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ओपिनियन

देखे क्या है राज काज में खास बात

Monday, October 11, 2021 12:40 PM
कॉन्सेप्ट फोटो

खाकी वालों की बढ़ी चिंता
राज करने वालों ने नाकारा खाकी वालों की सूची मांगी, तो पीएचक्यू में झण्डे के नीचे बैठने वाले साहब के साथ कई अफसरों की बांछे खिल गईं। उनको लगा कि चलो अब ऊपर की पहुंच रखने वालों गामाओं, पीटरों और ब्रेवोज से पीछा छूटेगा और काम करने वाले मिलेंगे। काफी बदनामी के बोझ तले दबे अफसरों ने आनन-फानन में लंबी-चौड़ी सूचियां बनाकर थमा दीं। सूचियों को देखकर राज करने वालों को भी पसीने छूट गए। कोटा वालों ने तो बिना देखे ही सूची को आठ नंबर में भिजवा दिया।

चर्चा चाल, चरित्र और चेहरे की
कहावत है कि ठालै बैठे लोगों का दिमाग शैतान की तरह हो जाता है। कुछ इसी तरह का आज कल सरदार पटेल मार्ग स्थित बंगला नंबर 51 में बने भगवा वालों के ठिकाने पर हो रहा है। पौने तीन साल भर से बिना काम के बैठे भाई लोगों का दिमाग चाल, चरित्र और चेहरा की चर्चा में मशगूल है। राजनीति के जरिए व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़ने वालों की उनकी तरफ से बनाई जा रही सूची भी रोजाना बढ़ती जा रही है। तीस साल पहले साइकिलों से भाग दौड़ करने वाले भाई लोग अब 30 से 40 लाख की लग्जरी कारों में घूम रहे हैं। आखिर मामला चाल, चरित्र और चेहरे से जुड़ा है।

सवाल पॉलिटिकल रेसपोंसिबिलिटी का
राज के नवरत्नों का भी कोई सानी नहीं है। अब देखो ना कलेक्टरों और खाकी वालों के सामने एक-दूसरे की पोल खोलने में जरा भी चूक नहीं की। कलेक्टिव रेसपोंसिबिलिटी को ताक में रख कर जो जुबान खोली, उसका राज का काज करने वाले चटकारे ले रहे हैं। पहले सूबे की सबसे बड़ी पंचायत में चार-पांच पंचों ने जुबान चलाई, तो अब रत्न भी पीछे नहीं हैं। लंच केबिन में काज करने वाले बतियाते हैं कि यह पॉलिटिकल एक्सपिरियेंस के गैप का नतीजा है।

तलाश तोड़ की
आजकल मारवाड़ वाले जादूगर एक चीज का तोड़ तलाशने में जुटे हैं, तोड़ भी हल्का नहीं है। सुशासन में रोड़ा बन रहे डिजायर सिस्टम को रोकने का तोड़ जानने के लिए सीएमआर में आने-जाने वालों से राय ली जा रही है। बदलियों में डिजायर सिस्टम के चलते सुशासन संभव नहीं है। राज का काज करने वाले भी तोड़ ढूंढने में लगे हैं। लंच केबिन में चिंता व्यक्त की जा रही है कि सूबे की मंशा तो साफ है।

एक जुमला यह भी
राज का काज करने वालों के बड़े ठिकाने पर खाकी को लेकर चार दिन तक एक कवायद चली। कवायद भी छोटे-मोटे स्तर पर नहीं, बल्कि वह भी हाई लेवल पर की गई। कुल 183 के बेड़े में नॉन करप्ट्स की सूची बनाई गई। कई बार फाइलें उलट-पलट की गई, लेकिन वह 50 के आंकड़े को भी पार नहीं कर पाई। आखिर में पंचों ने सर्व सम्मति से फैसला किया कि जो भी है, उसे राम भरोसे छोड़ा जाए। खाकी वालों में नॉन करप्सन की बात करने वालों को सद्बुद्धि दे।
(यह लेखक के अपने विचार हैं)
 

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पढ़ें राज-काज में क्या है खास

सरदार पटेल मार्ग पर बंगला नंबर 51 में बने भगवा वालों के ठिकाने पर अब शांति है। मंथन की आड़ में अपनी भड़ास निकाल कर धोती वाले भाई लोग अपने-अपने घरों को लौट चुके हैं।

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