Dainik Navajyoti Logo
Wednesday 28th of October 2020
 
ओपिनियन

जानें राज काज में क्या है खास

Monday, December 02, 2019 11:55 AM
किसी भी बड़े आदमी के मुंह से निकली बात का कोई न कोई मायना जरूर होता है। वो तो उसका अर्थ निकालने वाले पर निर्भर करता है कि वह क्या सोचता है।

किसी भी बड़े आदमी के मुंह से निकली बात का कोई न कोई मायना जरूर होता है। वो तो उसका अर्थ निकालने वाले पर निर्भर करता है कि वह क्या सोचता है। अब देखो ना, सूबे की सबसे बड़ी पंचायत में शुक्र को जोधपुर वाले अशोक जी भाईसाहब के मुंह से नाथद्वारा वाले प्रोफेसर साहब को मुख्यमंत्री बोलने को लेकर जो बात निकली, उसके कई मायने निकाले जा रहे हैं। मौके की नजाकत को भांप कर भाईसाहब ने अपनी जादूगरी दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। आखिरकार भाईसाहब ने भी अपना मुंह खोल ही दिया कि मेरी जुबान से निकली बात सही भी हो सकती है। अब पीसीसी में ठाले बैठे भाई लोग अपने-अपने हिसाब से मायने निकाल रहे हैं।

राज वालो पर नहीं विश्वास
राज का काज करने वालों का कोई सानी नहीं है। हर बात को घुमाने में माहिर इन भाई लोगों की एक बानगी ने राज करने वालों को भी जता दिया है कि ऐसा-वैसा चलने वाला नहीं है। दरबार के एक रत्न ने विदेश की हवा खाने का सपना देखा और पासपोर्ट के लिए अपने विभाग का काज करने वाले सचिव को सत्यापन प्रमाण पत्र बनाने का हुक्म दे डाला।

आदिवासी इलाके से ताल्लुक रखने वाले रत्न को जवाब मिला कि ये काम जीएडी का है। वहां पहुंचे रत्न को यह कहकर टरका दिया कि यहां तो सिर्फ एनओसी मिलती है। राज करने वालों की लंच केबिन में चर्चा है कि बैठे ठाले कौन मुसीबत मोल ले, पता नहीं दफा 129 का ही मामला पैण्डिंग हो।

अब नंबर में कौन
पहले सूबे का और अब शहरों की सरकार का चुनाव हार चुकी भगवा पार्टी के लोग आॅक्सीजन की तलाश में हैं। वेंटिलेटर तक पहुंच चुकी पार्टी के लिए अब संजीवनी बूटी से कम नहीं है। उसे लाने के लिए हनुमानजी की तलाश है। अनुशासन की दुहाई की आड़ में पार्टी की इस हालत के लिए किसी न किसी को जिम्मेदार भी ठहराया गया है। हर बार हार ने किसी न किसी की बलि ली है। पहले मैडम और बाद में आमेर वाले पूनिया जी। अब किसका नंबर है? इस बार सूची काफी लंबी बताई गई है।

पर्ची का कमाल
शहरों में बल्ले होने के बाद कांग्रेसी भाईयों की हौसलों की उड़ान थम नहीं रही है। हर एक नेता की महत्वाकांक्षा कम होने का नाम ही नहीं ले रही। छोटे पायलट के उत्तराधिकारी के लिए भी जोड़ तोड़ करने वाले भाई लोग दिल्ली में मैडम के दरबार तक में मत्था टेक आए। कुछ भाई लोगों ने मैडम के सामने जूनियर जोशी और किसान के बेटे डॉक्टर साहब के नाम भी परोस दिए। मैडम कुछ फैसला करती, इससे पहले एक और पर्ची थमा दी गई। पर्ची का असर भी जोरदार रहा। पर्ची में केवल यह लिखा था कि यह कैसी कांग्रेस है कि राजस्थान में साठ साल के बाद भी दलित और अल्पसंख्यक तबके के लोग संगठन की कुर्सी तक नहीं पहुंच पाएं।

