को कालरात्रि तथा 1 अप्रैल को महागौरी व 2 अप्रैल को सिद्धिदात्री मां जगदंबा के स्वरूपों की पूजा होगी। वर्ष 2020 में मार्च 31 से 29 जून तक भारत के प्रधानमंत्री के लिए विशेष मान प्रतिष्ठा एवं प्रभुत्व का समय रहेगा। विश्व पटल पर अप्रत्याशित वृद्धि होगी, विश्व के अनेक राष्ट्र भारत से दोस्ती के लिए आगे आएंगे।

इस बार नवरात्र में पूरे 9 दिनों तक मां की पूजा, अर्चना व व्रत का अवसर मिलेगा। हालांकि देवी मंदिरों में इस बार नवरात्र पर भक्तों की भीड़ नहीं रहेगी। क्योंकि श्रद्धा, आस्था के प्रवाह पर कोरोना वायरस का साया रहेगा। महामारी को देखते हुए देशभर के कई शहरों में लॉकडाउन के हालाता है। जिसके चलते मंदिरों के पट भक्तों के लिए बंद रहेंगे। पूजन-अर्चन के लिए भक्तों का प्रवेश नहीं होगा। साथ ही भजन संध्या व देवी जागरण के कार्यक्रम नहीं होंगे। इसलिए भक्त घर पर ही विधि विधान से कलश स्थापना करके आदि शक्ति से कामना करेंगे।

घट स्थापना का मुहूर्त
नवरात्र में घट स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:05 से 7:01 तक रहेगा। चौघड़िया मुहूर्त सुबह 6:05 से 7:36 तक और अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 से दोपहर 12:33 तक रहेगा।

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