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जोधपुर जिले का एक ऐसा गांव जहां 68 वर्ष से नहीं मनी दीपावली

Thursday, October 31, 2019 00:55 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर

जोधपुर। जोधपुर जिले का एक गांव ऐसा भी है जो अपने 18 मृतक किसान भाइयों की याद में पिछले 68 वर्षों से केवल प्रतीकात्मक दीपावली मनाते हैं। जोधपुर जिले का भुण्डाना गांव ऐसा है जहां गांववासी पिछले 68 वर्ष से दीपावली के दिन डाकुओं के हाथ मारे गये 18 किसान साथियों की याद में केवल प्रतीकात्मक दीपावली मनाते हैं बल्कि पूरा गांव दिवंगत आत्माओं की याद में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन करता है।


सन 1947 में भारत आजाद होने के बाद जागीरदारी प्रथा समाप्त हो गई थी, लेकिन मारवाड़ रियासत में कई जगह जागीरदारी प्रथा कायम थी और जोधपुर जिले का भुण्डाना गांव के किसान सामंतवादी प्रथा का विरोध कर रहे थे, सन् 1950 को भारत का संविधान लागू होने के बाद किसानों को आस जगी थी कि सामंतवादी प्रथा का अंत होगा, लेकिन मारवाड़ में कई जगह इस प्रथा का अंत हुआ नहीं जिसका किसान विरोध कर रहे थे। जिसको देखते हुये सन् 1951 में 31 अक्टूबर को दीपावली रामा श्यामा वाले दिन डाकू कल्याण सिंह व उनके गिरोह ने मलार व भुण्डाना गांव के जागीरदारी प्रथा का विरोध करने वाले 18 किसानों को गोलियों से भून दिया था।


यह किसान मारे गये थे
जागीरदारी प्रथा का विरोध कर रहे हीराराम पुत्र गिरधारी राम चोयल, लिखमाराम पुत्र मूलाराम माचरा, जयरूपाराम पुत्र मूलाराम माचरा, जोधाराम पुत्र प्रभुराम चोयल, मेहराराम पुत्र जेठाराम चोयल, उगमाराम पुत्र मोटाराम ,लालू खान पुत्र हमीर खान जाति सिंधी मुसलमान, बिरदाराम पुत्र सेवाराम जाखड, रामबक्श पुत्र भूराराम जाखड, नारायण राम पुत्र शिम्भूराम , लिखमाराम पुत्र गिरधारी राम, भभूतराम पुत्र पालाराम , नारायण राम पुत्र किशनाराम, तेजाराम पुत्र देवाराम, नैनाराम पुत्र अमराराम खोड जिन्हे डाकुओ ने जागीरदारी प्रथा का विरोध करने के कारण मौत के घाट उतार दिया था।


ग्रामीणों ने की शहीद का दर्जा देने की मांग
लोको पायलेट नाथूराम जाखड़ ने बताया कि मृतक किसानों की याद में पिछले लंबे समय से ग्रामीण उन्हें शहीद का दर्जा देने की मांग करता रहा है।


मृतकों को शहीद का दर्जा देने की मांग
गांव के निवासी व जोधपुर रेलमंडल में लोको पायलेट नाथराम जाखड़ ने बताया कि जो किसान विरोध कर रहे थे वे सभी कम आयु वाले थे। डाकुओं द्वारा मारने के कारण उनकी विधवा, बच्चे आज भी याद करके आंसु निकल जाते है। इस कारण गांव वासी केवल प्रतीकात्मक दीपावली मनाते है और रामश्याम वाले दिन गांव के चौक में एकत्र होकर उनको दीप प्रज्जवलित कर श्रद्धांजलि देते है। दीपावली वाले दिन आयोजित श्रद्धांजलि सभा में नरेश जाखड़, राजूराम, राजेन्द्र, कपिल सोऊ, सुमेर सिंह, पूनाराम, सहित बडी संख्य में ग्रामीण व गणमान्य उपस्थित थे।