Dainik Navajyoti Logo
Friday 17th of September 2021
 
ओपिनियन

मुफ्त वितरण की बंदरबाट

Monday, September 06, 2021 13:00 PM
कॉन्सेप्ट फोटो

बीते समय में इंग्लैण्ड के चुनाव में वहां की लेबर पार्टी ने जनता को मुफ्त ब्राडबैंड, मुफ्त बस यात्रा और मुफ्त कार पार्किंग जैसी सुविधाओं का प्रलोभन दिया था। हम भी क्यों पीछे रहते, उत्तर प्रदेश में कुछ वर्ष पूर्व छात्रों को मुफ्त लैपटॉप दिए गए, तमिलनाडू में चुनाव पूर्व किचन ग्राइंडर और साइकिल वितरित करने का आश्वासन दिया गया। दिल्ली में एक सीमा के अंतर्गत मुफ्त बिजली और पानी दिया जा रहा है और केन्द्र सरकार द्वारा मुफ्त गैस सिलेंडर, एलईडी बल्ब और खाद्यान्न वितरित किए जा रहे हैं। निश्चित रूप से इस प्रकार के सीधे वितरण से जन कल्याण हासिल होता है। जिस छात्र को लैपटॉप मिल जाता है वह उससे अपने कौशल को सुधार सकता है और जीवन में आगे बढ़ सकता है। लेकिन कहावत है कि किसी को मछली देने के स्थान पर मछली पकड़ना सिखाना ज्यादा उत्तम है चूंकि मछली देने से एक बार मछली का भोजन करके वह आनन्दित हो सकता है, लेकिन यदि उसे मछली पकड़ना सिखा दिया जाए तो आजीवन अपने भोजन की व्यवस्था कर सकता है। इसलिए सरकार के लिए जरूरी है कि वह अपने सीमित राजस्व का उस स्थान पर निवेश करें, जहां कि जनता का लम्बे समय तक और अधिकाधिक कल्याण हो सके।
यहां एक विषय यह है कि अक्सर इस प्रकार के मुफ्त वितरण के वायदे चुनाव पूर्व किए जाते हैं जैसा कि इंग्लैण्ड में लेबर पार्टी ने चुनाव पूर्व किया है। अपने देश में कांग्रेस ने 2009 में किसानों की ऋण माफी का वायदा किया और सत्ता हासिल की थी। तमिलनाडु में जैसा कि ऊपर बताया गया है कि किचन ग्राइंडर आदि बांटने के आश्वाशन चुनाव पूर्व दिए गए। इस प्रकार के वायदे किए जाने से सरकार के राजस्व का उपयोग पार्टी के हितों को साधने के लिए किया जाता है। जैसे यदि कांग्रेस सरकार ने 2009 में लोन माफी का वायदा किया अथवा वर्तमान में केन्द्र सरकार एलपीजी गैस के सिलेंडर बांट रही है तो इसका लाभ पार्टी विशेष को मिलता है, जबकि इन मुफ्त सुविधाओं को वितरित करने का भार सरकार के राजस्व पर पड़ता है। अत: उच्चतम न्यायालय ने हाल में ही नोटिस जारी किया है कि चुनाव पूर्व इस प्रकार के वायदों पर रोक क्यों न लगाई जाए? सुप्रीम कोर्ट की यह सोच सही दिशा में है और केन्द्र सरकार को इस दिशा में स्वयं पहल करके इस प्रकार के चुनाव पूर्व वायदों को प्रतिबंधित करने का राष्ट्रव्यापी कानून बनाना चाहिए। चुनाव से आगे सरकार द्वारा तीन प्रकार की सुविधाएं दी जाती हैं। पहली सुविधा सार्वजनिक जो केवल सरकार द्वारा दी जा सकती है, दूसरी सुविधा उत्कृष्ट जो व्यक्तिगत है लेकिन उसका समाज पर प्रभाव पड़ता है और तीसरा व्यक्तिगत जो कि व्यक्ति विशेष मात्र को लाभ पहुंचाती है। सार्वजनिक सुविधाएं वे हैं जो सरकार ही उपलब्ध करा सकती है जैसे-रेलगाड़ी, गांव की सड़क अथवा कोविड से बचने के लिए क्या कदम उठए जाएं इसकी जानकारी। ये सुविधा केवल सरकार ही दे सकती है। इसलिए सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी इस प्रकार के सार्वजनिक सुविधाओं को उपलब्ध कराने की होनी चाहिए। इससे आगे कुछ सुविधाएं व्यक्तिगत, लेकिन ‘उत्कृष्ठ’ कही जा सकती हैं। जैसे किसी व्यक्ति द्वारा मास्क पहनना मूलत: व्यक्तिगत सेवा है। वह बाजार से 10 रूपये का मास्क खरीदकर पहन सकता है। इसमें सरकार के द्वारा वितरण करने की जरूरत नहीं है। लेकिन व्यक्ति के मास्क पहनने से दूसरों का संक्रमण से बचाव होता है। इसलिए सरकार मास्क बांटे और लोगों को उसे लगाने के लिए प्रेरित करें तो यह सुविधा व्यक्तिगत होने के बावजूद उत्कृष्ठ कही जाती है, क्योंकि इससे दूसरे तमाम लोगों को लाभ होता है। इसकी तुलना में कुछ सुविधाएं मुख्यत: व्यक्तिगत कही जा सकती हैं। जैसे मुफ्त बिजली, पानी, मुफ्त गैस सिलेंडर, मुफ्त साइकिल अथवा लैपटॉप। इस प्रकार की सेवाओं को वितरित करने से व्यक्ति विशेष मात्र को लाभ होता है और पूरे समाज को इसका लाभ नहीं होता है, परन्तु सरकार का राजस्व खप जाता है। अत: प्रश्न यह है कि सरकार को अपने सीमित राजस्व को किन सुविधाओं में लगाना चाहिए?सरकार को चाहिए कि इन तीनों प्रकार की सुविधाओं का जनकल्याण की दृष्टि से आंकलन कराए। गांव में सड़क बना दी जाए तो जन कल्याण पर सीधा और गहरा प्रभाव पड़ता है, क्योंकि बच्चे शिक्षा प्राप्त करने के लिए शहर जा सकते हैं और किसान अपनी सब्जी को शहर पहुंचा सकता है। जिस प्रकार कहा गया कि मछली पकड़ना सिखाइए, उसी प्रकार सड़क बनाने से व्यक्ति अपनी आय को आगे तक अर्जित करने में सक्षम हो जाता है। उत्कृष्ठ सेवाओं से भी लाभ होता है लेकिन सार्वजनिक सेवाओं की तुलना में कम। जैसे यदि मास्क बांटा जाए तो लाभ अवश्य होता है, लेकिन सड़क की तुलना में इसका लाभ कम होगा चूँकि मास्क तो व्यक्ति स्वयं भी लगा ही लेता है। तीसरी व्यक्तिगत सुविधाओं का लाभ न्यून ही होता है। यद्यपि इनमें खर्च ज्यादा आता है। जैसे मुफ्त बिजली पानी उपलब्ध कराने के लिए वर्ष दर वर्ष सरकार को भारी रकम चुकानी पड़ती है, जबकि उसका सामाजिक लाभ नहीं होता है। यदि यही रकम दिल्ली की झुग्गियों में सड़क, बिजली और मुफ्त वाईफाई उपलब्ध कराने में लगाई जाए तो जनता को और आय अर्जित करने में सुविधा होगी और उसका जीवन स्तर उतरोत्तर सुधरता जाएगा जैसे मछली पकड़ना सिखाने से सुधर सकता है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)


