Dainik Navajyoti Logo
Sunday 6th of December 2020
 
ओपिनियन

हाथी गोद में झुलाना

Saturday, May 04, 2019 11:25 AM
राज्य-मंत्रणा

राज्य-मंत्रणा के मंच पर आज ‘हाथी’ सवार था। प्रदेश में लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण में अचानक हाथी की एंट्री हो गई है। इसे पकड़कर लाने वाली कोई छोटी-मोटी हस्ती नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जैसी बड़ी शख्सियत है। वे पकड़कर भी लाए तो  गुपचुप तरीके से नहीं, बल्कि मीडिया के सामने चौड़े-धाड़े बात करते हुए लाए। बाकायदा सीधे-सधे और तीखे तेवरों के साथ। प्रधानमंत्री की बातों में सच्चाई को ढूंढने के साथ। बताया-मोदीजी के बोलों का क्या, उनमें सच्चाई ढूंढ़ना, तो हाथी को गोद में झुलाने जैसी बात है।

इस बार के चुनावों में गहलोत साहब की खास बात यह रही कि वे प्रधानमंत्री के बोलों पर धावा बोलने का कोई अवसर नहीं चूक रहे। वैसे भी ‘हाथियों’ को वश में करना हो या उन्हें झुलाते हुए ‘हाथ’ में समा लेने का जादू गहलोत साहब से बढ़कर कौन जान सकता है? वर्ष 2008 के चुनावों में वे अपनी राजनीतिक-जादूगरी के कमाल से हाथी के चुनाव चिन्ह पर चुनाव जीतकर आए सभी छहों बंदों को गोद में लेकर हाथ में विलीन करके दिखा चुके हैं। इस बार फिर हाथी के चुनाव चिन्ह से पांच महारथी-झुंझुनूं जिले की उदयपुरवाटी, अलवर जिले की तिजारा, किशनगढ़वास, भरतपुर की नदबई, करौली जिले की करौली सीट जीतकर पहुंचे हैं।

फिर इस बार के लोकसभा चुनाव में प्रदेश की पच्चीस में से बाईस सीटों पर हाथी के चुनाव चिन्ह पर बसपा मैदान में है। आखिर हाथी है ही ऐसा जीव। भारत की आंखों का यह तारा है। इसलिए तो गजरूपी गणेश को यहां प्रथम पूजनीय माना जाता है। हाथी हमारी राष्ट्रीय धरोहर है। उस पर इसे संवैधानिक मान्यता भी तो मिली हुई है। इसी हाथी चुनाव चिन्ह के दम पर ही बसपा की सुप्रीमो बहिनजी यानी मायावतीजी ने उत्तर प्रदेश का चार बार राजपाट संभाला है। इस बार चुनाव में भाजपा के कमल को परास्त करने के इरादे से यूपी में हाथी, साइकिल पर सवार होकर चौकीदार पर निशाना साधे हुए है।

वो बात अलग है कि भाजपा को हराने के वास्ते ही यूपी की सभी सीटों पर गठबंधन के सहयोगी के रूप में हाथ भी साथ होने का दावा कर रहा है। एक बात और-हाथी के चुनाव चिन्ह और हाथी की मूर्तियों के कथित घोटाले का मामला अभी सर्वोच्च न्यायालय में भी विचाराधीन है। राजस्थान की राजनीति में हाथी ने उस समय चौंकाया, जब पहली बार बसपा के विधायक सुरेश, हाथी पर सवार होकर राजस्थान विधानसभा पहुंचे थे। बिहार में भी विधायक श्याम बहादुर से यह सवाल पूछा गया था कि वे हाथी पर सवार होकर विधानसभा क्यों पहुंचे? हाथी पर सिर्फ बसपा वालों का ही सर्वाधिकार सुरक्षित नहीं रहा। बल्कि इसकी सवारी तो हमारी दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरागांधी ने भी की थी।

