Dainik Navajyoti Logo
Sunday 19th of September 2021
 
स्वास्थ्य

नेजोफैरेंजियल वॉश रोक सकते है कोरोना इंफेक्शन: लंग इंडिया

Wednesday, May 06, 2020 17:10 PM
जानकारी देते हुए डॉ. वीरेंद्र सिंह।

जयपुर। वैश्विक कोरोना महामारी से दुनिया के 210 देशों में लॉकडाउन की स्थिति है, बावजूद इसके संक्रमितों और कोरोना से मौतों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। इस जानलेवा वायरस के चलते सभी देशों की अर्थव्यवस्था चरमा रही है। जहां इस रोग के लिए उपयुक्त और 100 प्रतिशत रेपिड टेस्टिंग किट को पाने की होड़ मची है, वहीं इसके इलाज में पूरा विश्व भारत की हॉईड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के इस्तेमाल पर संशय की स्थिति में है। कोनवेल्सेंट प्लाजमा थेरेपी की जरूरत और सही उपयोग पर भी कई शोध और हयूमन ट्राईल चल हे हैं। एण्टी बॉडी टेस्ट की कई रिसर्च हो रही हैं। ऐसे संकट के समय में अंतरराष्ट्रीय जनरल लंग इंडिया ने अपने ताजा अंक में प्रकाशित रिसर्च पेपर में प्रतिपादित किया है कि अगर गुनगुने पानी के गरारे और नेजल वॉश (जल नेती) को नियमित किया जाए तो कोरोना का संक्रमण जो इंसान के मुंह और गले से होते हुए लंग्स (फेंफड़ों) तक पहुंचता है, उस पर विराम लग सकती है तथा कोरोना के इलाज में मदद मिल सकती है। नेजल वॉश को मेडिकल साइंस में नेजोफैरेंजियल प्रोसेस भी कहते हैं। यानि नाक और गला साफ तो कोरोना बाहर।

इस रिसर्च की प्रमुख वैज्ञानिक और एसएमएस मेडिकल कॉलेज की श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. शीतू सिंह ने बताया कि इस तीव्र व्यवस्थित विश्लेषण (Rapid Systematic Analysis) में सर्दी खांसी और बुखार के रूप में प्रकट होने वाले अपर रेसपीरेटरी वायरल संक्रमण की रोकथाम में गरारे और जल नेती के बारे में वैज्ञानिक प्रमाण का मूल्यांकन किया गया है। डॉ. शीतू ने कहा कि इस प्रकार की चिकित्सा में कोविड जैसी बीमारियों की रोकथाम में एड ऑन थेरेपी की संभावना है। उन्होंने विशेषज्ञ की देखरेख में नेजल वॉश का सही तरीका सीखने पर भी जोर दिया। उनकी इस शोध के निष्कर्ष से पता चला कि नाक और गले के माध्यम से प्रवेश करने वाले वायरल रोगों की रोकथाम में गरारे और जलनेती से मदद मिलती है। जिस तरह हाथ धोने से हाथ संक्रमण रहित होते हैं, उसी तरह गरारे और नेजल वॉश से नाक और गले की
हुई धुलाई से वायरल लोड को कम किया जा सकता है। गले और नाक के म्यूकोसा की कोशिकाओं में नमक के क्लोराइड आयन हाइपोक्लोरस एसिड (HOCL) में बदल जाते हैं। इसका एंटी वायरल प्रभाव होता है, जिससे गले और नाक के रास्ते में वायरल संक्रमण में कमी आती है। HOCL ब्लीचिंग पाउडर का भी एक सक्रिय घटक है। कोविड-19 के कीटाणुशोधन के लिए हम अकसर हाथ धोने के लिए ब्लीचिंग पाउडर काम में लेते हैं।

