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ओपिनियन

शरणार्थी बने हाईब्रिड वारफेयर का हथियार

Thursday, November 25, 2021 17:20 PM
कॉन्सेप्ट फोटो

काश मैं समय की घड़ियों को इतना पीछे ले जा सकने में समर्थ हो सकती, जहां से मैं, मेरी सरकार और संस्थाओं को शरणार्थियों की इस विकट समस्या से बेहतर तरीके से निपटने के लिए तैयार कर सकती-एंजेला मर्केल।
वर्ष 2015 में दस लाख सीरियाई शरणार्थियों के लिए अपने राष्टÑ के द्वार खोलते समय जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल के उक्त कथन ने पश्चिमी देशों सहित अन्य राष्टÑों को शरणार्थियों के प्रति नजरिए में बदलाव के साथ इस विकट समस्या पर सहानुभूति से विचार करने के लिए नई दृष्टि प्रदान की थी। परन्तु आज एक सनकी तानाशाह द्वारा अपने प्रतिशोध के लिए शरणार्थियों को एक हथियार के रूप में काम में लेने की घटना ने शरणार्थी समस्या के अमानवीय पहलू से दूनिया को रू-ब-रू करवाते हुए नए विमर्श को जन्म दिया है। बेलारूस के तानाशाह राष्टÑपति अलेक्जेंडर ल्यूकाशेंको द्वारा स्पष्टत: राज्य प्रायोजित हजारों तुर्की, अफगानी, ईराकी, सीरियाई और अन्य अशांत देशों के मजबूर नागरिकों को योजनाबद्ध तरीके से अपने देश की सीमा से लगने वाले यूरोपियन यूनियन के देशों पोलैंड, लिथुआनिया व लातविया की सीमाओं पर जबरन घुसपैठ के लिए छोड़ दिया। जो सर्वथा निंदनीय कृत्य है।दरअसल बेलारूस के राष्टÑपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको करीब तीन दसकों से लगातार सत्ता पर काबिज हैं, जो वर्ष 2020 के आम चुनावों में वे 6वीं बार राष्टÑपति चुने गए हैं परन्तु पश्चिमी देशों सहित एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसी संस्थाओं के स्वतंत्र पर्यवेक्षकों ने इस आम चुनाव पूर्णरूप से प्रभावित और षड्यंत्रकारी करार दिया था। बेलारूस की अवाम ने लुकाशेंको की इस दमनकारी शासन शैली के विरोध में देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किए, परन्तु प्रदर्शनकारियों का कठोरता से दमन करते हुए लुकाशेंको सरकार ने करीब पैंतीस हजार लोगों को गिरफ्तार कर जेलों में बंद कर दिया। लुकाशेंको के उक्त कृत्यों व तानाशाही रवैए व बेलारूसी अवाम के मानवाधिकारों का बेजा हनन करने के कारण यूरोपियन यूनियन और अमेरिका ने बेलारूस पर अनेकों प्रतिबंध लगा दिए।
मई माह में तानाशाह लुकाशेंको ने यूनान से लिथुआनिया जा रही रयान एयर के विमान को हाईजैक करवाते हुए निर्वासित बेलारूसी युवा विसल ब्लोअर, ब्लॉगर और पत्रकार रोमन प्रोताशेविच को बेलारूस में अशांति और दंगे भड़काने के जुर्म में उसकी रूसी महिला मित्र सोफिया सपेगा के साथ गिरफ्तार करवा दिया था। विमान हाइजैकिंग और प्रोताशेविच की गिरफ्तारी की घटना के बाद यूरोपियन यूनियन और अमेरिका ने बेलारूस पर प्रतिबंध और कड़े कर दिए। इन प्रतिबंधों से खफा लुकाशेंको यूरोपियन यूनियन के विरूद्ध हाईब्रिड वारफेयर के तहत शरणार्थियों को एक हथियार की तरह काम लेते हुए हजारों शरणार्थियों को पोलैंड के बॉर्डर पर लाकर छोड़ दिया। जो बेहतर जीवन की उम्मीद में अवैध तरीके से यूरोप में प्रवेश करना चाहते है। शरणार्थियों द्वारा पोलैंड के बॉर्डर पर लगे कंटीलें तारों को जबरदस्ती काटने व पोलैंड की पुलिस व सेना के साथ शरणार्थियों की हिंसक झड़पें उनका लुकाशेंको शासन प्रायोजित होना सिद्ध करती है। यद्यपि पोलैंड ने लुकाशेंको के इरादों को भांपते हुए गत दिसम्बर माह में ही अपने 180 कि.