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राजस्थान

खजाने वालों का रास्ता: अतिक्रमण की बाढ़ से ट्रैफिक लाइट भी अछूती नहीं

Tuesday, February 18, 2020 10:05 AM
ट्रैफिक जाम से स्थिति से यहां आए दिन लोग परेशान रहते हैं।

जयपुर। एक तरफ स्मार्ट सिटी की बात की जाती है। दूसरी ओर शहर के विभिन्न बाजारों की हालत खराब है। कहीं ट्रैफिक की समस्या तो कहीं अतिक्रमण की बाढ़। टीम ने सोमवार को खजाने वालों का रास्ता का जायजा लिया तो देखने को मिला कि सड़क पर पैदल चलने वाला व्यक्ति हो या फिर दो पहिया और चौपहिया वाहन चालक दूसरों से बचकर अपनी मंजिल तक पहुंचना पड़ता है। सड़क के दोनों ओर अतिक्रमण की भरमार देखने को मिली। ऐसे में वाहन चालकों की जरा भी नजर हटी और दुर्घटना घटी जैसी स्थिति देखने को मिली। दुकानदारों ने बाहर तक कपड़ों आदि के सामान रख रखे हैं, जिससे लोगों के चलने के लिए जगह कम पड़ जाती है। दूसरी ओर दुकानों में खरीदारी करने आने वाले लोग भी अपने दो पहिया और चौपहिया वाहन सड़क पर ही खड़े कर देते हैं, जिससे अन्य वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। यहां रहने वाले लोगों का कहना है कि दोपहर 12 बजे बाद यहां के ट्रैफिक के हालात और ज्यादा खराब हो जाते हैं। दिनभर गाड़ियों के बजने वाले हॉर्न से जीना दुभर हो गया है।

गलियां गंदगी से अटी
खजाने वालों का रास्ता से अंदरूनी गलियों की ओर रूख करें, तो गलियों में सीवर की समस्या देखने को मिलती है। यहां नालों में गंदा पानी एकत्रित रहता है, जिससे गंदगी का ढेर लगा रहता है। गर्मी का मौसम आने वाला है। ऐसे में आवासों के आगे नालों में गंदा पानी इकट्ठा रहता हैं। यहां की तकरीबन हर गली गंदगी से अटी पड़ी है। निवासियों का कहना है कि कई बार प्रशासन को इस समस्या से अवगत करा चुके हैं, लेकिन समस्या का हल नहीं हो रहा है। दिनभर गंदगी से बदबू आती है। निवासियों का कहना है कि सरकार स्मार्ट सिटी की बात तो करती हैं, लेकिन इसके लिए शहर की अंदरूनी गलियों की ओर भी ध्यान देने की जरूरत है। 

सड़क टूटी, चलना दुश्वार
खजाने वालों का रास्ता में कई तरह की समस्याओं से रूबरू होना पड़ा। यहां के स्थानीय लोगों के साथ राहगीरों को खासा परेशानियों का सामना करना पड़ता है। टूटी सड़क की वजह से राहगीरा का चलना दुश्वार हो गया है। टूटी सड़क के कारण वाहन चालकों को ड्राइव करने में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। टूटी सड़क और फिर ऊपर से गड्ढे के कारण किसी दिन बड़ा हादसा होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। टूटी सड़क के कारण मार्केट की वेल्यू खराब हो रही है, जिस कारण से ग्राहक इस ओर आना पसंद नहीं करते है।

परेशान राहगीर-वाहन चालक
खजाने वालों के रास्ता में अतिक्रमण की समस्या भी देखने को मिली। अधिकतर रास्ते पर दुकानों के बाहर रखे सामान ने अतिक्रमण की स्थिति बना रखी है। वहीं सब्जी-फल के ठेलों ने अतिक्रमण कर रखा है। अतिक्रमण के कारण सड़क सकड़ी हो जाने के कारण आए दिन जाम की स्थिति बनी रहती है। अतिक्रमण के कारण राहगीरों को चलने की जगह नहीं मिल पाती है, जिस कारण से उनको कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसी समस्याओं का जल्द से जल्द समाधान होना बेहद जरूरी है, जिससे इस खूबसूरत रास्ते की गरिमा बनी रहे।