इस शोध के अनुसार नियमित गरारे और नेजल वॉशए दिन भर काम करने के बाद कोविड-19 रोग की रोकथाम में भी उपयोगी होसकते है। पहले के अध्ययनों से पता चला है कि जलनेती और गरारे करने से बीमारी की अवधिए बीमारी के लक्षण और वायरल की मात्रा कम हो जाती है। अन्य शोध का रेफरेंस देते हुए इस शोध के ग्रुप लीडर श्वास रोग विशेषज्ञ और राजस्थान हॉस्पीटल के अध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह ने बताया कि एडिनबरा में हुए एक अध्ययन में अपर रेसपीरेटरी वायरल संक्रमण में वायरस के प्रकार का भी अध्ययन किया गया था। दिलचस्प रूप से 56 फीसदी राइनोवायरस और 31 फीसदी कोरोना वायरस थे कोविड नहीं। डॉ. वीरेंद्र ने कहा कि जापान में फेस मास्क और हाथ धोने को इन्फ्लूएंजा नियंत्रण के राष्ट्रीय दिशानिर्देश की निवारक चिकित्सा में भी शामिल किया गया तथा इसी तर्ज पर गरारे और नेजल वॉश कोविड 19 महामारी में व्यक्तिगत पसंद के अनुसार भारत में भी प्रयोग किया जा सकता है।

परफेक्ट जीवनसंगी की तलाश? राजस्थानी मैट्रिमोनी पर निःशुल्क  रजिस्ट्रेशन करे!

यह भी पढ़ें:

सोनोलोजिस्ट के राष्ट्रीय सेमिनार की हुई शुरुआत

फेडरेशन ऑफ क्लिनिकल सोनोलोजिस्ट की ओर से केके रॉयल एण्ड कन्वेशन सेंटर में तीन दिवसीय सोनोग्राफी पर राष्ट्रीय सेमिनार की शुरूआत हो गई।

10/01/2020

850 ग्राम की जन्मे शिशु ने जीती जिंदगी की जंग, डॉक्टरों की मेहनत लाई रंग

जहां 850 ग्राम की प्री-मैच्योर डिलीवरी हुई बच्ची को बचा लिया गया।

19/10/2019

ई-संजीवनी ओपीडी सेवा से मरीजों को कतारों से मिली मुक्ति, घर बैठे मिल रहा परामर्श

कोरोना के चलते आमजन को घर बैठे परामर्श सेवाओं के लिए राज्य सरकार द्वारा ई-संजीवनी ओपीडी सेवा शुरू की गई है। जिससे अस्पतालों में भीड़ नियंत्रण कर संक्रमण को कम किया जा सके और आमजन को सरलता से परामर्श सेवा प्राप्त हो सके। इस सुविधा का आमजन लाभ भी उठा रहे हैं।

21/05/2020

बिना वेंटीलेटर के भी बच सकती है मरीज की जान

मरीज को वेंटीलेटर में होने वाले संभावित खतरों के बिना ही नई तकनीक से बचाया जा सकता है। अगर उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही है तो वेंटीलेटर पर ले जाए बिना भी उसकी जान बचाई जा सकती है।

16/11/2019

जयपुर के डॉक्टर्स ने की सफल दुर्लभ सर्जरी, कूल्हे और घुटने के जोड़ समेत पूरी हड्डी बदली

बोन कैंसर से जूझ रहे मरीज के कूल्हे और घुटने के जोड़ को स्थिरता देने वाली शरीर की सबसे मजबूत हड्डी फीमोरल बोन की दुर्लभ टोटल फीमोरल रिप्लेसमेंट सर्जरी, जयपुर के डॉक्टर्स ने सफलतापूर्वक कर दिखाई। 75 वर्षीय मरीज की जांघ की हड्डी बोन कैंसर के कारण तेजी से गलने लगी थी, ऐसे में डॉक्टर्स ने कूल्हे व घुटने के जोड़ तक फैली पूरी हड्डी को बदल दिया।

20/11/2020

बच्चों पर शोध: खांसी-जुकाम नहीं बल्कि बुखार के साथ उल्टी दस्त, पेट दर्द होने पर भी हो सकता है कोरोना

अब तक खांसी जुकाम या बुखार के लक्षण होने पर ही कोरोना वायरस की पुष्टि होना माना जा रहा था। लेकिन बच्चों में बुखार के साथ उल्टी दस्त होने पर भी कोरोना वायरस होना पाया गया है। सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज जयपुर में बच्चों पर हुए एक शोध में इसकी पुष्टि हुई है।

03/06/2020

फिटनेस और गेम्स का कॉम्बीनेशन पसंद आ रहा है शहरवासियों को

शहर के पार्कों में हो रहे योगिक फिटनेस बूट कैम्प्स में भाग लेकर जयपुरवासी अपनी सेहत को अच्छा रखने के साथ साथ शरीर की इंटरनल पॉवर में इजाफा कर रहे हैं।

22/04/2019