Dainik Navajyoti Logo
Sunday 15th of December 2019
 
ओपिनियन

जनकल्याण योजनाओं की भी हो सोशल ऑडिट

Tuesday, November 26, 2019 11:45 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर।

नरेन्द्र चौधरी
राज्य और केन्द्र सरकार जनता के कल्याण के लिए कई योजनाएं चलाती है। इन योजनाओं को चलाने का उद्देश्य यहीं होता है कि इनका लाभ जनता को मिले। कई बार सरकार द्वारा चलाई जा रही सामाजिक परियोजनाओं की जानकारी ना तो जनता तक पहुंच पाती है और ना ही सरकार को इस बात की जानकारी मिल पाती है कि करोड़ों रुपए की लागत से शुरू की गई योजनाओं का पूरा लाभ जनता को मिल भी रहा है या नहीं। यह सामाजिक परियोजनाएं देश के विकास के लिए ही चलाई जाती हैं। जब जनता को इनका लाभ मिलेगा तभी देश का विकास भी होगा। जितनी भी राज्य और केन्द्र सरकार की सोशल परियोजनाएं हैं उनका हर साल सोशल ऑडिट होना चाहिए।

सोशल ऑडिट से मतलब है कि जो भी पैसा किसी विशेष सामाजिक उद्देश्य से किसी समूह को दिया जाता है तो उस समूह का सही मायने में सामाजिक उत्थान हो रहा है या नहीं इसका मूल्यांकन सोशल ऑडिट कहलाता है। उदाहरण के लिए यदि किसी गरीब समूह को शिक्षा के लिए पैसा दिया जा रहा है तो उससे वह समूह सही मायने में शिक्षित हो रहा है या नहीं इसका पता सोशल ऑडिट के माध्यम से ही चल सकता है। इससे जनता को न सिर्फ उन कार्यों की जांच का मौका मिलता है बल्कि विकास और सामाजिक कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित होती है। सोशल ऑडिट से यह जानकारी मिल जाएगी कि विकास कार्य कितने उपयोगी साबित हो रहे हैं। उनकी गुणवत्ता और उन पर हुए खर्चे की जांच करने तथा भविष्य में वह योजनाएं कितनी लाभकारी हो सकती है या नहीं हो सकती, इसकी संपूर्ण जानकारी उपलब्ध हो जाएगी। विकास से संबंधित सभी पहलुओं को नई दिशा भी मिल जाएगी। जिससे यह पता चल सकेगा कि वह प्रोजेक्ट आउटपुट दे रहा है या नहीं दे रहा है।

दूसरा, जिन लोगों के लिए यह प्रोजक्ट चलाए जा रहे हैं उनको कितना फायदा मिल रहा है। यदि इन प्रोजेक्ट से लाभ हो रहा है तो देश का विकास होगा। यदि कोई आउटपुट इन प्रोजेक्ट का नहीं मिल रहा है तो ऐसे प्रोजेक्ट्स को बंद कर देना ही उचित रहेगा। हालांकि किसी प्रोजेक्ट को बंद करने का निर्णय कठोर जरूर होता है लेकिन ऐसे प्रोजेक्ट को बंद करने से जो धन राशि बचेगी उसे व्यापार को गति देने में लगाया जा सकता है। चूंकि बिजनस वटवृक्ष की भांति होता है, जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कई लोग जुड़ते हैं, रोजगार मिलता है तथा उस जगह का विकास होता है। सरकार को भी सोशल ऑडिट की रिपोर्ट वेबसाइट पर डालनी चाहिए, जिससे करदाताओं या नागरिकों को यह सुनिश्चित हो जाएगा कि उनका धन किस प्रकार, कहां-कहां, कितना खर्च हो रहा है। इससे किसी योजना की प्रगति की वास्तविक स्थिति की जानकारी भी मिलती रहती है।