वो भी बिहार में जब वहां के गांव  बेलची में ग्यारह दलितों की हत्या हुई थी। हत्या के शिकार लोगों के परिजनों से मिलने के लिए इंदिराजी ने बाढ़ का पानी हाथी पर बैठकर ही पार किया था। राजनीति में हाथी ने जहां अपना दमखम दिखाया है, तो इसी तरह इसकी धमक साहित्य में भी सुनाई दी है। फिर चाहे इसके वजन को लेकर चर्चा की गई हो या इसकी मदमस्त चाल को लेकर या फिर हाथी को गोद में झुलाने का प्रसंग हो। हम इस शेर के साथ अपनी बात पूरी करते हैं-
जीवन ढाई चाल है, शतरंज बिछी बिसात।

घोड़ा, हाथी क्या करे, प्यादा देवे मात।
- महेश चन्द्र शर्मा

यह भी पढ़ें:

अंतिम चरण का चुनाव प्रचार

आजादी के बाद लोकसभा के जितने आम चुनाव हुए उनमें इतनी कटुता कभी नहीं देखी गई जितनी इस बार देखी जा रही है। इस बार तो सत्ता पक्ष और विपक्ष एक दूसरे को जमकर गालियां दे रहे हैं।

17/05/2019

अंतर्विरोधी अर्थ नीतियां बन रही ब्रिक्स की बाधा

ब्राजील की राजधानी ब्रासीलिया में संपन्न ब्रिक्स के 11वें सम्मेलन का मुख्य विषय था- ‘ब्रिक्स: एक उन्नत भविष्य के लिए आर्थिक प्रगति।’ पांचों सदस्यों देशों ने अपनी बहुमुखी आवश्यकताओं और नवोन्मेशी प्रौद्योगिकियों को ब्रिक्स देशों के बीच संचालित करने के विषय सम्मेलन में रखे।

21/11/2019

वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के उपाय

सरकार का कहना है कि थर्मल के स्थान पर बिजली के दूसरे स्रोतों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जैसे जल विद्युत को। कोयले को जलाने से वायु प्रदूषित होती है, यह तो सर्वविदित है और इसके विकल्प हमें खोजने ही चाहिए, लेकिन जल विद्युत के सम्बन्ध में भ्रम व्याप्त हैं।

03/03/2020

चित्तौड़ के महंत दिग्विजयनाथ, जिन्होंने 9 दशक पहले राम मंदिर आंदोलन को दी थी धार

हालात चाहे जितने विषम हों, जिस काम को ठान लिया बिना नतीजे की फिक्र किए उसे करेंगे ही।

14/11/2019

चक्रव्यूह रचने में माहिर अमित शाह

तमाम अंतर्विरोधों और विरोधाभासों के बावजूद भाजपा लगातार दूसरी बार अपने ही बूते पर सरकार बनाने में सफल हुई है, इसके पीछे नरेन्द्र मोदी की करिश्माई शख्सियत की तो सबसे बड़ी भूमिका रही ही लेकिन साथ ही इसमें भाजपा

29/05/2019

अपराधियों में कानून का भय क्यों नहीं?

महिला अत्याचारों को लेकर देश में कठोर कानून का प्रावधान है।यहां तक कि जघन्य अपराधों के लिए फांसी की सजा का प्रावधान भी है।

18/05/2019

वायु प्रदूषण बना बड़ी चुनौती

वायु प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकारों को लताड़ा- आप सड़क की धूल निर्माण, ध्वंस और कूड़े के निस्तारण से नहीं निपट सकते हैं तो आप इस पद पर क्यों बने हुए हैं? आपको लोगों के अरमानों को पूरा करना है। अगर आप ये नहीं कर सकते तो आप यहां क्यों रहेंगे? आप अपनी ड्यूटी निभाने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं। आपने किस तरह का रोडमैप अपनाया है?

18/11/2019