Dainik Navajyoti Logo
Wednesday 12th of August 2020
 
ओपिनियन

यूरोप में बढ़ता इस्लामीकरण

Friday, November 29, 2019 11:00 AM
प्रदर्शन करते लोग

यूरोप के बढ़ते इस्लामीकरण अब एक विस्फोटक राजनीतिक प्रश्न बन गया है और इस प्रश्न ने यूरोप की बहुलतावादी संस्कृति और उदारतावाद को लेकर एक नहीं बल्कि अनेकानेक आशंकाएं और चिंताएं खड़ी कर दी हैं। संकेत बडे ही विस्फोटक है, घृणात्मक है, अमानवीय है और भविष्य के प्रति असहिष्णुता प्रदर्शित करता है। जब इस्लामिक करण को लेकर यूरोप की मुस्लिम आबादी खतरनाक तौर अपनी भूमिका सक्रिय रखेगी और यूरोप की मूल आबादी अपनी संस्कृति के प्रति सहिष्णुता प्रकट करते हुए प्रतिक्रिया में हिंसक होगी, तकरार और राजनीतिक बवाल खड़ा करेगी तो फिर यूरोप राजनीति, कूटनीति और अर्थव्यवस्था की स्थिति कितनी अराजक होगी, कितनी हिंसक होगी, इसकी उम्मीद की जा सकती है।

यूरोप के सिर्फ  एकाद देश ही नहीं बल्कि कई देश इस्लामीकरण के चपेट में खडे हैं और यूरोप की पुरातन संस्कृति खतरे में पड़ी हुई है। यूरोप ने विगत में दो-दो विश्व युद्धों का सामना किया है, यूरोप के लाखों लोग दोनों विश्व युद्धों में मारे गए थे। दो विश्व युद्धों का सबक लेकर यूरोप ने शांति का वातावरण कायम रखने की बड़ी कोशिश की थी। यूरोप में लोकतंत्र सक्रिय रहा, शांति और सदभाव भी विकसित हुआ। धार्मिक आधार पर भी यूरोप सहिष्णुता ही प्रदर्शित करता रहा है। धार्मिक आधार पर भेदभाव यूरोप में नीचले क्रम पर ही रहा।

मुस्लिम देशों और अफ्रीका से पलायन कर गई आबादी को यूरोप में पलने-फूलने का अवसर दिया गया, उन्हें लोकतांत्रिक अधिकार प्रदान किए गए। इसका सुखद परिणाम यह हुआ कि मुस्लिम देशों और अफ्रीका से गई आबादी भी गोरी आबादी के सामने खड़ी हो गई, उनकी समृद्धि भी उल्लेखनीय हो गई, उनकी आबादी भी लोकतंत्र को प्रभावित करने की शक्ति हासिल करने लगी। स्थिति विस्फोटक तो तब हो गई जब मुस्लिम आतंकवादी संगठन एक साजिश के तहत मुस्लिम आबादी को शरणार्थी के तौर पर यूरोप में घुसाने और यूरोप के लोकतंत्र पर कब्जा करने के लिए सक्रिय हो गए। आज पूरा यूरोप मुस्लिम आतंकवाद और इस्लामीकरण की आग में जल रहा है।

वर्तमान में विस्फोटक स्थिति नार्वे में खड़ी हुई है, नार्वे की विस्फोटक स्थिति ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है, पूरी दुनिया नार्वे की स्थिति को लेकर चिंतित हुई है और नार्वे की घटना का यथार्थ खोजा जा रहा है और यह चिंता व्यक्त की जा रही है कि नार्वे की विस्फोटक घटना की पुनरावृति ने केवल नार्वे में फिर से हो सकती है बल्कि इसकी आग यूरोप के अन्य देशों तक पहुंच सकती है। समय-समय पर नार्वे जैसी स्थिति फ्रांस में भी हुई है, इटली में भी हुई है, जर्मनी में भी हुई है और मुस्लिम शरणार्थियो को लेकर नई-नई विस्फोटक, खतरनाक और घृणात्मक सोच विकसित हो रही है जो किसी भी तरह शांति व सदभाव के लिए सकारात्मक नहीं माना जा सकता है। अब यहां यह प्रश्न उठता है कि नार्वे की घटना किस प्रकार से विस्फोटक है, नार्वे की घटना क्या है, नार्वे की घटना को लेकर मुस्लिम देशों की गोलबंदी के यथार्थ क्या है, नार्वे की घटना को लेकर मुस्लिम देशों की गोलबंदी को क्या इस्लामीकरण की पक्षधर नीति मानी जानी चाहिए, पाकिस्तान जैसे असफल और मुस्लिम आतंकवाद की शरण स्थली बना पाकिस्तान नार्वे के विवाद में क्यों कूदा, क्या पाकिस्तान इस विवाद में कूदकर मुस्लिम आतंकवाद, मुस्लिम अतिवाद को बढ़ावा दे रहा है?

