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राजस्थान

मेवाड़ राजघराने की पैतृक संपत्ति का विवाद: सभी भागीदारों की रहेगी एक चौथाई भागीदारी

Tuesday, June 30, 2020 22:00 PM
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उदयपुर। मेवाड़ राजघराने के सम्पत्ति विवाद में 37 वर्ष बाद न्यायालय ने निर्णय पारित कर महाराणा भगवत सिंह, उनके दोनों पुत्रों व बेटी में सम्पत्ति का बराबर का बंटवारा कर दिया। इसके साथ ही रियासतकालीन शम्भू निवास पैलेस में चार वर्ष तक महेन्द्र सिंह मेवाड़, उसके बाद चार वर्ष तक इनकी बहन योगेश्वरी व फिर चार वर्ष बाद अरविंद मेवाड़ निवास करेंगे। अदालत ने समस्त वाणिज्यिक गतिविधियों पर तुरन्त प्रभाव से रोक लगा दी।


मेवाड़ राजघराने के महाराज कुमार महेन्द्र सिंह पुत्र महाराणा भगवत सिंह बनाम अरविंद सिंह मेवाड़ व अन्य के खिलाफ विचाराधीन संपत्ति विभाजन के करीब चार दशक पुराने वाद का निस्तारण मंगलवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायालय क्रम-2 के पीठासीन अधिकारी महेन्द्र कुमार दवे ने वादी महेन्द्र सिंह के पक्ष में किया। पीठासीन अधिकारी ने 37 साल बाद 575 पृष्ठों में दिए गए फैसले में कहा कि राजघराने की पैतृक सम्पत्ति में से सभी भागीदारों का एक चौथाई हिस्सा रहेगा। दोनों भाइयों व बहन योगेश्वरी कुमारी को जायदाद का बराबर मालिकाना हक दिया है। शेष एक चौथाई हिस्सा उनके स्व. पिता महाराणा भगवत सिंह के नाम पर दिया है।

पारित आदेश में पीठासीन अधिकारी ने लिखा कि शम्भू निवास पैलेस में 1984 से अरविंद सिंह मेवाड़ निष्पादक की हैसियत के तौर पर रह रहे थे। उन्हें वहां से कब्जा खाली करने के आदेश दिए है। तीनों पक्षकार महेंद्र सिंह मेवाड़, योगेश्वरी मेवाड़ एवं अरविंद सिंह मेवाड़ अब इस शंभू निवास पैलेस में चार-चार वर्ष के लिए निवास करने के अधिकारी होंगे। इसके साथ ही ये बारी-बारी से शम्भू निवास के साथ-साथ बड़ी पाल, घासघर आदि सम्पत्तियों का मीट्स एवं बाउण्ड्स से विभाजन होने तक चार-चार वर्ष के लिए उपयोग कर सकेंगे। प्रथम वरीयता महेंद्र सिंह मेवाड़, दूसरी वरीयता योगेश्वरी कुमारी को दी है। मेवाड़ रियासत की सभी सम्पत्ति पर व्यवसायिक गतिविधियों पर अदालत ने तुरन्त प्रभाव से रोक लगा दी है।

साथ ही अरविंद सिंह मेवाड़ को शम्भू निवास पैलेस से तत्काल प्रभाव से अपना कब्जा खाली करने का आदेश दिया। इसके साथ ही जो सम्पत्तियां विक्रय व अंतरित हो चुकी है, जो वादी का शेयर बनता है वह वादी को दिलाने का अदालत ने आदेश दिया। जिला एवं सेशन न्यायालय में महाराज कुमार महेन्द्र सिंह मेवाड़ ने महाराणा भगवत सिंह, अरविंद सिंह, केयर आॅफ दी पैलेस ए. सुब्रह्मण्यम अय्यर, महारानी सुशीला कुमारी, राजमाता विरद कुंवर के खिलाफ 22 अप्रेल 1983 को सम्पत्ति बंटवारे का परिवाद पेश किया, जिसमें बताया कि संयुक्त सम्पत्ति हिन्दू परिवार एक्ट के तहत है।इसलिए सम्पत्ति को सभी में बराबर का बंटवारा किया जाए। वाद निस्तारण के लिए एडीजे-2 में आया।

मामले की सुनवाई के दौरान महाराणा भगवत सिंह की 3 नवम्बर 1984 को निधन हो गया और उसके बाद कालान्तर में महारानी सुशीला कुंवर, ए. सुब्रह्मण्यम् एवं राजमाता विरद कुंवर का भी निधन हो जाने से इस मामले में महेन्द्र सिंह बनाम अरविंद सिंह, योगेश्वरी कुमारी, महारानी सुशीला कुमारी के मध्य सुनवाई हुई। वाद में महेन्द्र सिंह ने बताया कि वह भगवत सिंह व महारानी सुशीला कुमारी का नैसर्गिक पुत्र है और समोर बाग में निवारसत होकर वर्तमान में मुम्बई में रह रहे है। अविभक्त हिंदू कुटुम्ब का सदस्य है, जिसका कर्ता अरविंद सिंह मेवाड़ है। महाराणा भगवत सिंह तत्कालीन शासकों के कुटुम्ब से है। जनता का सर्वोच्च सम्मान व आदर बराबर मिलता रहा है। पिता भूपाल सिंह मेवाड़ राज्य के अंतिम महाराणा थे। अरविंद सिंह के निरन्तर अनुत्तरदायीपूर्ण व्यवहार से वादी कुटुम्ब के नाम और परम्परा को संकटावन स्थिति में ला दिया, जिसके कारण विभक्त हिंदू कुटुम्ब की सम्पत्ति को हानि व नुकसान हुआ है।


वाद में बताया कि जनवरी 1983 में अरविंद सिंह ने वादी को उनके विधिक अधिकार देने से भी इनकार कर दिया। इसलिए उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। 1948 में राजस्थान राज्य का गठन होने के साथ ही मेवाड़ रियासत की सम्पत्तियों का राज्य सरकार ने लेते हुए उस पर मुहर लगा दी थी। 4 जुलाई 1953 से विभाजन की दिनांक तक का हिसाब का हकदार है। वादी सम्पत्तियों में यद्यपि अंश निहित है अभी तक नाम व सीमांकन द्वारा अवधारणा नहीं हुआ है।

संयुक्त परिवार के अन्य सदस्यों को हिसाब देने के लिए प्रतिवादी अरविंद सिंह उत्तरदायी है, लेकिन वे अपने कर्तव्यों को पूरी तरह भंग करते हुए सम्पत्ति का अपराधिक कुप्रबंध किया है और सम्पति के एक बड़े भाग का अपव्यय किया है। प्रतिवादी चल-अचल सम्पत्तियों का पूरा हिसाब देने के लिए बाध्य है। प्रतिवादी ने वैश्वासिक कर्तव्यों को भंग करते हुए लेखा नहीं दिया है, मांगने पर भी इनकार कर दिया।


इन सम्पत्तियों पर वाणिज्यिक गतिविधियों पर लगाई रोक :
एडीजे-2 के पीठासीन अधिकारी महेन्द्र कुमार दवे ने मेवाड़ राजघराने की सम्पत्ति सिटी पैलेस, बड़ी पाल, घास घर, आरसी विलास, नटनी का चबूतरा सहित अन्य एस्टेट मेवाड़ राज्य की जो सम्पत्ति अरविंद सिंह के कब्जे में चली आ रही है जिन पर चल रही व्यवसायिक गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

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