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ओपिनियन

यह है सच जेएनयू हिंसा का

Wednesday, January 22, 2020 11:10 AM
फाइल फोटो

पुलिस का कहना है कि इन छात्रों के प्रदर्शन की वजह से आम लोगों को परेशानी हो रही है। कनॉट प्लेस में लोगों को इनके प्रदर्शन की वजह से दिक्कते हुई, जब भी हम इन लोगों से कनेक्ट करने की कोशिश करते हैं, तो ये लोग कानून का उल्लंघन करते हैं। यह सच है। अब जरा घटनाक्रम को देखिए और जो माहौल बनाया गया, उससे तुलना करिए। माहौल यह बनाने की कोशिश हुई कि केन्द्र में भाजपा की सरकार होने के कारण उनसे जुड़े छात्र संगठनों ने गुंडों और अपराधियों की तरह वामपंथी छात्र संगठनों से जुड़े लोगों को मारा, जिनको हर संस्था को अविश्वसनीय बनाना है उनके लिए किसी प्रमाण का कोई मायने नहीं, लेकिन दिल्ली पुलिस के विशेष जांच दल यानी सिट के प्रमुख ने प्राथमिक जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी है। सच जेएनयू हिंसा का वही है, जो जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय या जेएनयू में हिंसा पर गहराई से नजर रखने वाले बता रहे थे। कोई भी हिंसा अपने आप नहीं होती। जेएनयू में जो भयावह हिंसा के वीडियो दिखे वे एक पक्षीय नहीं थे। पहली बार हिंसा की, जो तस्वीरें आईं उनके पहले भी हिंसा हुई थी, जिनका सच सामने आ चुका है। दिल्ली पुलिस ने इसकी पुष्टि की है। दिल्ली पुलिस ने हिंसा मामले में 9 आरोपितों की तस्वीरें जारी की हैं। इसमें जेएनयूएसयू की अध्यक्ष आइशी घोष भी शामिल हैं। प्रश्न है कि अगर जांच पूरी नहीं हुई, तो फिर दिल्ली पुलिस ने पत्रकार वार्ता क्यों की। इसका उत्तर देते हुए सिट प्रमुख ने ही कहा कि सामान्य तौर पर हम जांच पूरी होने के बाद ही प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं, लेकिन इस घटना के संदर्भ में फैलाई जा रही अफवाहों की वजह से हमें पहले ही प्रेस कॉन्फ्रेंस करना पड़ रहा है। छात्रों का भविष्य इससे जुड़ा हुआ है, उसको ध्यान में रखते हुए हम आपसे जानकारी साझा कर रहे हैं।

जेएनयू घटना को लेकर लोगों के बीच गलत जानकारी फैलाई जा रही है। यानी गलत बातों को जवाब देने के लिए जितनी जानकारी आई उसे सार्वजनिक कर दिया गया। पुलिस का कहना है कि इन छात्रों के प्रदर्शन की वजह से आम लोगों को परेशानी हो रही है। कनॉट प्लेस में लोगों को इनके प्रदर्शन की वजह से परेशानी हुई, जब भी हम इन लोगों से कनेक्ट करने की कोशिश करते हैं, तो ये लोग कानून का उल्लंघन करते हैं। यह सच है। अब जरा घटनाक्रम को देखिए और जो माहौल बनाया गया उससे तुलना करिए। माहौल यह बनाने की कोशिश हुई कि केन्द्र में भाजपा की सरकार होने के कारण उनसे जुड़े छात्र संगठनों ने गुंडों और अपराधियों की तरह वामपंथी छात्र संगठनों से जुड़े लोगों को मारा। क्यों मारा इसका कोई समाधानपरक जवाब नहीं। दिल्ली पुलिस ने सिलसिलेवार ढंग से जेएनयू के घटनाक्रम को रख दिया है। यह तो सच है कि जेएनयू में विंटर रजिस्ट्रेशन चल रहा है, जिसका वामपंथी दलों से जुड़े छात्र संगठन आईएसएफ, एसएफआई, आईसा और डीएसएफ  विरोध कर रहे है। ज्यादातर छात्र रजिस्ट्रेशन कराना चाहते हैं। इन संगठनों के सदस्य स्वयं जो छात्र रजिस्ट्रेशन करना चाह रहे थे, उनको धमका भी रहे थे। हमारे पास घटना का वीडियो आया, लेकिन पुलिस ने विवरण दिया है। जांच में पता चला कि रजिस्ट्रेशन की कोशिश करने वाले छात्रों को डराया-धमकाया गया, धक्कामुक्की भी की गई। दिल्ली पुलिस ने बताया कि स्टूडेंट फ्रंट आॅफ इंडिया, आॅल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन, आॅल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन और डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फेडरेशन के सदस्य सेंट्रलाइज रजिस्ट्रेशन सिस्टम को रोकने के लिए जबरदस्ती सर्वर को बंद कर दिया। उन्होंने सर्वर ठप करने की कोशिश की। दोपहर में पीछे शीशे के दरवाजे से कुछ अंदर घुसे और उन्होंने सर्वर को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया। इससे रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया रुक गई।

