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Friday 22nd of October 2021
 
ओपिनियन

ई-प्रशासन की देश के विकास में अहम भूमिका

Wednesday, October 06, 2021 14:20 PM
कॉन्सेप्ट फोटो

आज सम्पूर्ण विश्व में ‘वैश्वीकरण, उदारीकरण व निजीकरण’ की लहर दौड़ रही है। इस युग में संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी का महत्व ‘दिन दूनी राज चौगुनी’ की गति से बढ़ रहा है। इस क्षेत्र की तीव्र प्रगति का व्यापक प्रचार-प्रसार के कारण ही ‘सूचना प्रौद्योगिकी’ ने क्रांति का रूप धारण कर लिया है। यही नहीं, सूचना-प्रौद्योगिकी की इस क्रांति के कारण आज सम्पूर्ण विश्व एक गांव के रूप में परिवर्तित हो गया है। सूचना प्रौद्योगिकी के बदौलत ही व्यक्ति पलक झपकते ही सारी दुनिया से सम्पर्क स्थापित कर सकता है, घर बैठे ही विश्व के किसी भी कोने से आवश्यक जानकारी, सूचना का आदान-प्रदान व परामर्श अविलम्ब हासिल कर सकता है। सूचना प्रौद्योगिकी वर्तमान में मानव जीवन का एक अहम व अभिन्न हिस्सा बन चुका है। जिसके बिना विकास की कल्पना को साकार करना संभव नहीं है।विश्व बैंक ने अच्छे प्रशासन के अन्तर्गत राजनीतिक उत्तरदायित्व, जन सहभागिता, न्याय पालिका की स्वतंत्रता व विधि का शासन, प्रशासन की उत्तरदायित्वता, पारदर्शिता व खुलापन, सूचना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एवं दक्ष व प्रभावशाली प्रशासनिक प्रणाली को समावेषित किया है। निसंदेह रूप से परिवर्तित परिस्थितियों में पुरातन प्रशासन की अपेक्षा ई-प्रशासन के माध्यम से ही अच्छे प्रशासन की तरफ कदम बढ़ाना संभव है। ई-प्रशासन में दक्षता, वैधता व विश्वसनीयता को जनित करने के लिए शासन के नए मूल्यों पर जोर दिया गया है। जवाबदेह, ईमानदार व कुशल सरकार, पारदर्शिता, पूर्वानुमान एवं खुलापन ई-प्रशासन के मूलभूत घटक हैं। ई-प्रशासन की मूल दृष्टि आम आदमी को बुनियादी आवश्यकताएं वहनीय एवं लागत प्रभावी ढंग से दक्षता, पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता के साथ उपलब्ध कराना है तथा सभी सरकारी सेवाओं तक आम आदमी की पहुंच सुनिश्चित करना’ है।ज्ञातव्य है कि भारत ने सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में काफी प्रगति की है जिसके कारण ही विश्व के संचार क्षेत्र में देश का पांचवां स्थान दर्ज किया गया हैं। सूचना क्रांति के इस युग में देश में कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, चिकित्सा व यातायात आदि में सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं ई-प्रशासन के जरिए देश की परिस्थितिकी, आवश्यकता एवं सहभागिता को मालूम करके तदनुरूप योजनाओं में आवश्यक परिवर्तन व संशोधन किया जाना संभव है। ई-प्रशासन की वजह से देश से संबंधित विविध आंकड़े सहज व शीघ्रता से उपलब्ध होने के कारण नीति निर्माण, नियोजन व अनुसंधान के क्षेत्र में अपेक्षित सफलता हासिल करना संभव है। यही नहीं, देश में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 लागू होने से विभिन्न विभागों, योजनाओं आदि से संबंधित जानकारी सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से सरलता से प्राप्त की जा सकती है तथा इस व्यवस्था पर अंकुश लगाकर योजनाओं व नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना संभव है।