मी. बॉर्डर को कँटीले तारों से सुरक्षित करना शुरू कर दिया था, वरना आज स्थिति अनियंत्रित और भयावह हो जाती। खून जमा देने वाली इस ठंड में शरणार्थी महिलाओं और बच्चों सहित बॉर्डर पर डटे हुए हैं। भूख से बिलखते बच्चों और हाईपोथर्मिया से मौतों के दृश्य नि: सन्देह हृदय विदारक और मानवता को शर्मसार कर देने वाले हैं। परंतु बेलारूसी तानाशाह लुकाशेंको अपनी जिद्द पर अड़े हुए हैं। उन्होंने रूस से यूरोप जा रही यमल गैस पाईप लाईन की आपूर्ति ठप्प करने तक की धमकी दे डाली है। बढ़ते तनाव के मध्य नजर यूके के रक्षा मंत्री बेन वॉलेस ने अपने देश के 150 सैनिक भेजने की घोषणा की है। इस शरणार्थी संकट का हल निकालने के लिए जर्मन चांसलर की बेलारूस के राष्टÑपति से वार्ता निरंतर जारी है। फलत: लुकाशेंको के तेवर कुछ नरम पड़े है और कुछ ईराकी शरणार्थी बॉर्डर से अपने देश के लिए रवाना हो चुके हैं। उम्मीद की जानी चाहिए की अच्छे मध्यस्थों की मदद से जल्द ही इस संकट का कोई न कोई हल भी निकल ही जाएगा, परन्तु यूरोप का अंतिम तानाशाह कहे जाने वाले अलेक्जेडर लुकाशेंको की सनक ने यूरोपियन यूनियन और उसके सहयोगी अमेरिका को रूस से टकराव के कगार पर ला खड़ा किया है।
जी-7 के विदेश मंत्रियों ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा है- हम जी-7 विदेश मंत्री और यूरोपीय संघ के उच्च प्रतिनिधि, बेलारूसी शासन द्वारा अपनी सीमाओं के पार अवैध प्रवास को प्रोत्साहन देने की धटना की निंदा करते हैं। ये घिनौनी हरकतें लोगों की जान जोखिम में डाल रही हैं। हम पोलैंड के साथ-साथ लिथुआनिया और लातविया के साथ एकजुट हैं, जिन्हें हाइब्रिड हथियार के रूप में अवैध प्रवास को प्रोत्साहित किया गया है। इस वक्तव्य की प्रतिक्रिया में रूस ने बेलारूस को हरसंभव सहायता प्रदान करने की घोषणा की है।
जो भी हो महाशक्तियों और वैश्विक संस्थाओं  को शीघ्र इस संकट का हल निकालने के ठोस प्रयास करने चाहिए, क्योंकि पीड़ित हमेशा आम लोग ही होते हैं जिन्हें सत्ता निर्मित संकटों और तनावों व युद्ध-केंद्रित अर्थव्यवस्थाओं का खामियाजा बतौर मुफलिसी भुगतना पड़ता है, जबकि उनका शासन-सत्ता से कोई सीधा सरोकार भी नहीं होता है। ऐसी स्थितियों में महाशक्तियों और वैश्विक संस्थाओं को इस संकट को जल्द से जल्द हल करने के लिए ठोस प्रयास करने चाहिए, क्योंकि द्वि- ध्रुवीकृत दुनिया हमेशा सर्वनाश को जन्म देती है, जो मानवता के लिए एक अपूरणीय क्षति है।       

        -डॉ. सुरेश यादव
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार

मई माह में तानाशाह लुकाशेंको ने यूनान से
लिथुआनिया जा रही रयान एयर के विमान को हाईजैक करवाते हुए निर्वासित बेलारूसी युवा विसल ब्लोअर, ब्लॉगर और पत्रकार रोमन प्रोताशेविच को बेलारूस में अशांति और दंगे भड़काने के जुर्म में उसकी रूसी महिला मित्र सोफिया सपेगा के साथ गिरफ्तार करवा दिया था।

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