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स्वास्थ्य

एंडगेम ऑफ टबैको विषय पर वेबीनार में जुटे हेल्थ एक्सपर्ट, बचाव के संभावित तरीकों पर की चर्चा

Sunday, June 07, 2020 17:40 PM
वेबीनार में जुटे देश-दुनिया के स्वास्थ्य विशेषज्ञ।

जयपुर। पूर्णिमा यूनिवर्सिटी तथा जोधपुर स्कूल ऑफ पब्लिक हैल्थ (जेएसपीएच) की ओर से 'एंडगेम ऑफ टबैको: प्रोटेक्टिंग नेक्स्ट जनरेशन' विषय पर इंटरनेशनल वेबीनार आयोजित किया गया। इसमें देश-विदेश के हैल्थ एक्सपर्ट्स व एजुकेशनिस्ट्स ने युवा पीढ़ी को टबैको से बचाव के संभावित तरीकों के बारे में गंभीर चर्चा की। जेएसपीएच के सीईओ व फाउंडर अनिल पुरोहित व पूर्णिमा यूनिवर्सिटी के को-फाउंडर राहुल सिंघी ने इसकी अध्यक्षता की। टाटा मेमोरियल सेंटर, मुंबई के सेंटर फॉर कैंसर एपिडिमियोलॉजी के डिप्टी डायरेक्टर पंकज चतुर्वेदी व पीएचएफआई, नई दिल्ली की एग्जीक्यूटिव काउंसिल मेम्बर रति गोदरेज ने पैनल डिस्कशन का संचालन किया।

इस डिस्कशन के पैनलिस्ट्स में एम्स, जोधुपर के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी के एडिशनल प्रोफसर पुनीत पारीक, पीएचएफआई, नई दिल्ली के एडिशनल प्रोफसर मनु माथुर, डॉ. रॉय्ज हैल्थ सॉल्यूशंस मल्टीस्पेशिलिटी क्लिनिक्स, मुम्बई के फाउंडर सितेश रॉय, सॉल्यूशंस फॉर हैल्थ, यूके के सीईओ किशोर सांखला, हार्वर्ड चेन इंडिया रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर के विश विश्वनाथ, एशियन सेंटर फॉर मेडिकल एजुकेशन, रिसर्च एंड इनोवेशन इंडिया के डायरेक्टर अरविंद माथुर, हेलिस शेखसरिया इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हैल्थ, मुम्बई के डायरेक्टर प्रकाश गुप्ता, मोबिलोटे ग्रुप ऑफ कम्पनीज, नई दिल्ली के फाउंडर जगदीश हर्ष और जेएसपीएच, जोधपुर की चेयरपर्सन भावना सती शामिल थे।

चर्चा के दौरान पंकज चतुर्वेदी ने बताया कि टबैको प्रोडक्ट्स से गवर्नमेंट को होने वाली इनकम की तुलना में इससे समाज को कहीं अधिक नुकसान उठाने पड़ते हैं। पुनीत पारीक ने टबैको के नुकसानों के बारे में जागरूकता के लिए शैक्षणिक प्रयास किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन के दौरान भी टीवी पर टबैको प्रोडक्ट्स के विज्ञापन दिखाकर लोगों को इसके उपयोग के लिए मोटिवेट किया गया। मनु माथुर ने निकोटिव गम के उपयोग व निकोटिन रिप्लेसमेंट थैरेपी के सही तरीकों की जानकारी दी। के विश विश्वनाथ ने यूएसए की टबैको इंडस्ट्री के बारे में बताया और इसके उत्पादों के विज्ञापनों को बैन किए जाने की मांग की।

प्रकाश गुप्ता ने टबैको प्रोडक्ट्स के एडिक्शन के बारे में जानकारी दी और पर्यावरण व माहौल में बदलाव के जरिए इनके उपयोग को कम किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। अनिल पुरोहित ने बताया कि स्मोकिंग के दौरान लिप्स पर फिंगर्स के टच होने से भी कोरोना के संक्रमण का खतरा रहता है। अरविंद माथुर ने स्मोकलेस टबैको को समाज के लिए बड़ी चुनौती बताया और कहा कि इसके विज्ञापनों से मुख्य रूप से बच्चों व युवाओं को टारगेट किया जाता है। उन्होंने कहा कि बॉलीवुड स्टार रोल मॉडल होते हैं, इसलिए उन्हें टबैको उत्पादों को प्रमोट नहीं करना चाहिए।

भावना सती ने शिक्षा में पर्यावरण विज्ञान को अनिवार्य किए जाने पर विशेष जोर दिया। जगदीश हर्ष ने वर्कप्लेस पर नॉनस्मोक टबैको के उपयोग से होने वाली समस्याओं के बारे में बताया और कहा कि कुछ कम्पनियों ने इन उत्पादों के उपयोग पर कठोर निर्णय भी लिए हैं। सितेश रॉय ने पैरेंटल स्मोकिंग के खतरों पर प्रकाश डाला और टबैको प्रोडक्ट्स के खिलाफ देशभर में कड़े फैसले लिए जाने की आवश्यकता जताई। ग्लोबल हैल्थ फिजीशियन व डिस्कशन के रेपोर्टर दीपांजन रॉय ने डिस्कशन के मुख्य बिंदुओं के बारे में बताया। पूर्णिमा यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर राहुल सिंघी ने यूनिवर्सिटी के प्रयासों की जानकारी दी, जबकि यूनिवर्सिटी के प्रेसीडेंट डॉ. सुरेश चंद्र पाधे ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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