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Wednesday 1st of April 2020
 
ओपिनियन

राष्ट्रपति ट्रंप की पहली भारत यात्रा

Friday, February 21, 2020 10:30 AM
डोनाल्ड ट्रंप (फाइल फोटो)

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आगामी दो दिवसीय भारतीय यात्रा से पूर्व ऐसे ही विवाद हो रहे हैं। भारत के लोगों के साथ सबसे बड़ी समस्या ये है कि वे अपनी बुद्धि व विवेक से बहुत कम सोचते-समझते हैं। उन्हें जिस भी विषय के संबंध में जैसा अनुचित सार बताया जाता है। वह उसे पत्थर की लकीर समझ उसी पर चिंतन-मनन करने लगते हैं। इसके विपरीत भारत के बुद्धिजीवी और बुद्धिजीवियों के कहे अनुसार चलने वाले साधारण लोग ये नहीं सोचते कि अमेरिका के संदर्भ में जो नकारात्मक वक्तव्य दिए जा रहे हैं। जब हमारे राष्ट्र के एक बड़े बौद्धिक तथा साधारण जनसमुदाय द्वारा बार-बार ये कहा जाता है कि अमेरिका एक स्वार्थी राष्ट्र है और उसकी हमसे या किसी दूसरे राष्ट्र से मित्रता का आधार केवल उसका व्यापारिक व कूटनीतिक लाभ है, तो कहने वाले ये भूल जाते हैं कि आधुनिक व्यवस्था में उन्नति करने के लिए प्राय: हरेक शक्ति संपन्न राष्ट्र ऐसी ही नीतियों पर चलता है। यदि अमेरिका ने इन नीतियों का अनुगमन नहीं किया होता तो क्या आज वह शक्तिशाली राष्ट्र होता, जो विकासशील और अविकसित देश हैं। वह ईर्ष्यावश ऐसा कहते ही रहते हैं कि अमेरिका ने अपने स्वार्थ के कारण विश्व के अनेक देशों को व्यापक हानि पहुंचाई है, लेकिन ऐसे देशों से ये पूछा जाना चाहिए कि क्या अमेरिका ने विश्व के जीवन-संचालन के संबंध में जो भी हस्तक्षेप किए हैं। वह अकेले अपनी सहमति से ही किए हैं क्या। क्या इन हस्तक्षेपों के संदर्भ में जो समझौते हुए उनकी शर्तों में विकासशील और अविकसित देशों के स्वहित, स्वार्थ नहीं थे। हमारे देश के लोग जब अमेरिका के बारे में ऐसी अव्यावहारिक बातें करते हैं, तो वह यह भी भूल जाते हैं अमेरिका से जो शिकायतें हमें थीं, उनके लिए हमारी पूर्ववर्ती केन्द्र सरकारें भी तो उत्तरदायी हैं। हमारी पहले की सरकारों ने अमेरिका के साथ विभिन्न क्षेत्रों में जो भी समझौते किए, क्या हमारी ओर से उनका शत-प्रतिशत अनुपालन किया गया। यदि अमेरिका पर भारत का अहित करने का दोषारोपण होता रहा है, तो ये समझ लिया जाना चाहिए कि इसके लिए अमेरिका ही नहीं भारत भी समान रूप में उत्तरदायी रहा है।

अमेरिकी राष्टपति डोनाल्ड ट्रंप की आगामी दो दिवसीय भारतीय यात्रा से पूर्व ऐसे ही विवाद हो रहे हैं। भारत के लोगों के साथ सबसे बड़ी समस्या ये है कि वे अपनी बुद्धि व विवेक से बहुत कम सोचते-समझते हैं। उन्हें जिस भी विषय के संबंध में जैसा अनुचित सार बताया जाता है, वे उसे पत्थर की लकीर समझ उसी पर चिंतन-मनन करने लगते हैं। इसके विपरीत भारत के बुद्धिजीवी और बुद्धिजीवियों के कहे अनुसार चलने वाले साधारण लोग ये नहीं सोचते कि अमेरिका के संदर्भ में जो नकारात्मक वक्तव्य दिए जा रहे हैं, वे अमेरिका की पूर्ववर्ती कांग्रेसी सरकारों के राजनीतिक, कूटनीतिक चाल-चलन के अनुरूप तो कुछ हद तक उचित प्रतीत होते हैं, लेकिन 2016 के बाद अमेरिका के राजनीतिक पटल पर कांग्रेस को हटा उभरे नए राजनीतिक दृष्टिकोण को देखते हुए ऐसे वक्तव्य अमेरिका के लिए अनुचित हैं। अब अमेरिका ट्रंप के नेतृत्व में राजनीतियों, कूटनीतियों और व्यापार नीतियों की परंपरागत रूढ़ियों को तोड़ रहा है। और जब रूढ़ियों को तोड़ नव नीतियों के साथ देश-विदेश में राजनीति होती है तो परिवर्तन की बाधाएं उत्पन्न होती ही हैं। इन्हीं अस्थायी बाधाओं के कारण अमेरिका और उसके वर्तमान नेतृत्व के संबंध में नकारात्मक और संबंध तोड़ने वाले वक्तव्य देना न तो भारत व अमेरिका और न ही दुनिया के हित में है।

