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Sunday 15th of December 2019
 
राजस्थान

चांदपोल से छोटी चौपड़ तक ट्रैफिक का ऐसा हाल कि लोगों का सांस लेना मुश्किल

Tuesday, December 03, 2019 10:45 AM
सड़कों, बरामदों पर अतिक्रमण की बाढ़ और डिवाइडरों पर आवारा पशुओं की भरमार है।

जयपुर। सड़कों, बरामदों पर अतिक्रमण की बाढ़ और डिवाइडरों पर आवारा पशुओं की भरमार। यहां तक की नो वैंडिंग जोन में थड़ी-ठेलों की लाइन देखने को मिल रही हैं। कुछ ऐसी स्थिति है यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज सिटी में शामिल जयपुर परकोटे की।

चांदपोल से लेकर छोटी चौपड़ पर गाड़ियों की रेलमपेल और उनसे निकलने वाला धुआं जैसे आबो-हवा को जहरीला कर रहा है। सुबह से शुरू हुई गाड़ियों की भागमभाग शाम तले थमने का नाम नहीं लेती। आलम यह है कि चांदपोल बाजार की सड़कों पर बेतरतीब वाहनों की पार्किंग देखने को मिलती है, तो वहीं दूसरी ओर बाजारों के बरामदे को भी अतिक्रमण से मुक्त होने का इंतजार है। दुकानों के आगे बरामदों तक दुकानदार सामान बाहर रख देते हैं, जिससे पैदल चलने वाले राहगीरों का चलना मुश्किल हो जाता है। 

खजाने वालों का रास्ता की ओर नोन वेंडिंग जोन का बोर्ड लगाया गया है, लेकिन लोगों ने बोर्ड को नजरअंदाज करते हुए कपड़ों, जूते-चप्पलों के ठेले लगाकर अतिक्रमण कर रखे हैं। इन अतिक्रमणों से लोगों का बचकर निकलना जोखिम भरा रहता है। सड़कों पर मनमर्जी से दो पहिया और चौपहिया वाहनों को खड़ा कर दिया जाता है, जिससे हर समय यातायात प्रभावित रहता है। यह एक दो दिन की बात नहीं बल्कि रोज ही यह स्थिति देखने को मिलती है। चांदपोल बाजार से छोटी चौपड़ तक ई-रिक्शा सरपट दौड़ते हुए नजर आ जाते हैं। जहां मन करता है, वहीं रिक्शा रोक सवारियों को बुलाना शुरू कर देते हैं, जिससे ट्रैफिक जाम की समस्या रहती है।

बरामदों में जगह नहीं, सड़क के सिवाय कुछ बचता नहीं
छोटी चौपड़ से लेकर चांदपोल तक बाजार में बरामदों पर अतिक्रमण के कारण लोग सड़क पर चल रहे हैं इसके अलावा फिर तो उनके पास सड़क बचती है। इन भरे बरामदों से बचने के लिए वे सड़क पर आ जाते हैं इससे यातायात को चलने में दिक्कत होती है। जगह-जगह रास्ते में कट की वजह से हर चौराहे पर जाम लगा रहता है। यातायातकर्मी केवल दो चौराहे पर दिखाई देते हैं वहां पर भी आस-पास थड़ी ठेले वालों का इस कदर अतिक्रमण रहता है कि बड़े वाहन घंटो तक शाम के वक्त रेंगते हैं। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है अब बाजारों को व्यवस्थित करने की कोई योजना बनानी चाहिए। केवल स्मार्ट सिटी बोल देने से बन नहीं जाएगी। मैट्रो शुरु की जा रही है इससे केवल उन्हीं लोगों को फायदा होगा जिनको उसमें बैठकर सफर करना है। खरीददारी के लिए लोग बाजार ही आएंगे इसलिए दिक्कत को दूर करने के लिए अब कोई ठोस कदम उठाने चाहिए ताकि ट्रैफिक नॉर्मल हो।

सांस लेना मुश्किल
चांदपोल बाजार के दुकानदारों का कहना है कि स्मार्ट सिटी का काम कछुए की गति से हो रहा है। दुकानों के आगे सीवर लाइन के लिए खोदे गढ्ढे महिनों से खुले हैं। ट्रैफिक इतना है कि दुकानदारों के साथ ही खरीदारी के लिए आने वाले लोगों का सांस लेना मुश्किल हो जाता है। गाड़ियों से निकलने वाला धूआं तो दूसरी ओर गाड़िया चलने से उड़ने वाली धूल लोगों को बीमार कर सकती है। दुकानदारों का कहना है कि परकोटे को यूनेस्कों की वर्ल्ड हेरिटेज सिटी का दर्जा तो मिल गया, लेकिन बाजारों की मूलभूत समस्याओं का निपटारा करना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।