ऐसे बनेगी स्मार्ट सिटी जहां गंदगी का अंबार
खजाने वालों का रास्ता में गंदगी के ढ़ेर देखने को मिले। गंदगी के कारण स्थानीय लोगों के साथ राहगीर को भी कई तरह की समस्याओं से रूबरू होना पड़ता है। क्षेत्र में गंदगी के ढ़ेर के कारण पनपे मच्छरों से होने वाली बीमारियों का होने का खतरा हर वक्त बना रहता है। जहां एक ओर स्वच्छ भारत का अभियान चल रहा है। वहीं क्षेत्र में व्याप्त इस तरह की समस्याएं जयपुर के स्मार्ट सिटी बनने के कदम में रोड़ा पैदा कर सकती है। इसलिए ऐसी समस्याओं का जल्द से जल्द समाधान होना बेहद जरूरी है।

पार्किंग की समस्या
क्षेत्र में पार्किंग की समस्या भी देखने को मिली। वाहन चालकों को अपने वाहन खड़े करने की जगह नहीं मिल पाती है। इस कारण से वाहन चालक इधर आना पसंद नहीं करते है। जिससे दुकानों के बिजनेस को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं शहरवासी
खजानों वालों का रास्ता में रहने वाले आमजन का कहना था कि जिस तरह से परकोटे में कॉमर्शियल एक्टिविटी बढ़ रही है शहर की सड़कें छोटी होती जा रही है। शहर का सुकून इस तरह खराब हो रहा है कि रातभर डीजे साउण्ड चलते रहते हैं उनको रोकने वाला कोई नहीं होता है। बड़ी बड़ी इमारतों से इस कदर का शोर आता है रात को सुकून की नींद नहीं निकाल पाते हैं। इसके साथ साथ मोबाइल और इंटरनेट की सुविधा मिलने से शहर में सूदखोरी की परेशानी बढ़ती जा रही है। जब घर बैठे ही कमाने का मौका मिल जाए तो इससे बड़ा फायदा क्या होगा। सूदखोरी की प्रवृत्ति से नशे की आदत पड़ रही है। सक्षम लोग शहर से निकलकर कॉलोनियों में बस गए हैं। शहर में अब अधिकतर कम आय वाले परिवार बसर कर रहे हैं जिनके लिए अपनी जगह छोड़कर बाहर मकान लेकर रहना सम्भव नहीं है। मगर प्रशासन का ऐसा कोई तंत्र है जिनसे इनको सहूलियत मिल जाए। ना चलने के लिए गलियों में अच्छी सड़क है। ना शांति से रहने के लिए सुकून है, ना सफाई व्यवस्था सुचारू है। जगह-जगह आवारा पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है। ऐसे में रहने वाला खुद को ठगा सा महसूस करता है।

आवारा जानवरों का आतंक
खजाने वालों का रास्ता में जानवरों का आतंक भी देखने को मिला। यहां पर अधिकतर समय जानवरों का आवागमन रहता है, जिस कारण वाहनकर्मियों के साथ राहगीरों और स्थानीय लोगों को इस समस्या से रूबरू होना पड़ता है। जानवरों के कारण किसी दिन बड़े हादसे से भी इंकार नहीं किया जा सकता है।

छतरी तले बीमार ट्रैफिक लाइट
अतिक्रमण की बाढ़ ऐसी है कि इससे ट्रैफिक लाइट भी अछूती नहीं है। हालांकि ट्रैफिक लाइट की स्थिति को देखकर ऐसा लगता है कि सालों से यह बंद पड़ी है। ऐसे में लोगों ने इसके ऊपर सजावटी सामना रखने शुरू कर दिए हैं। ऐसे में जो ट्रैफिक लाइट कभी लोगों को रूकने और चलने का इशारा करती थी, उसे अब कपड़ों आदि से ढक दिया जाता है। जैसे ही ठेले वाले की नजर कैमरे पर पड़ी उन्होंने तुरंत ट्रैफिक लाइट से छतरी हटा ली। राहगीरों का कहना था कि अभी आपको देखकर इसे हटा लिया है, लेकिन कुछ दिनों बाद ट्रैफिक लाइट पर फिर छतरी देखने को मिलेगी। इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां अतिक्रमण करने वालों के हौंसले कितने बुलंद हैं।