इस दृष्टि से केन्द्र सरकार को तमाम योजनाओं पर पुनर्विचार करना चाहिए केन्द्र सरकार द्वारा कुछ योजनायें उत्कृष्ठ श्रेणी की हैं जैसे किसान को पेंशनए ग्रामीण कौशल्य योजनाए दीनदयाल उपाध्याय योजनाए अन्त्योदय योजनाए प्रधानमंत्री कौशल विकास योजनाए मातृत्व वंदना योजना और स्वामित्व योजनाण् इन योजनाओं से यद्यपि व्यक्ति सीधे लाभान्वित होता है लेकिन इनका समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ता हैण् लेकिन केन्द्र सरकार द्वारा तमाम ऐसी योजनायें चलयी जा रही हैं जो केवल व्यक्तिगत लाभ पहुंचाती हैं जैसे उन्नत जीवन योजना के अंतर्गत एलईडी वितरण योजनाए पीएम सुरक्षा योजनाए आयुष्मान भारत और पीवन जीवन ’योति बीमा योजना के अंतर्गत बीमा पर सब्सिडीए ग्रामीण आवास योजना के अंतर्गत घरए अन्त्योदय अन्न योजना के अंतर्गत खाद्यन्न और उ’वला के अंतर्गत गैस और जनधन योजना के अंतर्गत बैंक में खाते खुलवानाण् इस प्रकार की योजनाओं से वोट अवश्य मिलते हैं लेकिन इससे जनता का दीर्घकालीन और स्थाई विकास नहीं होता हैण् इसलिए केन्द्र सरकार को चाहिए कि इस प्रकार की व्यक्तिगत लाभ पहुचाने वाली योजनाओं को समाप्त करे और उस रकम को रेलए सड़क और वाईफाई जैसी सामूहिक योजनाओं में लगाए जिससे कि जनता अपनी आय बढ़ाने में सक्षम हो और अपना जीवनस्तर सुधार सके।