गंदगी से बेहाल क्षेत्र
चांदपोल क्षेत्र में गंदगी का आलम इतना है कि जगह-जगह पर गंदगी देखने को मिल रहीं है। कई जगह तो गंदगी का ढेर लगा हुआ है, जिसमें तरह-तरह के मच्छर देखने को मिले, जहां एक ओर सिटी को स्मार्ट सिटी बनाने की प्रक्रिया चल रहीं है। वहीं ऐसी गंदगी से लगता है कि स्मार्ट सिटी का काम केवल कागजों पर ही चल रहा है या बहुत स्लो मोड पर अटका हुआ है। कई जगह तो गंदगी में बहुत ज्यादा मच्छर पनप रहे थे, जिससे डेंगू जैसी तरह-तरह की बीमारियां होने का खतरा बना रहता है। वर्तमान समय में तरह-तरह की बीमारियों से शहरवासी ग्रस्त है। ऐसे में गंदगी से पैदा होने वाले मच्छरों से बीमारियां का ग्राफ ओर बढ़ेगा। साफ-सफाई की उचित व्यवस्था क्षेत्र में नहीं देखी गई, जिससे स्थानीय लोगों में रोष देखने को मिला है। स्थानीय निवासी रमेश ने बताया कि जगह-जगह गंदगी फैली रहने से छोटे-छोटे बच्चों को तरह-तरह की बीमारियां होने का खतरा रहता है।

क्या बोले लोग
चांदपोल बाजार से छोटी चौपड़ तक दुकानों के बरामदों पर अतिक्रमणों की भरमार है। दुकानों के आगे सड़कों तक वाहन चालक बेतरतीब तरीके से दो पहिया और चौपहिया वाहनों को खड़ा कर देते हैं। जिससे यातायात प्रभावित होता है। सुबह से रात करीब 10 बजे कई बार ट्रैफिक जाम की समस्या देखने को मिलती है। प्रशासन को यूनेस्कों की वर्ल्ड हेरिटेज सिटी का दर्जा प्राप्त परकोटे में इन समस्यओं की ओर ध्यान देकर इनका निस्तारण करने की जरूरत है।-सुभाष गोयल, अध्यक्ष, चांदपोल बाजार व्यापार मंडल

चांदपोल बाजार की ओर स्मार्ट सिटी का काम खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है। दुकानों के आगे नाले खोद दिए हैं। बाजार में ट्रैफिक के हालात बहुत ही खराब है। यहां सबसे ज्यादा समस्या ई-रिक्शा से हो रही है। इसे चलाने वाले कहीं भी और कभी भी कहा कट मारे कोई पता नहीं चलता। दुकानों के आगे सब्जियों, कपड़ों के ठेले लगाने वाले अतिक्रमण कर लेते हैं। सड़कों पर वाहन चालक गाड़ियां खड़ी कर देते हैं, जिससे यातायात प्रभावित रहता है। खजाने वालों का रास्ता पर नोन वेंडिंग जोन का बोर्ड लगा हुआ है, लेकिन बावजूद इसके थड़ी-ठेले वाले अतिक्रमण कर लेते हैं। - जगदीश नारायण अग्रवाल, दुकानदार

चांदपोल बाजार से लेकर छोटी चौपड़ तक अतिक्रमणों की बाढ़ सी है। बाजार की दुकानों के आगे बरादमों तक लोग अतिक्रमण कर बैठे हैं, जिससे खरीदारी करने के लिए बाजार आने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। बाजार में ट्रैफिक के कारण पॉल्यूशन की ज्यादा ही समस्या है। आंखों में जलन की समस्या हो रही थी। - दिलीप सिंह, दुकानदार

पिछले आठ महीने से गंदगी के कारण क्षेत्र की हालत खराब है। जब से स्मार्ट सिटी का वर्क चालू हुआ है। तब से हालत बद से बदतर हुई है। साफ-सफाई की उचित व्यवस्था नहीं है। जहां पहले साफ-सफाई रोजाना होती थी। वहीं वर्तमान में स्थिति खराब हुई है। जाम की स्थिति के कारण राहगीरों के आमजन भी आए दिन परेशान होता रहता है। इन समस्याओं का समाधान जरूरी है। - भीम सिंह, स्थानीय निवासी

स्मार्ट सिटी का काम चल रहा है। इस वजह से गंदगी बहुत है। इस गंदगी की वजह से डेंगू, मलेरिया जैसी कई अन्य बीमारियां होने का खतरा हर वक्त रहता है। क्षेत्र में साफ-सफाई की उचित व्यवस्था नहीं हैं, जिस कारण से भी गंदगी का रहती है। इसके साथ ही रोजाना ट्रैफिक जाम की समस्या से क्षेत्र जूझता रहता है। इसके अलावा कई अन्य छोटी समस्याएं इस क्षेत्र में है, जिससे क्षेत्रवासी जल्द से जल्द निजात पाना चाहते है। - विनोद कुमार, स्थानीय निवासी

