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गरबा महोत्सव में झलका संस्कृति का अनूठा संगम

Monday, October 07, 2019 15:10 PM
गरबा महोत्सव में गरबा करते हुए महिलाएं और युवतियां।

जयपुर। नवरात्रि में भक्ति और मनोरंजन से सराबोर, खुशनुमा शाम में डीजे साउण्ड की करतल ध्वनि और रंग-बिरंगी लाइट्स की रोशनियों का संगम ऐसा लग रहा था कि मानो गुजरात की गरबा संस्कृति का कीर्तिमान स्थापित किया हो। अवसर था सनराईज ग्रुप ऑफ स्कूल्स सोनी का बाग मुरलीपुरा में दैनिक नवज्योति के निर्देशन आयोजित गरबा महोत्सव का। समारोह के मुख्य अतिथि पूर्व न्यायाधीश बनवारी लाल शर्मा थे। अध्यक्षता पूर्व प्रशासनिक अधिकारी केदार मल गुप्ता ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में सोनी का बाग विकास समिति के अध्यक्ष आर.पी. मीना एवं पार्षद सुशील शर्मा उपस्थित रहे।

पारम्परिक नृत्य की झलक
मां दुर्गा की शक्ति से अभिप्रेरित गरबा डांडिया के पारंपरिक नृत्य की झलक विद्यमान थी। राजस्थान की धरती पर गुजरात की संस्कृति को अंगीकार करने का तालमेल डांडियों की खनक के साथ अपनी एकरूपता की गवाही दे रहे हों।

नृत्य-संगीत का सैलाब
रंग-बिरंगी रोशनियों की झलक के साथ रंग-बिरंगी पोशाकों में सभी महिलाओं ने एकरूपता की कदमताल की। दर्शकों ने अभिव्यक्ति को साकार रूप देने के लिए अपने आपको रोक नहीं पाई और अपने स्थान पर ही अपने हुनर का प्रदर्शन किया। परंपरा, भक्ति, लोकरंग और नृत्य-संगीत का सैलाब ऐसा उमड़ा कि वास्तविक गुजरात की संस्कृति साकार हो उठी।

सुर, लय एवं ताल की बानगी
जब गरबा क्वीनों ने ‘उड़ी-उड़ी जाए’, ‘पंखीड़ा-पंखीड़ा’, ‘तूने चूड़ी जो खनकाई’, ‘चालो धीरे-धीरे’, ‘चालो बैला गरबा खेलो’, ‘ढोल बाजे नगाड़ा संग ढोल बाजे’ के साथ ‘ढोलीया-ढोलीया’ की मदमस्त प्रस्तुति ने ऐसा धमाल किया कि चारों तरफ महिलाओं ने अपने स्थान पर हूटिंग के साथ थिरकना शुरू कर दिया। साथ ही बिना हाथों में डांडिया लिए अपने स्थान पर गरबा क्वीनों की बेमिसाल प्रस्तुति में सहभागी बनी। भक्ति से सराबोर माहौल में बच्चों एवं महिलाओं ने खूब हूटिंग की और उनका हौसला अफजाई किया। डांडिया रास का सुर,लय, ताल की ऐसी बानगी कि थमने का नाम नहीं ले रही थी। साथ ही गरबा क्वीनों में निरंतरता के साथ अपने हुनर की बानगी का अहसास कराया।

गरबा क्वीन का निर्देशन
जजेज की पैनी नजर और उनके फैसले के अनुसार इस महोत्सव में बनी गरबा क्वीन बीना शेखावत, चंचल मिश्रा एवं रिया जैन ने अभिव्यक्ति गरबा की बारीकियों को सजाते हुए दर्शकों को यह सीख दी कि गुजरात की संस्कृति का वास्तविक गरबा क्या है? इन गरबा क्वीनों ने अपने हुनर को छलकाते हुए नृत्य-संगीत की पहल पर पूरी टीम को आत्मसात किया और डीजे साउण्ड की तेज ध्वनि में अपने आपको गरिमापूर्ण माहौल में गरबा रास में रम गई।

नवरस एवं नवरंग का कराया आभास
कोरियोग्राफर्स का समय-समय पर निर्देशन महोत्सव में चार चांद लगा रहा था और उसके द्वारा लाइट्स का आपरेशन ऐसा लग रहा था कि जैसे सूर्यदेव सम्पूर्ण रोशनी समेटे हुए एक जगह थम सा गया हो, साथ ही चकाचौंध रोशनी में नवरस एवं नवरंग का पूर्ण आभास करा रहा हो। प्रारंभ में सनराईज ग्रुप ऑफ स्कूल्स के चेयरमैन जी.एल. यादव एवं निदेशक सतीश यादव ने अतिथियों का स्वागत किया और अन्त में स्मृति चिन्ह भेंट किए। इस अवसर पर निदेशक सतीश यादव ने सभी डांडिया क्वीन्स, अभिभावकों, दर्शकों एवं अतिथियों का आभार व्यक्त किया। संचालन कक्षा नवम् की छात्राएं आयुषी शर्मा एवं नुपूर पुरी ने किया।

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