एक जुमला यह भी
इन दिनों राजधानी के सरदार पटेल मार्ग स्थित बंगला नंबर 51 में बने भगवा वालों के ठिकाने पर एक चर्चा जोरों पर है। ठिकाने पर रोजाना आने वाले कार्यकर्ता आपसी संवाद में कबूल करते हैं कि बिना स्ट्रोंग लीडरशिप के मतदाता वोट नहीं डालता। शहरों की सरकार की जंग में भी मतदाता की मंशा तो पक्ष में थी, लेकिन लीडरशिप का मैसेज नहीं दिया जा सका। पार्टी भी विपक्ष की हैसियत से वोट नहीं लेना चाहती। सूबे की सरकार और शहरी सरकारों के चुनावों की हार का प्रमुख कारण भी लीडरशिप ही है।

(यह लेखक के अपने विचार हैं)

 

यह भी पढ़ें:

'कांटों की राह' पर कैसे करें ओलंपिक स्वर्ण की उम्मीद...

रियो ओलंपिक खेलों की खुमारी उतरने में अभी दो या चार दिन का और वक्त लगेगा...जब तक कि दो पदकवीर लड़कियों के गले में डलीं मालाओं के फूल सूख नहीं जाते, इसके बाद अगले ओलंपिक तक आप उनके सिर्फ नाम याद रखेंगे कि हैदराबाद की पीवी सिंधु ने बैडमिंटन में रजत और हरियाणा के रोहतक जिले के एक गांव की लड़की साक्षी मलिक ने महिला कुश्ती में कांसे का पदक अपने गले में पहना था...इससे ज्यादा आपको कुछ याद नहीं रहने वाला है...

25/08/2016

वैश्विक तापमान बढ़ोतरी का संकट

बीते दिनों वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी के खिलाफ नए सिरे से कदम उठाने और विश्व नेताओं पर दबाव बनाने के लिए यूरोप में लाखों लोग सड़क पर उतरे। कारण तापमान में दिनोंदिन हो रही बढ़ोतरी समूची दुनिया के लिए भीषण खतरा बनती जा रही है। दुनिया के वैज्ञानिक सबसे अधिक इसी बात से चिंतित हैं।

06/12/2019

भारतीय अर्थव्यवस्था की दशा और दिशा

वर्ष 2019-2020 में भारतीय अर्थतंत्र के साथ- साथ विश्व अर्थव्यवस्था के लिए गहरा संकट लेकर उभरा है। इसमें कोई संदेह नहीं कि विभिन्न आर्थिक क्षेत्र मंदी की मार झेल रहा है और उन्हें मदद की दरकार है। सरकार पर विभिन्न क्षेत्रों की जरूरतों के अनुरूप कार्य की घोषणा करने का दबाव है।

20/09/2019

राष्ट्रपति ट्रंप की पहली भारत यात्रा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आगामी दो दिवसीय भारतीय यात्रा से पूर्व ऐसे ही विवाद हो रहे हैं। भारत के लोगों के साथ सबसे बड़ी समस्या ये है कि वे अपनी बुद्धि व विवेक से बहुत कम सोचते-समझते हैं।

21/02/2020

पानी की कमी का गहराता संकट

भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच पानी के मुद्दे को लेकर तनातनी चलती ही रही है। इसके अलावा उत्तरी अफ्रीका के कुछ देशों के बीच भी पानी की वजह से झगड़े होते रहे हैं।

03/07/2019

हेकड़ी बनाम वाटर-बम

आज ‘हेकड़ी’ की बात करते हैं। इसकी बात इसलिए उठी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाड़मेर की चुनाव सभा में इस शब्द का इस्तेमाल जो किया।

23/04/2019

फारूक की गिरफ्तारी के मायने

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और लोकसभा सांसद फारूक अब्दुल्ला को जन सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तार किया गया है। ऐसे वक्त में जब जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म किए जाने के बाद लगाई गई पाबंदियों से जुड़े सवालों पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रही थी, नेशनल कानफ्रेंस के सुप्रीमो फारूक अब्दुल्ला को हिरासत में लिए जाने की खबर आई।

30/09/2019