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Friday 22nd of October 2021
 
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विकास और सद्भाव में क्यों राजनीति

हम ज्ञान-विज्ञान की चक्की में कुछ इस तरह पिस रहे हैं कि शासन का राजपथ तो अहंकार से गरज रहा है, लेकिन जनपथ की जनता तमाशबीन हो गई है।

13/02/2020

कर्नाटक: बार-बार इस्लामिक नारे

उत्तर कर्नाटक के तटीय जिले मंगलुरु में एक छोटा सा शहर है भटकल। इसे मिनी दुबई भी कहा जाता है। राज्य में जब भी कोई कट्टरपंथी इस्लामिक घटना होती है तो पुलिस और ख़ुफिया एजेंसियों की नजर सबसे पहले इस इलाके या यों कहिए इस शहर की ओर जाती है। इसका कारण यह है कि देश के सबसे पहले इस्लामिक आतंकवादी संगठन इंडियन मुजाहीद्दीन के सह-संस्थापक अहमद सिद्दिबापा उर्फ यासीन भटकल इसी जगह का ही रहने वाला है।

07/12/2020

जानिए राजकाज में क्या है खास?

सूबे में इन दिनों अपर क्लास वाले लोगों की नजरें पूर्व दिशा की तरफ टिकी हैं। टिके भी क्यों नहीं, दोनों दलों में जो भी कुछ हो रहा है, उसी दिशा के पानी का कमाल है। हाथ वाले दल में सपोटरा और दौसा वाले मिनेश वंशज भाईसाहबों ने जब से दुबारा जुबान खोली है, तभी से अगुणी दिशा के ठाले बैठे पंडितों को भी काम मिल गया, सो उन्होंने भी कुंडलियां देखना शुरू कर दिया है।

16/03/2021

जानिए राजकाज में क्या है खास?

सूबे में हाथ वाले भाई लोगों में अनुशासनहीनता को लेकर चर्चा जोरों पर है। हो भी क्यों नहीं, मामला अनुशासन और अनुशासनहीनता से ताल्लुकात जो रखता है। जब भी केबिनेट रिशफलिंग की सुगाबुगाहट शुरू होती है, तो इंदिरा गांधी भवन में बने हाथ वालों के ठिकाने पर अनुशासनहीनता वालों की लंबी चौड़ी लिस्ट बनने लगती है। इस बार की सूची वैसे तो जगजाहिर है, लेकिन वर्कर्स ने उसमें कुछ और नाम जोड़ दिए।

18/01/2021

ई-प्रशासन की देश के विकास में अहम भूमिका

आज सम्पूर्ण विश्व में ‘वैश्वीकरण, उदारीकरण व निजीकरण’ की लहर दौड़ रही है।

06/10/2021

जानिए राजकाज में क्या है खास?

आज हम बात करेंगे देवदर्शनों की। जब भी किसी पर आपदा आती है, तो अपने देवों के देवरे ढोकते हैं, वे न रात देखते और न ही दिन। कई देवों के घोड़ले तो रातीजगा कराने में भी कोई कसर नहीं छोड़ते। सूबे में चुनावी जंग तो पौने तीन साल बाद होगी, मगर नंबर वन की कुर्सी के लिए के भगवा वाले भाई लोगों में ऐसा कलह मचा है कि उनको भी देवदर्शनों की शरण लेनी पड़ रही है।

08/03/2021

महिलाओं के लिए घटते श्रम के अवसर

भारत सरकार द्वारा समय-समय पर श्रमिकों का सर्वेक्षण कराया जाता है। 2018 के सर्वेक्षण में पाया गया की केवल 23 प्रतिशत महिलाएं ही कार्यरत हैं। इससे पूर्व यह संख्या अधिक थी। 2012 में 31 प्रतिशत एवं 2005 में 43 प्रतिशत महिलाएं कार्यरत थीं।

10/09/2019