Dainik Navajyoti Logo
Saturday 28th of March 2020
 
ओपिनियन

चीन से शुरु करना चाहिए ट्रेड वॉर

Tuesday, February 18, 2020 10:20 AM
फाइल फोटो

राष्ट्रपति ट्रम्प ने बहुराष्ट्रीय कंपनियों के इस स्वार्थ का सामना किया और उनसे स्पष्ट रूप से कहा कि आप अमेरिका में वापस आईये और अपनी फैक्ट्रियां यहां लगाइए अन्यथा हम कार्यवाही करेंगे। इस पृष्ठभूमि में अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने चीन से आयातित होने वाले माल पर आयात कर बढ़ाए थे और ट्रेड वॉर को शुरू किया था। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक जैसी संस्था, बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा ही संचालित होती हैं। बीते समय में अमेरिका और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौता संपन्न हुआ है। पिछले कई वर्षों से अमेरिका में चीन से माल का आयात बहुत अधिक मात्रा में हो रहा था और निर्यात तुलना में बहुत ही कम हो रहा था। अमेरिका का व्यापार घाटा बढ़ रहा था। इस समस्या से निजात पाने के लिए राष्ट्रपति ट्रम्प ने चीन के साथ ट्रेड वॉर शुरू किया। उन्होंने चीन से आयात होने वाले माल पर भारी मात्रा में आयात कर लगा दिए और इसका पलटवार करते हुए चीन ने भी अमेरिका से आयात होने वाले कुछ माल पर आयात कर बढ़ा दिए। इन दोनों महारथियों के आपस में ट्रेड वार में लिप्त होने से सम्पूर्ण वैश्विक अर्थव्यवस्था भी मंद होने लगी। जब अमेरिका को आयात कम हुए तो चीन द्वारा अमेरिका को सप्लाई करने के लिए माल कम बनाया जाने लगा और इस माल को बनाने में दूसरे देशों से कच्चे माल का आयात कम हुआ। प्रश्न है कि अमेरिका में चीन से माल का आयात अधिक क्यों होने लगा? कारण यह है कि अमेरिका में माल का उत्पादन महंगा पड़ने लगा। अमेरिका में चीन की तुलना में श्रमिक के वेतन अधिक है और पर्यावरण की हानि करने की भी छूट कम है। चीन की फैक्ट्रियों द्वारा भारी मात्रा में कार्बन का उत्सर्जन किया जाता है जिससे लोगों के स्वास्थ बिगड़ रहा है। बीते वर्ष जब राष्ट्रपति ट्रम्प चीन की यात्रा पर गए, तो चीन ने बीजिंग के आस-पास सभी कारखानों को बंद कर दिया और उनकी यात्रा के समय चीन की वायु स्वच्छ हो गई। चीन में सस्ते वेतन और पर्यावरण की हानि के कारण चीन में माल के उत्पादन का मूल्य कम पड़ता है और चीन का माल अमेरिका में भारी मात्रा में प्रवेश कर रहा था। अमेरिकी उपभोक्ता को चीन में बना सस्ता माल आसानी से उपलब्ध हो रहा था और वे उपभोक्ता जिनके पास रोजगार था, वे अति प्रसन्न थे। लेकिन समस्या यह उत्पन्न हो गई कि जब अमेरिका में माल के उत्पादन की लागत अधिक पड़ने लगी और चीन से सस्ता माल आयातित होने लगा, तो अमेरिका की फैक्ट्रियां बंद होने लगी।

अमेरिका में श्रमिक बेरोजगार होने लगे। इस प्रकार अमेरिकी नागरिक की हालत ऐसी हो गई कि वह दुकान में रखे सस्ते माल को देख सकता है, विंडो शॉपिंग कर सकता है, लेकिन खरीदने के लिए उसके पास पैसा नहीं है। राष्टÑपति ट्रम्प को तय करना था कि वे अपने नागरिकों को सस्ता माल उपलब्ध कराएंगे अथवा रोजगार। उन्होंने तय किया कि मूल बात रोजगार की है। पहले नागरिक को रोजगार मिलना चाहिए। सस्ता माल न मिले, घर में बना हुआ महंगा माल खपत करना पड़े, तो चलेगा। यदि रोजगार ही नहीं रहेगा तो देश का नागरिक क्या करेगा? यहां राष्ट्रपति ट्रम्प और अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बीच एक द्वंध था। बहुराष्ट्रीय कंपनियों को इससे कोई अंतर नहीं पड़ता है कि अमेरिका के नागरिकों को रोजगार मिल रहा है की नहीं, उनका उद्देश्य सिर्फ  लाभ कमाना था। उन्होंने चीन में फैक्ट्रियां लगायीं। वे इस बात से प्रसन्न थे वे चीन में सस्ता माल बनाकर उसका अमेरिका से आयात करके लाभ कम रहे थे। राष्ट्रपति ट्रम्प ने बहुराष्ट्रीय कंपनियों के इस स्वार्थ का सामना किया और उनसे स्पष्ट रूप से कहा कि आप अमेरिका में वापस आईये और अपनी फैक्ट्रियां यहां लगाइए अन्यथा हम कार्यवाही करेंगे। इस पृष्ठभूमि में अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने चीन से आयातित होने वाले माल पर आयात कर बढ़ाए थे और ट्रेड वॉर को शुरू किया था। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक जैसी संस्था, बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा ही संचालित होती हैं। ये भी खुले विश्व व्यापार को बढ़ावा देती हैं। राष्ट्रपति ट्रम्प ने इन संस्थाओं का विरोध किया, अपनी नौकरशाही का विरोध किया, चीन से ट्रेड वॉर किया और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हितों पर चोट की।

राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा आयात कर बढ़ाए जाने के बाद जब ट्रेड वॉर गहराने लगा तब चीन ने घुटने टेके और राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ समझौता किया। चीन ने वादा किया है कि वह आने वाले समय में भारी मात्रा में अमेरिका से माल का आयात करेगा और अमेरिका ने भी वादा किया कि आरोपित आयात करों में कुछ ढील दी जाएगी। दोनों देशों ने संतुलित व्यापार की ओर कदम बढ़ाए हैं। हमारी परिस्थिति अमेरिका के समतुल्य ही है। जिस प्रकार अमेरिका में चीन से बने माल का आयात अधिक और निर्यात कम हो रहा था भारत की परिस्थिति उसी के बिल्कुल समानांतर है। अत: यदि हम अमेरिका से सबक ले तो हमे भी चीन के साथ ट्रेड वॉर शुरू करना चाहिए। बताते चले कि अमेरिका और चीन के बीच जो द्विपक्षीय समझौता हुआ है उसको ‘डबलूटीओ यानि विश्व व्यापार संगठन के नियमों के बहार रखा गया है। अमेरिका की तरह हमारे देश में भी चीन से माल का आयात बहुत अधिक और निर्यात कम हो रहा है। हमारे देश के नागरिक बेरोजगार हो रहें है। चीन में बने सस्ते खिलौने, गणेश जी की मूर्तियां इत्यादि आयात हो रही हैं। ऐसी परिस्थिति में हमें भी विचार करना चाहिए कि अमेरिका की तर्ज पर हम भी चीन से ट्रेड वॉर शुरू करें। हमें चीन से आयातित माल पर आयात कर बढ़ा देने चाहिए और फिर चीन को घुटने टेक कर समझौते करने पर मजबूर करना चाहिए। जिससे की हम अपने देशवासियों को रोजगार दे सकें। समस्या यह दिखती है कि हमारी सरकार पर नौकरशाहों का वर्चस्व ज्यादा गहरा है। ये स्वयं सेवा निवृति के बाद इन्हें अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष और विश्व बैंक जैसी संस्थाओं में कंसल्टेंसी पर रोजगार करना चाहते हैं। इनके बच्चे इसी प्रकार की कंपनियों में रोजगार करते हैं।

(ये लेखक के अपने विचार हैं)

 

यह भी पढ़ें:

क्या ग्राहक के अधिकार सुरक्षित हैं?

अब जरा इस बात को परखिए कि ज्यादातर जो जिला अदालतें हैं उनकी क्या हालत है। फर्नीचर के नाम पर न्यायाधीशों के बैठने तक के लिए ठीकठाक कुर्सी मेज नहीं हैं तो फिर जो शिकायत लेकर आया है तो उसके लिए टूटी फूटी बेंच और कई जगह तो वो भी नहीं, खड़े रहकर अपना मुकदमा लड़िए, जैसी हालत के लिए क्या प्रशासन जिम्मेदार नहीं है।

12/08/2019

'कांटों की राह' पर कैसे करें ओलंपिक स्वर्ण की उम्मीद...

रियो ओलंपिक खेलों की खुमारी उतरने में अभी दो या चार दिन का और वक्त लगेगा...जब तक कि दो पदकवीर लड़कियों के गले में डलीं मालाओं के फूल सूख नहीं जाते, इसके बाद अगले ओलंपिक तक आप उनके सिर्फ नाम याद रखेंगे कि हैदराबाद की पीवी सिंधु ने बैडमिंटन में रजत और हरियाणा के रोहतक जिले के एक गांव की लड़की साक्षी मलिक ने महिला कुश्ती में कांसे का पदक अपने गले में पहना था...इससे ज्यादा आपको कुछ याद नहीं रहने वाला है...

25/08/2016

जानिए, राजकाज में क्या है खास?

निष्ठा तो निष्ठा ही होती है, वह कब और कहां तथा किसके प्रति बदल जाए, कुछ नहीं कहा जा सकता।

01/07/2019

भारत की कूटनीतिक उपलब्धि

भारत सरकार के अथक प्रयासें के बाद अंतर्राष्ट्रीय दबाव में जर्जर अर्थव्यवस्था वाले पाकिस्तान ने स्वीकारा है कि उसकी धरती पर मदरसों में घृणा का पाठ पढ़ाया जाता रहा है। स

06/05/2019

यूपी ही तय करेगा देश का भविष्य

देश की राजनीति में यूपी की महत्ता किसी से छिपी नहीं है। ऐसे में सबकी निगाह यूपी में आखिरी दो चरणों के चुनाव पर है। यहां भाजपा गठबंधन और कांग्रेस के बीच आखिरी चरण में छिड़ी जुबानी जंग से उत्साहित है।

11/05/2019

बच्चों के लिए सुकुन भरा होगा यह फैसला

चीन सरकार का हालिया फैसला बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति सरकार की गंभीरता को दर्शाता है। अब चीन में बच्चों को रात दस बजे के बाद अनिवार्यत: सोना होगा। हालांकि इस पर दुनिया के देशों में बहस शुरु हो चुकी है।

15/11/2019

इतने राम कहां से लाऊं?

भारत वर्ष हजारों साल से गांव और गरीबी प्रधान देश है। हमें वैदिक काल से ही एक प्रजा के रूप में देवी-देवताओं और राजा की विजय के दिवस मनाने की आदत है। हमारा इतिहास, संस्कृति और परम्परा में हर दिन शक्ति और भक्ति का उत्सव मनाता है। दुनिया में सत्य, शिव और सुंदर की महाखोज करते रहना भी हमारी इस बात का प्रमाण है कि मनुष्य की जीवनधारा को सुख-दु:ख का संगीत मानकर ही चलते रहना चाहिए।

10/10/2019