निसंदेह रूप से, देश में ‘ई-प्रशासन’ की व्यवस्था करके प्रशासन को अधिक लोकतांत्रिक, जवाबदेह व पारदर्शी बनाना संभव है। इस प्रशासन के तहत सरकारी सेवाओं, परियोजनाओं व सूचनाओं को जनता तक पहुंचाने में विभिन्न इलैक्ट्रोनिक विधियों व उपकरणों की मदद ली जाती हैं। ई-प्रशासन की सहायता से सरकारी कार्य प्रणाली में इलेक्ट्रोनिक विधियों व उपकरणों का उपयोग करके प्रशासन को सरल, पारदर्शी, उत्तरदायी, नैतिक जवाबदेह व नागरिकोन्मुख बनाया जाना संभव है। सूचना प्रौद्योगिकी के अन्तर्गत मुख्य रूप से कम्प्युटर, इंटरनेट, सी.डी., ई-मेल, स्केनिंग आदि के समावेशित किया जाता है।भारत सरकार मूलभूत शासन की गुणवत्ता में सुधार दर्ज करने के लिए साधारण जनता से जुड़े क्षेत्रों में ई-प्रशासन को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित कर रही है। ई-प्रशासन के कारण न केवल सरकारी सेवाओं और कामकाज की कार्यकुशलता तीव्र गति से बढ़ती है अपितु सेवाओं की गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार संभव होता है। यही नहीं, सूचना प्रौद्योगिकी के आधार पर सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में एकीकरण व समन्वय का मार्ग सुगम होने से योजना के निर्दिष्ट लक्ष्यों की प्राप्ति करना संभव है। ई-प्रशासन  के जरिए सरकारी अभिलेखों, नियमों, कानूनों व अधिकारों के बारे में शीघ्र व विश्वसनीय सूचना की प्राप्ति संभव होने से समय की बर्बादी, लालफीताशाही, भ्रष्टाचार आदि जैसी प्रवृत्तियों पर लगाम कसना संभव है।राष्टÑीय विकास में ‘सूचना’ की भूमिका महत्वपूर्ण है। सूचना के अभाव में बेरोजगार युवक रोजगार से वंचित रह जाते है, किसान अच्छी फसल, अच्छे बीज व अच्छे प्रतिफल से वंचित रह जाते है तथा गरीब महिलाएं रोजगार व स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लाभों से महरूम रह जाती है। ई-प्रशासन के अन्तर्गत ग्रामीण किसानों को नई खोजों, अनुसंधान एवं नवीन कृषि तकनीक, कृषि उपज की कीमतों, आदि के बारे में आवश्यक जानकारी शीघ्र उपलब्ध कराई जा सकती है। ऐसी व्यवस्था होने पर किसान ई-मेल के माध्यम से सही कीमतों पर व सही समय पर अच्छी किस्म के बीज, खाद व अन्य यंत्र भी खरीद सकते हैं।ज्ञातव्य है कि ग्रामीण विकास व ग्रामीण पुनर्निर्माण का लक्ष्य हासिल करना तभी संभव है जब स्थानीय स्तर पर लोगों को ग्रामीण कार्यक्रमों की जानकारी व सम्पूर्ण सूचना उपलब्ध हो तथा उनकी सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाए। ई-प्रशासन व्यवस्था का विकास होने पर ग्रामीण जनों को विविध विकास कार्यक्रमों व परियोजनाओं को विविध विकास कार्यक्रमों व परियोजनाओं एवं उनकी प्रक्रिया से संबंधित आवश्यक जानकारी आसानी से प्राप्त हो सकती है तथा वे इनसे लाभान्वित होकर सही अर्थों में विकास पथ पर अग्रसर हो सकते है।
-डा. (श्रीमती) अनीता मोदी
(ये लेखक के अपने विचार हैं)



इसके साथ ही ई-प्रशासन के कारण ‘सामाजिक अंकेक्षण’ की व्यवस्था अधिक कारगर व प्रभावी बनाई जा सकती है जिसके कारण इन कार्यक्रमों व योजनाओं से भ्रष्टाचार व बेईमानी जैसे तत्वों को समूल उखाड़ना संभव है। इसी भांति,  बेरोजगार युवक विविध परीक्षाओं, विविध प्रकार की पाठ्य सामग्री, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए ऑन लाईन आवेदन आदि सूचना प्रौद्योगिकी युक्त सुविधाओं से लाभान्वित होकर विश्व के विकसित देशों के समकक्ष कदमताल कर सकते हैं। यही नहीं, ग्रामीण प्रशिक्षित बेरोजगार युवक-युवतियां, आईटी क्षेत्रों  में गांवों में ही रोजगार भी प्राप्त कर सकते हैं। इस प्रकार से ‘शाईनिंग इंण्डिया’ व ‘भारत’ के मध्य विद्यमान अंतराल को दूर करना संभव है तथा ग्रामीण प्रतिभा का पलायन शहरों की तरफ  भी नहीं होगा।