मुद्दा
चुनाव से आगे सरकार द्वारा तीन प्रकार की सुविधाएं दी जाती हैं। पहली सुविधा सार्वजनिक जो केवल सरकार द्वारा दी जा सकती है, दूसरी सुविधा उत्कृष्ट जो व्यक्तिगत है लेकिन उसका समाज पर प्रभाव पड़ता है और तीसरा व्यक्तिगत जो कि व्यक्ति विशेष मात्र को लाभ पहुंचाती है। सार्वजनिक सुविधाएं वे हैं जो सरकार ही उपलब्ध करा सकती है जैसे-रेलगाड़ी, गांव की सड़क अथवा कोविड से बचने के लिए क्या कदम उठाए जाएं इसकी जानकारी। ये सुविधा केवल सरकार ही दे सकती है।
 

परफेक्ट जीवनसंगी की तलाश? राजस्थानी मैट्रिमोनी पर निःशुल्क  रजिस्ट्रेशन करे!

यह भी पढ़ें:

फिर शान की सवारी साइकिल हमारी

कहते हैं इतिहास अपने को दोहराता है। एक जमाना था जब खासकर भारत ही नहीं लगभग दुनियाभर में साइकिल का बोलबाला था।

03/06/2019

चुनाव आयोग के फैसले और आम समझ

सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ कांग्रेस की शिकायतों पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को 6 मई तक फैसला लेने का आदेश दिया है।

03/05/2019

एक दूसरे से करते हैं प्यार हम...

परिवार व्यक्ति एवं समाज सभी के लिए एक महत्वपूर्ण ईकाई है। गत कुछ दशकों में हुए तीव्र आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक यहां तक कि भौगोलिक स्थितियों में परिवर्तन

15/05/2019

भयावह आतंकी हमले से उपजे सवाल

गत रविवार को श्रीलंका में एक प्रसिद्ध चर्च में आतंकवादियों ने हमला कर 300 से अधिक लोगों को मौत के घाट उतार दिया। इस हमले में 1000 से अधिक लोग घायल हैं

27/04/2019

विजय उदबोधन के विजयी स्वर

सरसंघ चालक मोहन भागवतजी का उद्बोधन संघ के दृष्टिकोण से अवगत कराने का एक सशक्त माध्यम बना है।

14/10/2019

वायु प्रदूषण पर रोकथाम आवश्यक

वायु प्रदूषण वर्तमान समय का सबसे ज्वलंत मुद्दा है। भारत की हवा में घुल चुका जहर इतना जानलेवा बन गया है कि प्रत्येक 30 सेकंड में एक भारतीय मृत्यु को प्राप्त हो रहा है।

20/04/2019

परेशानी का सबब बने टिड्डी दल

साल 1993 के बाद राजस्थान में टिड्डी दलों का यह सबसे बड़ा हमला है। पाकिस्तान से लगातार आ रहे टिड्डी दलों ने प्रदेश के 10 जिलों में तबाही मचा रखी है। अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे जिलों के लगभग 850 गांव के 90 हजार किसान प्रभावित हुए है और 1.55 लाख हैक्टेयर फसल का नुकसान प्रारम्भिक सर्वे में सामने आया है।

20/01/2020