एक नहीं यहां है समस्याओं का अंबार
एक समस्या हो तो बताऊं। यहां स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से भी कई सालों पहले की समस्याओं पर प्रशासन ध्यान नहीं  दे रहा है। बद से बदतर स्थिति में आकर दुकान खोलते हैं। शहर में नियोजन वाली कोई बात नहीं दिखाई देती है। अतिक्रमण इस कदर बाजार में फैल रहा है कि कोई नुमाइंदा आकर इनको नहीं हटवाता है। जगह-जगह बाजार में ठेले वालों के सूदखोरी के धंधे चल रहे हैं। एक से दो और दो से पांच-पांच एक इंसान के चल रहे हैं उन पर से उगाही हो रही है इसे कभी नहीं रोकते हैं। बाजार में व्यवस्था नाम की चीज ही नहीं है। ना कैमरे, ना हाईमास्ट लाइट, ना चलने के लिए सड़क। मंत्री से लेकर अधिकारियों तक को इस बारे में लिखा कोई हल नहीं निकला। - विजय अग्रवाल, दुकानदार

बरामदों में भर दिया सामान
इन बरामदों की दुर्दशा तो आप देख ही रहे हैं। स्वच्छ भारत अभियान की तरह ही हमारे देश में तो कई तरह के अभियान मेरे खयाल में जिंदगीभर चलते रहे तब ही कुछ बात बनेगी। बहन-बेटियां हमारे घर की इज्जत है इन बरामदों में धक्के खाते देखकर मन दुखी होता है। इतनी भी क्या मजबूरी है प्रशासन की इनको खाली नहीं करवा सकता। बरामदों मे कब्जे होते तब फिर सड़कों पर ठेले लग जाते हैं जिसकी वजह से यातायात ठप्प हो जाता है। आखिर सरकार को इन बाजारों व बरामदों को साफ-सुथरे रखने की भी कोई योजना बनानी चाहिए ताकि सड़कों पर यातायात को चलने में दिक्कत ना आए। - दिलीप भट्ट, तमाशा आर्टिस्ट

प्रशासन ध्यान नहीं देता इसलिए सब गड़बड़
वोट लेने के समय सभी वादे ध्यान आ जाते हैं। 25-30 साल पुराने वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं इनसे प्रदूषण हो रहा है इस पर सख्ती से रोक लगाई जाए। प्रशासन को समय-समय पर लगातार इस तरह के अभियान चलाकर या लक्ष्मण रेखा खींचकर गलती करने वालों पर कार्रवाई करनी चाहिए। मैं कहता हूं सुधार अवश्य आएगा। प्रशासन ध्यान नहीं देता है इसलिए सारी गड़बड़ हो रही है। गलती करने वालों पर कार्रवाई होती रहे, हर चीज का समय-समय पर फॉलोअप लेते रहे तो समस्या दूर होगी, बढ़ेगी नहीं कभी। सड़क पर अंतिम लेन में भारी अतिक्रमण या पार्किंग रहती है। दूसरी लेन पर चौपहिया वाहन आ जाते और प्रथम लेन में मजबूरी वश लोग चलते हैं।- कैलाश, स्थानीय निवासी

केवल दो चौराहों पर यातायातकर्मी, नाहरगढ़ रोड प्रमुख चौराहा भूले
बगरु वालों का रास्ता व खजाने वालों का रास्ते को छोडकर कहीं पर भी यातायात व्यवस्था ठीक करने के लिए इंतजाम नहीं किए गए हैं। कॉमर्शियल आस्पेक्टस की वजह से गाड़िया मुख्य सड़क पर खड़ी हो जाती है जिनसे यहां पर यातायात जाम रहता है या रेंग-रेंगकर चल पाता है। आॅफिस टाइम पर तो अक्सर जाम ही लगा रहता है। ई-रिक्शा वाले अभी तक सड़क पर चलने के मैनर्स नहीं सीख पाए हैं, दिन-रात कभी भी चलते बीचोंबीच रोड पर है। शहर में या तो कोई ऐसी व्यवस्था हो जाए कि केवल ई-रिक्शा चालकों को ही चलने दिया जाए बाकी सबको बंद कर दे। या फिर इनको सड़क पर चलने के नियमों की जानकारी तो पुलिस महकमे की ओर से दी जानी चाहिए। जिस तरह यंग जनरेशन को सड़क सुरक्षा नियमों की जानकारी दी जा रही है, कोई इन रिक्शे वालों को भी समझाए कि धीमे चलने वालों को हरदम अंतिम लेन में चलना चाहिए। - गिरधारी, स्थानीय निवासी
 

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