2014 में मोदी के प्रधानमंत्री बनते ही भारतीय राजनीति में जिन कार्यकारी बिंदुओं पर सर्वाधिक ध्यान लगाया है, उनमें से एक है विदेशी नीति। तब से भारतीय विदेश नीति सर्वथा एक नए मार्ग पर चल रही है। इस प्रयास से भारत को अनेक लाभ मिले। आज 370, 35ए की समाप्ति से लेकर राम मंदिर, सीएए तक जितने भी क्रांतिकारी निर्णय केन्द्र सरकार ने लिए हैं, उनमें हमारी विदेशी नीति का सहयोग अभूतपूर्व है। संभवत: इसी नीति की सफलता को अनुभव कर भारतीय मतदाताओं ने भाजपा को लगातार दूसरी बार लोकसभा चुनाव में बहुमत वाला जनादेश दिया। अमेरिकी सत्ता भी मोदी सरकार की वापसी पर हर्ष में थी। विगत वर्ष सितंबर में अमेरिका में मोदी के स्वागत में हाउडी मोदी नामक कार्यक्रम हुआ था। उस कार्यक्रम के मंच पर ट्रंप और मोदी के बीच व्यक्तिगत संबंधों की सरलता-सहजता देखने योग्य थी। उसी शैली में ट्रंप की भारत यात्रा को अविस्मरणीय बनाने के लिए प्रधानमंत्री के गृह प्रदेश गुजरात में नमस्ते ट्रंप नामक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम गुजरात के मोटेरा क्रिकेट मैदान में होगा, जिसमें लगभग एक लाख लोग दो राष्ट्राध्यक्षों के बीच पनपने वाली मैत्री के आधार पर भारत- अमेरिका के भावी संबंधों का अनुमान लगाएंगे। भारत के लिए सन् 2020 की बड़ी घटना है ट्रंप की भारत यात्रा। हालांकि मोदी ने अमेरिका में ट्रंप से एकाधिक और दूसरे अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर कई भेंटें की हैं, लेकिन भारत में दोनों नेताओं की यह पहली भेंट है, जो अविस्मरणीय होने साथ-साथ दोनों देशों के राजनीतिक, आर्थिक, व्यापारिक संबंधों को तो एक नया आयाम देगी ही। इसके अलावे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न देशों में राजनीतिक शक्ति प्राप्त कर सत्तारूढ़ होने के लिए राष्ट्रीय स्वायत्तताओं और अस्मिताओं को दांव पर रख क्षुद्र राजनीतिकरण का जो प्रचलन बना हुआ है, उसे तोड़ने के लिए भी मोदी-ट्रंप की ये भेंट कुछ न कुछ शिक्षा तो अवश्य देगी। सत्तारूढ़ होने के बाद डोनाल्ड  ट्रंप ने 24 देशों की यात्राएं की हैं। इनमें अफगानिस्तान, अर्जेंटीना, कनाडा, चीन, फिनलैंड, इराक, इजरायल, उत्तरी कोरिया, फिलीपीन्स, पोलैंड, सऊदी अरब, सिंगापुर, वेटिकन सिटी, वेस्ट बैंक की एक-एक तो बेल्जियम, जर्मनी, आयरलैंड, इटली, दक्षिण कोरिया, स्विटजरलैंड और वियतनाम की दो-दो तथा जापान और ब्रिटेन की तीन-तीन यात्राएं सम्मिलित हैं।  

- विकेश कुमार बडोला
(ये लेखक के अपने विचार हैं)


 

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