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स्वास्थ्य

युवाओं में भी तेजी से बढ़ी रही हार्ट अटैक संबंधी बीमारियां, जानिए बचाव

Sunday, September 29, 2019 10:45 AM
कॉन्सेप्ट फोटो

जयपुर। विश्व में करीब 1.7 करोड़ लोगों की मृत्यु हृदय संबंधी रोगों के कारण हो जाती है। आंकड़ों के अनुसार भारत में लगभग 5.4 करोड़ लोग हार्ट संबंधी रोगों के शिकार हैं और हर 33 सैकंड में एक व्यक्ति की मौत हार्ट अटैक से हो जाती है। विशेषज्ञों की मानें तो अनियंत्रित लाइफ स्टाइल एवं तनाव के कारण हमारे यहां विदेशों के मुकाबले 10 साल पहले ही लोग हृदय संबंधित रोग से ग्रसित हो रहे हैं। यही कारण है कि युवा वर्ग में हार्ट अटैक और हार्ट संबंधी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

 

कोलेस्ट्रॉल जांच जरूरी

नारायणा हॉस्पिटल के कार्डियक सर्जरी के विभागाध्यक्ष डॉ. सीपी ने बताया कि आमजन को जानना जरूरी है कि हार्ट अटैक से होने वाली मृत्यु के 50 प्रतिशत केस अटैक के एक घंटे यानि गोल्डन पीरियड के भीतर ही हो जाते हैं। यदि इस दौरान मरीज को अस्पताल ले जाया जाए तो उसे बचाया जा सकता है। इसके अलावा दिल की बीमारियों से बचाव के लिए 20 वर्ष के बाद कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराते रहना चाहिए। 40 वर्ष तक हर पांच साल में यह टेस्ट कराना चाहिए और 40 के बाद एक या दो साल में इसकी जांच होनी चाहिए।

30 फीसदी हृदय रोगियों में नहीं दिखते लक्षण
नारायणा हॉस्पिटल सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. देवेन्द्र ने बताया कि लगभग 30 फीसदी ह्दय रोगियों में हार्ट की बीमारी का कोई लक्षण नहीं दिखता। इसलिए इसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है। कई बार एसीडिटी, सीने में जलन आदि को सामान्य मानकर ध्यान नहीं दिया जाता बाद में बीमारी बढ़ जाती है। हृदय रोगों से बचने के लिए रोज आधे से एक घंटे व्यायाम करने के साथ संतुलित भोजन लेना चाहिए। कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. निखिल चौधरी ने बताया कि डिप्रेशन हार्ट अटैक का एक छुपा हुआ रिस्क फैक्टर है जो काफी प्रभावी है। हमें सामाजिक जीवन में डिप्रेशन के दुष्प्रभावों को समझते हुए झिझक और हिचकिचाहट छोड़ कर विशेषज्ञ डॉक्टरों से सलाह लेनी चाहिए।

 

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