ईशप्रषासन के अनेक फायदे होने के बावजूद भी हकीकत यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में ईश्प्रषासन की व्यवहार्यता के संदर्भ में काफी सीमाएं विद्यमान है। ग्रामीण क्षेत्रों में निरक्षरता, सूचना प्रौद्योगिकी का सीमित उपयोग, आधारभूत सुविधाओं की अपर्याप्तता एवं प्रशिक्षित कर्मचारियों का अभाव जैसे तत्व ईश्प्रषासन के व्यापक उपयोग पर प्रष्नचिन्ह लगाते है। ग्रामीण क्षेत्रों में कम्प्युटर, इंटरनेट आदि की उपलब्धता व प्रयोग बहुत कम है, बिजली, पानी, सड़क व कम्प्युटर आदि की सुविधाएं विद्यमान नही होने से उपादेयता पर प्रष्न चिन्ह लग जाता है। ऐसी निराषाजनक स्थिति में ई-प्रशासन की सफलता सुनिष्चित करना जटिल व दुष्कर कार्य है। ग्रामीण जनों की सोच परम्परावादी, अंधविष्वासी व रूढिवादी है, आधी ग्रामीण महिलाएं निरक्षरता के दंष से आहत है, वे तकनीकी भाषा व आधुनिक संचार प्रौद्योगिकी के साधनों के उपयोग से अनभिज्ञ है, ऐसी विषम स्थिति में ईप्रषासन की प्रासंगिकता सीमित रह जाती है। यही नहीं, ईश्प्रषासन की अवधारणा को अधिकारी, कार्मिक व जनप्रतिनिधि ‘कागजी कार्यवाही’ तक ही सीमित रखना चाहते है ताकि उनकी कार्यप्रणाली, कार्यो व व्यवस्थाओं पर कोई अंगुली नहीं उठ सके तथा ग्रामीण जनता जानकारी के अभाव में ‘अंधेरे की गलियों’ में गुमराह होती रहें। ऐसी स्थिति में ईश्प्रषासन के माध्यम से उत्तरदायी, ईमानदार व जवाबदेही प्रषासन व्यवस्था की कल्पना को सार्थक किया जाना संभव नही है।  ऐसी स्थिति में ई-प्रशासन से प्राप्त लाभों का दायरा सीमित हो जाता है।


इन सब कमियों के बावजूद भी जरूरी है कि 21 वीं सदी में विकास की अवधारणा को सषक्त व स्थायी बनाये रखने के लिए देष को ई-प्रशासन की कल्पना को साकार किया जाना आवष्यक है। इस उद्देष्य की पूर्ति हेतु देष  में उपयुक्त माहौल को निर्मित करना एवं सुविधाओं का आधारभूत ढांचा तैयार करना आवष्यक है। ईश्प्रषासन के जरिये देष  को विकास पथ पर अग्रसर करने हेतु सर्वप्रथम यह जरूरी है कि  देष  में आधारभूत बुनियादी सुविधाओं यथा बिजली, पानी, सड़क आदि की उपलब्धता सुनिष्चित की जाय क्योंकि इनके  अभाव में ई-प्रशासन की प्रासंगिकता पर प्रष्न चिन्ह न लग जाय। तत्पश्चात देष में कम्प्यूटर, इंटरनेट आदि की आधारभूत जानकारी उपलब्ध कराने की दिषा में प्रभावी प्रयास किये जाने चाहिये।  स्थानीय भाषा व बोलचाल का उपयोग करके ही गांवों में सूचना प्रौद्योगिकी के बारे में चेतना व जागृति उत्पन्न करना संभव है। गांवों में ‘सूचना प्रौद्योगिकी’ का विस्तार करके ग्रामीण विकास संस्थाओं में प्रत्येंक स्तर पर कम्प्यूटर व इंटरनेट का प्रयोग आवष्यक रूप से किया जाना चाहिये।ईश्प्रषासन के माध्यम से  देष को सस्ती, अधिक कार्यकुषल व त्वरित सेवा प्रदान करकें देष की तस्वीर को चमकाया जाना संभव है तथा समावेषी विकास को वास्तविक अर्थो में प्राप्त किया जा सकता है।

दृष्टिकोण
भारत सरकार मूलभूत शासन की गुणवत्ता में सुधार दर्ज करने के लिए साधारण जनता से जुड़े क्षेत्रों में ई-प्रशासन को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित कर रही है। ई-प्रशासन के कारण न केवल सरकारी सेवाओं और कामकाज की कार्यकुशलता तीव्र गति से बढ़ती है अपितु सेवाओं की गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार संभव होता है। यही नहीं, सूचना प्रौद्योगिकी के आधार पर सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में एकीकरण व समन्वय का मार्ग सुगम होने से योजना के निर्दिष्ट लक्ष्यों की प्राप्ति करना संभव है।

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