कहने का तात्पर्य यह है कि जनता सरकारी योजनाओं पर निगाह रख सकेगी। इससे जवाबदेही भी तय होती है और कामकाज में पारदर्शिता आती है। सोशल ऑडिट के लिए इंडीपेन्डेंट ऑटोनॉमस बॉडी बनानी चाहिए जो बिना किसी के हस्तक्षेप के स्वतंत्र रूप से कार्य कर सके। वह सोशल प्रोजेक्ट जो अगर आउटपुट नहीं दे रहे हैं उनको बंद करने से देश में पेट्रोल, डीजल, स्पेक्ट्रम आदि के कर भी कम हो जाएंगे। अनुपयोगी प्रोजेक्ट बंद होने से काफी धन बचेगा। जिससे सरकार को ज्यादा टैक्स लगाने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। हालांकि यह थोड़े कड़े फैसले हो सकते हैं। लेकिन सही मायने में इनसे देश का एक समान विकास होगा। इससे सभी तक लाभ पहुंचेगा। गरीबों को भी फायदा होगा। सोशल ऑडिट से जनता को भी यह विश्वास आएगा कि उनका धन व्यर्थ नहीं जा रहा है। सोशल ऑडिट से ना केवल गरीबों का विकास होगा बल्कि व्यापार भी बढ़ने से देश का चहुंमुखी विकास होगा।

यह भी पढ़ें:

जानें राज-काज में क्या है खास

सालों से पार्टियों के लिए काम करने वाले वर्कर इन दिनों का कन्फ्यूज्ड हैं। बेचारे वो समझ नहीं पा रहे हैं कि रात-दिन एक ही नारा लगाने की आदत को एकदम कैसे बदलें।

29/04/2019

नीयति बन चुकी है दिल्ली की जहरीली हवा

देश की राजधानी दिल्ली के लोग आजकल जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं। मौजूदा हालात इस बात के जीते जागते सबूत हैं। ऐसा लगता है कि जहरीली हवा में सांस लेना उनकी नियति बन चुका है।

21/10/2019

फारूक की गिरफ्तारी के मायने

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और लोकसभा सांसद फारूक अब्दुल्ला को जन सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तार किया गया है। ऐसे वक्त में जब जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म किए जाने के बाद लगाई गई पाबंदियों से जुड़े सवालों पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रही थी, नेशनल कानफ्रेंस के सुप्रीमो फारूक अब्दुल्ला को हिरासत में लिए जाने की खबर आई।

30/09/2019

चुनाव को सरकारी अनुदान दीजिए

एनडी की भारी जीत ने हमारी चुनावी व्यवस्था में पार्टियों के वर्चस्व को एक बार फिर स्थापित किया है। विशेष यह की चुनाव में जनता के मुद्दे पीछे और व्यक्तिगत मुद्दे आगे थे।

27/05/2019

ब्रिक्स : आपसी हितों का प्रभावी मंच

वैश्विक स्तर पर वित्तीय मामलों में परामर्श देने वाली संस्था गोल्डमैन शश के प्रमुख कार्यकारी निदेशक जिम-ओ-नील ने 2001 में अपने एक लेख में लिखा था कि ब्राजील, रूस, भारत और चीन (बीआरआईसी) की अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत होगी कि साल 2050 तक यह देश दुनिया के आर्थिक ढांचे का निर्धारण करते दिखेंगें।

15/11/2019

विजय उदबोधन के विजयी स्वर

सरसंघ चालक मोहन भागवतजी का उद्बोधन संघ के दृष्टिकोण से अवगत कराने का एक सशक्त माध्यम बना है।

14/10/2019

अब संतन को भी सीकरी सों काम!

राज्य-मंत्रणा के मंच पर आज ‘साधु-संतों’ को लेकर चर्चा चल रही थी। तभी एक विशेषज्ञ ने अष्टछाप वैष्णव कवि कुंभनदासजी के उस कवित्त की पंक्तियां सुनाईं

19/04/2019