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ओपिनियन

मोदी के संदेश के मायने

Friday, December 27, 2019 11:55 AM
नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)

दिल्ली के रामलीला मैदान से प्रधानमंत्री मोदी ने एनआरसी, सीएए को लेकर विपक्ष (कांग्रेस) पर जमकर निशाना साधा। गौरतलब हो कि कांग्रेस सीएए को लेकर लोगों में भ्रम फैला रही है, विशेषकर देश के मुसलमानों में। न जाने क्यों कांग्रेस देश के मुसलमानों का मसीहा बनने की कोशिश कर रही है। देश के मुसलमान भी कांग्रेसी नेताओं के बहकावे में आकर देश में हिंसक प्रदर्शन, तोड़-फोड़ कर रहे हैं। जबकि सीएए उनकी स्थाई नागरिकता को और मजबूत करेगा, किसी तरह का अवरोध उत्पन्न नहीं करेगा। यदि कांग्रेस को सीएए अधिनियम से इतना ही डर है और देश के मुसलमानों की फिक्र है तो उसने दस साल के कार्यकाल में एनआरसी की भ्रांतियों को दूर क्यों नहीं किया? हिंसक विरोध का क्या औचित्य? विरोध के और भी तरीके हैं, सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाकर आखिर कांग्रेस क्या सिद्ध करना चाहती है कि वह मुसलमानों की हितू है? क्या लोग संप्रग 1-2 के कार्यकाल को भूल गए हैं? घोटाले की जननी के रूप में पहचान पाई कांग्रेस अब अपने वजूद को बचाने के लिए भी संघर्षरत है। आज भले ही उसे सीएए और एनआरसी ने भीड़ के रूप में संजीवनी देने का काम किया हो लेकिन ये भीड़ क्षणिक है।

कांग्रेस की यह नकारात्मक राजनीति उसे अपने वास्तविक लक्ष्य से कोषों दूर ले जा रही है। अपने वजूद को कांग्रेस खुद समाप्त करने पर तुली हुई है। जैसे वह एनआरसी, सीएए को लेकर देश के विरोध प्रदर्शन में घी डाल रही है, लोग उसके बहकावे और भ्रम में आते जा रहे हैं, वैसे ही उसके कार्यकर्ता, प्रमुख नेता उसे बहकाने में लगे हुए हैं। वामपंथियों, कांग्रेसियों को छोड़कर कोई भी बुद्धिजीवी सीएए, एनआरसी का विरोध नहीं कर रहा है। बुद्धिजीवी लेखक, विचारक मुसलमानों को सीएए की बारीकियां बता रहे हैं, फिर भी वे मोदी जी की लोकप्रियता, ईमानदार छवि से न जाने क्यों खार खाये हुए हैं। अपने सम्बोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश का सम्मान कीजिए, लोकसभा, राज्य सभा का सम्मान कीजिए, संविधान का सम्मान कीजिए लेकिन देश में आगजनी और हिंसा न फैलाइए। देश आपका है। जाति-धर्म की राजनीति करने वालों की उन ने जमकर खबर ली। उन्होंने भावभरे सम्बोधन में कहा है कि अगर जलाना है तो मेरे पुतले जलाओ लेकिन देश की संपत्ति मत जलाओ।

सीएए (नागरिकता संशोधन कानून) को समझाते हुए उन्होंने कहा कि ये कानून देश में रह रहे स्थाई नागरिकों के लिए नहीं है, चाहे वो हिन्दू हैं या मुसलमान। आगे उन्होंने कहा है कि अफगानिस्तान, बांग्लादेश, पाकिस्तान से आए सालों से प्रताड़ित हो रहे हिन्दू शरणार्थियों के लिए ये अधिनियम है। सालों से देश पर बोझ बन रहे घुसपैठियों की भी उन्होंने जमकर खबर ली। टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी पर भी उन्होंने जमकर हल्ला बोला। बता दें कि  मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एनआरसी बंगाल में लागू नहीं होने दे रही हैं, सीएए को लेकर केंद्र सरकार के फैसले को उन्होंने यूएन में जनमत संग्रह की बात कही थी। जिस एनआरसी, सीएए को लेकर आज हो-हल्ला मच रहा है, विशेषकर बंगाल और असम में। यही ममता बनर्जी 1999 में अटल सरकार में एनआरसी का समर्थन कर रही थी और आज उसके पक्ष में वोट बैंक की राजनीति के कारण जनता को बरगलाने में लगी हैं। वह समझती हैं कि जनता को बरगला कर, धरना-प्रदर्शन करके कानून को लागू होने से रोक पाएंगी, तो यह उनकी गलत फहमी है। ऐसा इसलिए क्योंकि मोदी सरकार पूर्ण बहुमत में हैं और देशहित में निर्णय लेने के लिए जानी जाती है। वह किसी के समर्थन की मुंहताज नहीं है।

खाड़ी देश से संबंधों पर भी उन्होंने प्रकाश डाला और कहा कि मुस्लिम देश भारत का समर्थन कर रहे हैं चाहे आतंकवाद हो, नक्सलवाद हो वो हमारे साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने के लिए तैयार हैं। पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर भी उन्होंने जमकर हमला बोला। उन्होंने उज्जवला, सौभाग्य योजना की भी विस्तार से चर्चा की। जाति-धर्म की राजनीति करने वालों की जमकर खबर ली। दो महीने बाद दिल्ली में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं इसको देखते हुए उन्होंने आम आदमी पार्टी पर भी हमला बोला। जब देश का प्रधानमंत्री एनआरसी, सीएए को लेकर स्पष्टीकरण दे रहा है फिर भी देश के मुसलमान वामपंथियों, कांग्रेसियों, समाजवादी पार्टी, बसपा के बहकावे में आकर देश में अराजकता की स्थिति उत्पन्न कर रहे हैं। वर्षों बाद देश को नरेंद्र मोदी जैसा ईमानदार छवि वाला प्रधानमंत्री मिला है लेकिन देश को रसातल में ले जाने वाले कांग्रेसी, वामपंथी नेता उनके कार्य में अवरोध उत्पन्न कर रहे हैं। विपक्षी उनसे खार इसलिए खाये हुए हैं क्योंकि वे अच्छी तरह जान रहे हैं कि भाजपा आने वाले सालों में इन देश हित कार्यों के माध्यम से अपना मार्ग प्रशस्त करती जा रही है।

15 अगस्त को लाल किले से दिये भाषण को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि प्रकृति की रक्षा करना हमारी संस्कृति का हिस्सा रहा है। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि प्लास्टिक को ना कहने का समय आ गया है। जल संरक्षण, जनसंख्या नियंत्रण की बात, जनता से संवाद करके यह संदेश दिया कि आने वाले समय में यदि हम सावधान नहीं हुए तो देश को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। जनसंख्या नियंत्रण, जल संरक्षण ये भारत की ऐसी समस्या है जिसे नियंत्रित करना अति आवश्यक है, जल संरक्षण पर यदि हम ध्यान नहीं दिए तो आने वाली पीढ़ियां बूंद-बूंद पानी के लिए तरस जाएंगी।
रमेश चन्द्र त्रिपाठी (ये लेखक के अपने विचार हैं)

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