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राजस्थान में 805 किलर प्वॉइंट, हमेशा रहता है हादसे का खतरा

Friday, October 18, 2019 12:45 PM
कॉन्सेप्ट फोटो

जयपुर। लापरवाही या यातायात नियमों की अनदेखी की वजह से प्रदेश में हर रोज कोई न कोई सड़क हादसा होता है। हादसे के पीछे वाहनों की तेज रफ्तार, बिना हेलमेट और सीट बेल्ट ना लगाना प्रमुख कारण हैं। इनके अलावा एक अहम कारण विभागों की ओर से छोड़े गए किलर प्वाइंट है। इन किलर प्वॉइंट पर हर रोज मौत का तांडव होता है। प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने राज्य के हर जिले के किलर प्वॉइंट की सूची आॅनलाइन, परिवहन, पीडब्लूयडी और एनएचएआई को भेज दी है। अभी प्रदेश में 805 ऐसे किलर प्वाइंट हैं, जहां मौत कभी भी आकर किसी की जिदंगी निगल लेती है। ऐसे में यदि इन किलर प्वाइंट को सुधारा जाए तो कई परिवार की जिंदगियों को उजड़ने से बचाया जा सकता है।

नेशनल हाइवे में 552 किलर प्वाइंट
प्रदेश पुलिस ने किलर प्वॉइंट को नेशनल हाइवे, स्टेट हाइवे और अलग से तीन श्रेणियों में बांटा हैं। नेशनल हाइवे के अंडर में आने वाले किलर प्वाइंट में सबसे ज्यादा अजमेर में 48 प्वाइंट हैं। इसी प्रकार राजसमंद में 35, जयपुर ग्रामीण में 32, पाली में 29, सीकर में 29, बाड़मेर में 26, टोंक में 21, जयपुर पूर्व में 20, भरतपुर में 20, जोधपुर पश्चिम में 18, दौसा में 18, बूंदी में 17, जयपुर पश्चिम में 16, चित्तौड़गढ़ में 16, धौलपुर में 15, सिरोही में 12, डूंगरपुर में 11, जोधपुर पूर्व में 10, बारां में 10, सवाई माधोपुर में 9, झालावाड़ में 8, जोधपुर ग्रामीण में 8, जयपुर दक्षिण में 8, जयपुर उत्तर में 7, बीकानेर में 6, जैसलमेर में 6, नागौर में 5, हनुमानगढ़ में 4, कोटा ग्रामीण में 4, बांसवाड़ा में 3,जालौर में 3, चूरू और कोटा शहर एक और प्रतापगढ़ और करौली में शून्य किलर प्वाइंट हैं।

अन्य किलर प्वाइंट
जयपुर पूर्व में 4, जयपुर पश्चिम में 2, जयपुर उत्तर में 2, जयपुर दक्षिण में 4, झुंझुनूं में 1, सीकर में 2, अलवर में 7, चूरू में 4, हनुमागढ़ में 2, सवाई माधोपुर में 3, नागौर में 3, जोधपुर पूर्व में 3, जोधपुर पश्चिम में 10, जैसलमेर में 1, बाड़मेर में 3, सिरोही में 3, चित्तौड़गढ़ में 2, डूंगरपुर में 1, बांसवाड़ा और बूंदी मेंतीन किलर प्वॉइंट हैं। वहीं जयपुर ग्रामीण, दौसा, बीकानेर, भरतपुर, धौलपुर, अजमेर, नागौर, टोंक, जोधपुर ग्रामीण, जालौर, पाली, प्रतापगढ़, राजसमंद, कोटा शहर, कोटा ग्रामीण, झालावाड़ और बारां में शून्य किलर प्वॉइंट हैं।

स्टेट हाइवे में 187 किलर प्वाइंट
प्रदेश में स्टेट हाइवे के अंतर्गत अलवर में 45 किलर प्वाइंट हैं। वहीं सीकर में 17, सवाई माधोपुर में 15, भरतपुर में 12, नागौर में  7, बूंदी में 9, जयपुर ग्रामीण में 8, उदयपुर में 7, दौसा में 7, अजमेर में 6, हनुमानगढ़ में 6, जयपुर पश्चिम में 6, कोटा ग्रामीण में 5, झुंझुनूं में 5, जालौर में 4, जोधपुर पूर्व में 4, डूंगरपुर में 4, धौलपुर में 3, झालावाड़ में 3, जोधपुर ग्रामीण में 2, चूरू, बाड़मेर, सिरोही, बांसवाड़ा, राजसमंद, बांरा में एक-एक और जयपुर पूर्व, जयपुर उत्तर, जयपुर दक्षिण, बीकानेर, करौली, जोधपुर पश्चिम, जैसलमेर, पाली, चित्तौड़गढ़, कोटा शहर, कोटा ग्रामीण में जीरो किलर प्वाइंट हैं।

क्या होता है किलर प्वॉइंट
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार किलर प्वॉइंट सड़क पर वह स्थान है, जहां 500 मीटर के अंदर कोई हादसा होता है। उसमें मौत हो या फिर कोई गंभीर घायल हुआ हो। इसके अलावा पिछले तीन साल में 500 मीटर के भीतर ही दस मौत हुई हों।

इनका कहना
पुलिस मुख्यालय से किलर प्वाइंट को लेकर प्रस्ताव प्राप्त हो गया है। इसके लिए विभाग ने फंड जारी कर दिया है।।
- राजेश यादव, परिवहन आयुक्त