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जानिए, राजकाज में क्या है खास?

Monday, March 02, 2020 10:55 AM
जानिए, राजकाज में क्या है खास?

ऊंघते मंत्री, सुस्ताते एमएलए
आज हम बात करेंगे सदन में ऊंघने वाले मंत्रियों और सुस्ताने वाले विधायकों की। इनको लेकर फ्लोर पर कई बार राज की किरकिरी भी हुई, मगर उनके कोई असर नहीं पड़ा। बेचारे चीफ व्हिप ने उनकी परफोरमेंस सुधारने के लिए टोने-टोटके भी किए, मगर पार नहीं पड़ी। फोर्थ लाइन में बैठने वाले भाई लोग सुस्ताए तो कोई खास बात नहीं, लेकिन फ्रन्ट लाइन से थर्ड लाइन वाले राज के रत्न ऊंघे, तो मामला सीरियस हो जाता है। राज का काज करने वालों में चर्चा है कि यह सब जानबूझकर किया जा रहा है, चूंकि हाथ वालों में इन दिनों सबकुछ ठीक नहीं चल रहा। दो धड़ों में बंटे हाथ वाले भाई लोगों ने तय कर रखा है कि फ्रंट लाइनें वाले ऊंघेंगे, तो फोर्थ लाइन वाले भी सुस्ताएंगे।

चिन्ता में राज का रत्न
राज के एक रत्न के चौघड़िये इन दिनों ठीक नहीं हैं। पंडितों को हाथ की रेखाएं भी खूब दिखाई, मगर चौघड़िया ठीक होने का नाम ही नहीं लेता। अब देखो ना पांच दिन पहले फर्जी कॉल सेन्टर के चक्कर में खाकी वालों के हत्थे चढ़े खून के एक रिश्तेदार की वजह से उनको वो सब कुछ करना पड़ा, जो कभी भी सपने में नहीं सोचा था। फिलहाल ऊपर से नीचे तक हाथा-जोड़ी कर मामले को तो निपटा लिया, मगर चौघड़िया ठीक करने में कामयाब नहीं हो पाए। अब उनको कौन समझाए कि जब शनि की दशा आती है, तो सबसे पहले पालतू भैंस ही सींग मारती है या फिर अपनी ही छान से आंख फूटती है। अब चौघड़िया ठीक करना है, तो शनि को तेल तो चढ़ाना ही पड़ेगा।

आड़ फेफड़ों के दम की
जब से उदयपुर वाले भाईसाहब ने फेफड़ों के दम को लेकर छाती ठोकी है, तब से सामने वालों की नींद उड़ी हुई है। उनके समझ में नहीं आ रहा कि 75 वां बसंत देख चुके गुलाबजी के इस चैलेंज के पीछे इशारा किस तरफ है। अपने से एक साल बड़े शांति से बैठने वाले कोटा वाले भाईसाहब को भरी पंचायत में ललकारा तो 69 साल के नाथद्वारा वाले जोशी जी अपने फेफड़ों को टटोले बिना नहीं रहे। अब सूबे के पंचों को कौन समझाए कि गुलाबजी का इशारा तो कहीं ओर था, जिनको मैसेज देना था, उसमें शांति जी की आड़ लेकर देने में कामयाब हो गए। चर्चा है कि गुलाबजी को अपने फेफड़ों के बजाय घुटनों का दम पर ज्यादा भरोसा है।

साहब का दर्द
गुजरे जमाने में पीएचक्यू में झण्डे के नीचे बैठ चुके भाईसाहब ने सूबे की सबसे बड़ी पंचायत में अपना दर्द बयां क्या कर दिया, राज का काज करने वाले कई साहब लोगों को खुसरफुसर करने का मौका मिल गया। दर्द बयां करने वाले साहब भी कोई छोटे-मोटे नहीं, बल्कि दिल्ली दरबार में कमल की सुगंध सूंघने के बाद अब सूबे के राज में हाथ से हाथ मिला रखा है। खाकी वाले साहब लोगों में चर्चा है कि देवली-उनियारा से नुमाइंदी करने वाले हरीश जी ने अपनी ही पार्टी के राज का इकबाल खत्म होने की बात कहकर अपना दर्द तो बयां कर दिया, मगर इसके लिए जिम्मेदारों की लिस्ट भी बता देते, तो सारा सच सामने आ जाता। चूंकि राज के इकबाल के खात्मे के बारे में उनसे ज्यादा कोई नहीं जानता।

सांसें ऊपर-नीचे
ठाले बैठे कमल वाले भाई लोग भी खुरापाती की प्रेक्टिस में इतना ट्रेंड हो गए कि अपने बॉस तक को पीछे छोड़ दिया। बॉस ने तीन सप्ताह पहले कइयों की सांसों को ऊपर-नीचे किया, तो कारिन्दों ने भी शुक्र को नहले पर दहला मार दिया। सरदार पटेल मार्ग स्थित बंगला नंबर 51 में बने भगवा वालों के ठिकाने में रोजाना इधर-उधर की सूंघासांघी करने वाले कुछ भाइयों ने वाट्सएप पर अपने अपने ग्रुप बना रखे हैं। एक गु्रप के एडमिन ने शुक्र को अपना स्टेट्स अपडेट किया, तो कइयों की धड़कनें तेज हो गई। बेचैनी से कुछ तो पसीने से तरबतर हो गए। उनकी सांसें तेज होना भी लाजमी था, चूंकि भाईसाहब ने बीस पदाधिकारियों की छुट्टी होने के संकेत जो दे दिए। पूनिया जी की टेढ़ी नजरों का असर तो कुछ दिनों बाद में दिखेगा, मगर फिलहाल खुरापातियों ने मजे जरूर ले लिए।
(यह लेखक के अपने विचार हैं)

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