इन मामले में पुलिस के पास प्राथमिकी दर्ज कराई गई है, जिसमें आईसा घोष का नाम है। रजिस्ट्रेशन न करने देने से परेशान चार छात्र स्कूल आॅफ सोशल साइंसेज के सामने बेंच पर बैठे हुए थे। आइएसएफ, आइसा, एसएफआइ और डीएसएफ  का एक समूह आया और उन छात्रों को पीटने लगा। बीच-बचाव के लिए गए गार्डों को भी पीटा गया। 20 छात्रों के खिलाफ गार्डो पर हमला करने की प्राथमिकी दर्ज हुई है। इसके बाद इन्हीं 4 संगठनों के लोगों ने पेरियार हॉस्टल में छात्रों पर हमला किया। दोपहर में पेरियार हॉस्टल में नकाबपोश हमलावरों ने चुन-चुनकर छात्रों को मारा। पुलिस का कहना है इसमें जेएनयूएसयू अध्यक्ष भी शामिल थीं। हमलावर मुंह ढके हुए थे। पेरियार हॉस्टल को निशाना बनाया गया। इसके बाद साबरमती हॉस्टल में नकाबपोश हमलावरों ने तोड़फोड़ और हिंसा की। इसमें भी कुछ छात्रों की पहचान हुई है। साबरमती हॉस्टल के पास मौजूद टी पॉइंट के पास पीस मीटिंग हो रही थी। इस दौरान कुछ नकाबपोश लोगों ने हाथ लाठी डंडा लेकर साबरमती हॉस्टल पर हमला किया। इस समूह में शामिल कुछ छात्रों को चिह्नित किया गया है। थोड़ी बहुत हिंसा नर्मदा हॉस्टल में भी हुई। इसका भी केस दर्ज हुआ है। ध्यान रखिए कि अभी यह आधी जांच रिपोर्ट है। इससे इतना साफ होता है, जो दृश्य हमने देखा उसकी पृष्ठभूमि पहले बनाई जा चुकी थी। तीन दिनों से तनाव था और दो दिनों में कई बार मार पिटाई हुई थी। ज्यादातर लोग या तो विद्याथी परिषद के थे या फिर आम छात्र जो सेमेस्टर की परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन कराना चाहते थे। इसलिए यह भी नहीं कहा जा सकता कि जिन लोगों के हाथों में कोई डंडा दिख रहा है, वह हमलावर ही थे। वह अपनी रक्षा के लिए भी रखे हो सकते हैं। आखिर पेरियार हॉस्टल में उन्हीं कमरों में क्यों हमला हुआ, जिसमें परिषद के छात्र थे। बहुत सारे छात्र-छात्राओं ने छिपकर अपने को बचाया।

(ये लेखक के अपने विचार हैं)

 

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