जगह-जगह ठेले और अतिक्रमण
खजाने वालों का रास्ता से ही अतिक्रमण की शुरूआत देखने को मिलती है। आलम यह है कि लोग अपनी जान की परवाह किए बिना बिजली के ट्रांसफार्मर के पास ही ठेला लगाकर कपड़े बेच रहे हैं। ऐसे में वे स्वयं की जान तो खतरे में डाल ही रहे हैं साथ ही खरीदारों की जान भी खतरे में रहती है। क्योंकि ठेलों पर सामना और कपड़े खरीदने वाले लोगों की भीड़-भाड़ लगी रहती है। खजाने वालों का रास्ता से शुरू हुई ठेलों की लाइन आगे तक देखने को मिलती है।

स्थानीय लोगों से बात करने पर उन्होंने ये गिनाई शहर की सामान्य परेशानियां
- रिहायशी इलाकों में तेजी से विकसित हो रहे हैं कॉमर्शियल एक्टिविटी
- इनकी वजह से रोड पर सबसे ज्यादा रोड पर अतिक्रमण हो रहा है
- ध्वनि प्रदूषण की समस्या शहर में तेजी से बढ़ रही है
- रात में बजने वाले डीजे साउण्ड सिस्टम
- सूदखोरी से पनपती नशे की प्रवृत्ति

पार्किंग का कोई हल निकले
खजाने वालों का रास्ता काफी सालों से फोर व्हीलर पार्किंग का रास्ता बन गया है। दुकानों के बाहर मेन रास्ते में चौपहिया वाहनों की वजह से रोड पर यातायात सुगम तरीके से नहीं चल पाता है। प्रशासन इन पर कोई एक्शन नहीं लेता है। इसी के साथ अतिक्रमण की समस्या पर मौन रहने से पैदल या वाहन चालकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ध्वनि प्रदूषण की समस्या से भी शहरवासी परेशान रहते हैं। इस रास्ते में मूर्ति काटने के लिए इतने कटर चलते हैं जिनके शोर से लोगों का शांति से जीवन गुजारना दूभर बन गया है। प्रशासन के लिए आने वाले दिनों में ध्वनि प्रदूषण एक बड़ी समस्या बन जाएगा जिसे रोक पाना मुश्किल होगा।

- पवन पारीक, अध्यक्ष, खजाने वालों का रास्ता व्यापार संघ

अतिक्रमण, गंदगी और पार्किंग से ग्रस्त रास्ता
दुकानदार संजय मिश्रा ने बताया कि खजाने वालों का रास्ता अतिक्रमण, गंदगी और पार्किंग की प्रमुख समस्याओं से ग्रस्त है। गंदगी के कारण तरह-तरह की बिमारियां होने का खतरा रहता है। पार्किंग की उचित व्यवस्था नहीं होने का कारण वाहन चालकों को अपने वाहन खड़े की जगह नहीं मिल पाती है। वहीं अतिक्रमण के कारण भी कई तरह की समस्या से लोगों को रूबरू होना पड़ता है।

सूखी टहनियों से खतरा
चौराहों पर वर्षों पुराने वृक्ष है जिनकी टहनियां सूख गई है और बारिश के दिनों में गिरने का खतरा रहता है। प्रशासन तब तक कुछ नहीं करता है जब तक अनहोनी ना जाए। मेरी गुजारिश है कि इस रास्ते में मौजूद वर्षों पुराने वृक्षों की सूखी टहनियों को कटवाया जाए। साथ ही रास्ते में एक निश्चित पर साफ-सफाई की व्यवस्था कराई ताकि हमारा रास्ता सुन्दर दिखे।
- बसंत

खजाने वालों का रास्ता से लेकर आगे तक ट्रैफिक के हालात बद से बदतर हैं। आलम यह हैं कि गाड़ी लेकर इस ओर से गुजरने के लिए दस बार सोचना पड़ता है। यहां अतिक्रमण की बाढ़ है, जहां नजर जाती है, वहीं ठेलों की भरमार देखने को मिलती है।
- दीपक शर्मा

खजाने वालों का रास्ता में तो जगह-जगह अतिक्रमण की भरमार है। इसके अतिरिक्त अंदरूनी गलियों में गंदगी का आलम है। यहां की कई गलियां कचरे से अटी पड़ी हैं। यहां की मुख्य समस्या सीवर लाइन
की है।
- सुरेश भारद्वाज

 

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