नार्वे में अभी ‘स्टॉप इस्लामीकरण ऑफ नार्वे’ नामक अभियान और आंदोलन गंभीर रूप से सक्रिय है, यह अभियान और आंदोलन धीरे-धीरे हिंसक हो रहा है और असहिष्णुता को प्रदर्शित कर रहे हैं। नार्वे की स्थिति तो उस समय विस्फोटक हो गई जब नार्वे के एक शहर में कुरान जलाने  की अप्रिय और असहिष्णु घटना घटी। स्टॉप इस्लामीकरण आॅफ नार्वे अभियान के नेता लार्स थार्सन ने कृश्चयनस्टेंड शहर में सैकडों प्रदर्शनकारियों के सामने कुरान जलाने जैसी अप्रिय घटना को अंजाम दे दिया। कुरान जलाने की घटना के खिलाफ  नार्वे की मुस्लिम आबादी भी सक्रिय हो गई। हम सबों को मालूम है कि मुस्लिम आबादी के लिए कुरान का महत्व कितना है। कुरान का अपमान मुस्लिम आबादी किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं करती हैं। दुनिया में जिसने भी कुरान का अपमान किया या फिर इस्लाम के प्रेरक पुरूषों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां की, उसकी बर्बरता से हत्या कर दी गई। इतिहास में दर्ज घटना के अनुसार इस्लाम पर आधारित कार्टून छापने वाली पत्रिका के पत्रकारों को मार डाला गया, अभी-अभी भारत में घटी एक घटना को भी संज्ञान में लिया जा सकता है। लखनउ के हिन्दू नेता कमलेश तिवारी ने विवादित टिप्पणी की थी, उस टिप्पणी को लेकर तत्कालीन अखिलेश यादव की सरकार ने कमलेश तिवारी को रासुका लगा कर जेलों में डाल दिया था। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में बर्बरता पूर्ण ढंग से कमलेश तिवारी की हत्या हो गई, हत्या तालिबानी और आईएस की शैली में हुई थी। कुरान का अपमान करने वाले लार्स थार्सन के खिलाफ  भी पूरी दुनिया की मुस्लिम आबादी खड़ी हो गई है।  -विष्णुगुप्त (ये लेखक के अपने विचार हैं)

यह भी पढ़ें:

राजस्थान में बिजली महंगी

विकास के नाम पर प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि के आकड़े दर्शाए जाते हैं, लेकिन इसकी तुलना इस बात से भी की जानी चाहिए कि पूर्व जीवन स्तर को ही अर्जित करने में लागत में कितनी बढ़ोत्तरी हुई है।

04/03/2020

न्यायिक प्रक्रिया में संस्थागत मध्यस्थता

राष्ट्रीय न्यायिक डाटा ग्रीड के आंकडों के अनुसार 3 करोड़ 14 लाख न्यायिक प्रकरण देश की निचली एवं जिला अदालतों में ही लंबित चल रहे हैं।

15/02/2020

एक साथ चुनाव देश हित में

निस्संदेह, एक साथ चुनाव को लेकर दो मत हैं, लेकिन विरोधियों का तर्क कल्पनाओं पर ज्यादा आधारित है। वे मानते हैं कि भाजपा अपने लोकप्रिय कार्यक्रमों का लाभ उठाकर मतदाताओं को प्रभावित करने में सफल होगी तथा लोकसभा के साथ विधानसभाओं और स्थानीय निकायों में भी सफलता पा लेगी।

02/07/2019

जानिए, राजकाज में क्या है खास?

भगवा वाले भाई लोगों का भी कोई जवाब नहीं। जब मन में आए तब ही हर किसी को उपमा दे देते हैं। वे न आगा सोचते है नहीं पीछा। सरदार पटेल मार्ग स्थित बंगला नंबर 51 में बने भगवा वाले के ठिकाने पर दांयी तरफ बने एक कमरे में बैठने वाले भाई लोग सिर्फ उपमा देने का ही काम करते हैं।

25/11/2019

यह थी दीये और तूफान की लड़ाई

दिल्ली देश की राजधानी, यहां हुए विधानसभा के चुनाव पर पूरे देश की नजरें टिकीं थीं और हो भी क्यों न, यहां मुकाबला एक दीये और तूफान के बीच जो था।

12/02/2020

केरल के वायनाड से राहुल गांधी

दक्षिण राज्यों के राजनीतिक हलकों में यह बहस जोरों से चला रही है कि आखिर राहुल गांधी ने दूसरी सीट के रूप में वायनाड को ही क्यों चुना।

08/04/2019

भयावह आतंकी हमले से उपजे सवाल

गत रविवार को श्रीलंका में एक प्रसिद्ध चर्च में आतंकवादियों ने हमला कर 300 से अधिक लोगों को मौत के घाट उतार दिया। इस हमले में 1000 से अधिक लोग घायल हैं

27/04/2019