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Friday 15th of November 2019
 
स्वास्थ्य

850 ग्राम की जन्मे शिशु ने जीती जिंदगी की जंग, डॉक्टरों की मेहनत लाई रंग

Saturday, October 19, 2019 11:30 AM
डॉक्टरों की टीम के साथ मासूम बच्ची

जयपुर। जन्म के बाद 57 दिनों तक जिंदगी की लड़ाई नवजात ने जीत ही ली। गर्भावस्था के 28वें हफ्ते में ही पैदा हुई राजवी (परिवर्तिन नाम) का वजन मात्र 850 ग्राम था और उसके आतंरिक अंग भी पूरी तरह से विकसित नहीं हुए थे, लेकिन डॉक्टरों के दिन-रात किए गए प्रयास रंग लाए और राजवी 1.6 किग्रा की होकर अपने माता-पिता के साथ घर रवाना हुई। अपनी तरह का यह अनूठा मामला जयपुर के नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल का है, जहां 850 ग्राम की प्री-मैच्योर डिलीवरी हुई बच्ची को बचा लिया गया।

मां गर्भावधि डायबिटीज से ग्रसित थी
नवजात राजवी की मां बीना मीणा (29), गर्भावधि डायबिटीज से ग्रसित थी और शुरूआत से ही उनकी गर्भावस्था काफी जटिल रही थी जिसे नारायणा हॉस्पिटल की स्त्री रोग विशेषज्ञ टीम द्वारा अच्छी तरह से प्रबंधित किया जा रहा था। जब गर्भावस्था के 28वें हफ्ते में ही सुरक्षात्मक एमनियोटिक द्रव (मां के गर्भाशय में बच्चे के चारों ओर सुरक्षात्मक द्रव) लीक हो गया तो उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। 28वें हफ्ते में भ्रूण के फेफड़े सहित अन्य अंग पूरी तरह से विकसित नहीं होते हैं, ऐसे में इमरजेंसी प्री-टर्म डिलीवरी से पहले ही माँ का आवश्यक उपचार किया गया जिससे बच्चे के जीवित रहने की संभावना को बढ़ाया जा सके।

 

फेफड़े पूरी तरह से विकसित नहीं हुए थे
नारायणा हॉस्पिटल के बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश पाठक ने बताया कि जब बच्ची का जन्म गर्भावस्था के 28वें हफ्ते (7वें महीने) में हुआ था तो उसके फेफड़े पूरी तरह से विकसित नहीं हुए थे, इसलिए उसे सांस संबंधित समस्या को रोकने की दवा दी गई और वेंटीलेटर पर रखा गया। जन्म के तुरंत बाद किए गए जरूरी प्रयासों से उसके फेफड़ों को पूरी तरह से परिपक्व करने में मदद मिली एवं धीरे-धीरे वेंटीलेटर और फिर बाहरी ऑक्सीजन को चरणों में हटा लिया गया। जन्म के समय बच्ची का वजन सिर्फ 850 ग्राम था और वह बहुत कमजोर थी। इसीलिए वह 24 घंटे एन.आई.सी.यू. में पीडियाट्रिक्स विशेषज्ञों की निगरानी में थी।

गर्भ जैसा माहौल देकर की नवजात की देखभाल
डॉ. राजेश पाठक ने बताया कि यूं तो माँ के गर्भ की तरह स्थितियां बनाना संभव नहीं है लेकिन फिर भी हमने सही तापमान, न्यूनतम शोर और प्रकाश के साथ सबसे उन्नत नवजात देखभाल प्रदान करने की कोशिश की है। कई दवाओं, पोषक तत्वों के अलावा तापमान मॉनिटर, हृदय गति मॉनिटर और एपनिया मॉनिटर की सहायता से बच्चे की स्थिति पर 24 घंटे निगरानी की गई।