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ओपिनियन

देखें राज काज में क्या है खास

Monday, February 17, 2020 11:20 AM
कॉन्सेप्ट फोटो

सचिवालय में इन दिनों मीटिंग, सिटिंग और ईटिंग का जुमला जोरों पर है। जुमला है कि अब ब्यूरोक्रेसी रोड मैप तैयार करने में बड़ी कंजूसी कर रही है, जबकि इतिहास गवाह है कि हर कोई बड़ा साहब राज को नई योजनाएं देकर जाता है, जिनसे सूबे की तकदीर तक बदलती है। राज का काज करने वाले बतियाते हैं कि गुजरे जमाने में ब्यूरोक्रेसी ने मरु प्रदेश को तीस जिला-तीस काम, अपना गांव-अपनी योजना और अन्त्योदय जैसी नई योजनाएं दी है, जो पड़ोसी सूबों के लिए रोल मॉडल भी बनी है। अब मीटिंग तो होती है, लेकिन सिटिंग और ईटिंग तक ही सिमट जाती है।  

बढ़ने का रहस्य वोल्यूम
सूबे की सबसे बड़ी पंचायत में जोर से बोलने को लेकर काफी खुसरफुसर है। ना पक्ष के साथ ही हां पक्ष लॉबी में भी इसके रहस्य को लेकर काफी उत्सुकता बनी हुई थी। जोर से बोलने वाले ना पक्ष के सदस्य नहीं, बल्कि राज के दो रत्न हैं। दोनों ही आगे की लाइन में अगल-बगल में रहते हैं। दोनों का बोलते-बोलते वोल्यूम इतना बढ़ जाता है कि अगल-बगल और आगे-पीछे बैठने वाले भी इधर-उधर देखने लगते हैं। जब राज के तीसरे रत्न ने रहस्य उजागर किया तो पंचों की जिज्ञासा शांत हुई। रहस्य हमें भी पता चला तो हम भी आपको बताय देते हैं। दोनों रत्नों के पिछले कुछ दिनों से कम सुनने की बीमारी हो गई। सो दोनों ने अपने कानों में श्रवण यंत्र लगा लिए। एक का यंत्र तो इतना छोटा है, कि सामने वालों को दिखाई तक नहीं देता। लेकिन हाथों के फटकारे से कई बार निकल कर गिर जाने से स्वत: ही उनका वोल्यूम तेज हो जाता है।

जापानी तेल का कमाल
तेल तो तेल ही होता है, चाहे वह इंडिया में बना हो या फिर जापान में। लेकिन इंडिया में अपने तेल को भुलाकर जापानी तेल को लेकर माथापच्ची हो, यह समझ के बाहर की बात है। राज का काज करने वाले भी इस जापानी तेल को लेकर उलझन में हैं। पहले तो खाकी वाले भाई लोग ही जापानी तेल के चक्कर में कागज काले करते थे, लेकिन अब तो खादी वाले भी पता लगाने में जुटे हैं कि तेल को लेकर मचे बवाल के पीछे का राज क्या है।

बवाल को थामने के लिए डॉक्टरों के महकमे वाले भाईसाहब ने कदम बढ़ाए तो उनका भी माथा खराब हुए बिना नहीं रहा। भाईसाहब ने एक महीने पहले नाड़ी देख कर इलाज करने वाले भाई लोगों से जापानी तेल का फार्मूला पूछा तो पता चला कि साहब लोग तो पहले से रात-दिन इस तेल की तासीर जानने में जुटे हैं। आयुर्वेद वाले साहब तो पता नहीं कब रिपोर्ट सौंपेंगे, लेकिन हम बताय देते हैं कि यह औषधि है, जो अरंडी के तेल की तर्ज पर काम करता है। 

एक जुमला यह भी
राज का काज करने वालों में इन दिनों एक जुमला जोरों पर है। जुमला भी छोटा-मोटा नहीं बल्कि कमीशन को लेकर है। जुमला है कि दिल्ली दरबार ने प्लानिंग कमीशन तो समाप्त कर दिया, मगर प्लानिंग में कमीशन नॉन-स्टॉप जारी है। अब देखो ना एमपी-एमएलए लैड में डीआरडीए के साहब लोगों का कमीशन से इतना मोह है कि उसके बिना पैन का ढक्कन तक नहीं खुलता। और तो और जिस दिन नहीं मिलता, उनका हाजमा तक बिगड़ जाता है।

कमीशन के फेर में पिंकसिटी के एक युवा नेताजी की मालाएं तक सूख गई। बेचारे को आज तक समझ में नहीं आया कि आखिर यह कमीशन क्या बला है।
(यह लेखक के अपने विचार हैं)

 

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