Dainik Navajyoti Logo
Wednesday 1st of April 2020
 
ओपिनियन

शिक्षित नारी ही समृद्ध भारत की कुंजी है

Monday, March 02, 2020 11:55 AM
रमेश पोखरियाल निशंक (फाइल फोटो)

सौभाग्य से विश्व के वृहद्तम शिक्षा तंत्रों में से एक का पारिवारिक सदस्य होने के नाते मुझे सम्पूर्ण देश की शिक्षण संस्थाओं के दीक्षांत समारोहों में जाने का अवसर मिलता रहता है। एक रुझान स्पष्ट रूप से सामने आता है कि हर क्षेत्र में हमारी बेटियां सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर रही हैं। बात डिग्रियों की हो, या फिर स्वर्ण पदक विजेताओं का विषय हो, यह औसतन साठ प्रतिशत से अधिक हमारी बेटियों का होता है। कहीं-कहीं तो यह 70-75 प्रतिशत से अधिक हो जाता है। मैं इसे एक अत्यंत शुभ संकेत के रूप में देखता हूं। वस्तुत: विश्व के विकसित राष्ट्रों ने अपना गौरवमयी स्थान अपने देश की महिलाओं को समुचित आदर प्रदान करके ही हासिल किया है।

संपूर्ण विश्व 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने जा रहा है। राष्ट्र के निर्माण और विकास में स्त्रियों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए स्वामी विवेकानंद ने नारी को पुरुष के समकक्ष बताते हुए कहा था जिस देश में नारी का सम्मान नहीं होता, वह देश कभी भी उन्नति नहीं कर सकता। हमारे देश में वेदान्त ने स्पष्ट घोषणा की है कि सभी प्राणियों में एक समान आत्मा विराजमान है। इस नाते स्त्रियों और पुरुषों में कोई भी भेद संभव नहीं है। मेरा सदैव से यह मानना रहा है कि पुरुष का सम्पूर्ण जीवन नारी पर आधारित रहता है। कोई भी पुरुष अगर सफल है, तो उस सफलता का आधार नारी ही है। वैसे भी देखा जाए तो जब कोई शिशु इस संसार में आता है, तो किशोरावस्था तक प्रथम गुरू के रूप में मां से उसका सबसे अधिक संसर्ग होता है। यही कारण है कि स्त्री शिक्षा अत्यन्त महत्वपूर्ण है।

समाज को संस्कारवान बनाने के लिए महिला शिक्षा उपयोगी ही नहीं, बल्कि अनिवार्य है। किसी भी सभ्य विकसित और श्रेष्ठ समाज का निर्माण उस देश के शिक्षित नागरिकों द्वारा किया जाता है और नारी इस कड़ी का केवल महत्वपूर्ण आधार ही नहीं, बल्कि अनिवार्य शर्त है। जिस तरह एक-एक कोशिका मिलकर जीवन का निर्माण करती है, वैसे ही प्रत्येक परिवार की छोटी-छोटी इकाइयां मिलकर समाज का निर्माण करती हैं। सभी इकाइयों की ऊर्जा का स्रोत और सम्पूर्ण परिवार की केंद्र बिंदु नारी होती है। यदि नारी शिक्षित होती है, तो दो परिवार शिक्षित होते हैं और जब परिवार शिक्षित होता है, तो पूरा राष्ट्र शिक्षित होता है। यही कारण था कि महान विचारक रूसो कहते थे, 'आप मुझे सौ आदर्श माताएं दें, तो मैं आपको एक आदर्श राष्ट्र दूंगा। अजर-अमर भारतीय संस्कृति से हमें नारी को अत्यंत सम्मान देने की प्रेरणा मिलती है।

हमारी संस्कृति हमें सिखाती है, यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमन्ते तत्र देवता’ अर्थात् जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं। माता के रूप में नारी धरती पर अपने सबसे पवित्रतम रूप में है। माता यानी जननी। मां को ईश्वर से भी बढ़कर माना गया है। स्वयं ईश्वर की जन्मदात्री भी नारी ही रही है। चाहे भगवान राम हों,गणेशध्कार्तिकेय हों, कृष्ण हों या गुरुनानक हो, सदैव मां के रूप में कौशल्या, पार्वती, यशोदा और तृप्ता देवी की आवश्यकता पड़ती है। मैं कई बार सोचता हूं कि आज जब समाज में विभिन्न प्रकार की चुनौतियां यक्ष प्रश्न बनकर हमारे सम्मुख खड़ी हैं, ऐसे में नई पीढ़ी को इस बारे में आत्मावलोकन करने की आवश्यकता है कि कैसे संस्कार देने में कमी रह गई है जिस कारण समाज में विकृतियां आ रही है।

वैदिक काल की बात करें तो घोषा, लोपामुद्रा, सुलभा, मैत्रेयी और गार्गी जैसी विदुषियों ने बौद्धिक और आध्यात्मिक पराकाष्ठा के नए आयाम स्थापित किए। नई शिक्षा नीति में हमारा पूरा ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि हमारी बालिकाएं कहीं भी पीछे नहीं रहें। बच्चे सबसे अधिक माताओं के सम्पर्क में रहा करते हैं। माताओं के संस्कारों, व्यवहारों व शिक्षा का प्रभाव बच्चों के मन मस्तिष्क पर सबसे अधिक पड़ता है। शिक्षित माता ही बच्चों के कोमल व उर्वर  मन मस्तिष्क में उन समस्त संस्कारों के बीज बो सकती है, जो समाज और राष्ट्र के उत्थान के लिए परम आवश्यक हैं। शिक्षित और विकसित मन मस्तिष्क वाली नारी अपनी परिस्थिति और परिवार के प्रत्येक सदस्य की आवश्यकता आदि का ध्यान रखकर घर की उचित व्यवस्था एवं संचालन कर सकती है। जीवन रूपी गाड़ी चलाने के लिए महिलाओं की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। सशक्त भागीदारी के लिए महिला शिक्षा की अत्यन्त आवश्यकता है। यदि नारी अशिक्षित हो, तो वह अपने जीवन को विश्व की गति के अनुकूल बनाने में सदा असमर्थ रहेगी। यदि वह शिक्षित हो जाए, तो न केवल उसका पारिवारिक जीवन स्वर्गमय होगा, बल्कि समाज और राष्ट्र की प्रगति के युग का सूत्रपात भी हो सकेगा। भारतीय समाज में शिक्षित माता, गुरु से भी बढ़कर मानी जाती है, क्योंकि वह अपने बच्चों को महान से महान बना सकती है।

भारत में नारी और पुरुष के बीच जब-जब फर्क आया, तब-तब उस फर्क की बड़ी कीमत हमें चुकानी पड़ी। वास्तव में गंभीरता के साथ देखा जाए, तो यही ज्ञात होता है कि भारत की समस्याओं का एक प्रमुख कारण नारियों की अशिक्षा रहा है। इसका फल यह हुआ कि जो राष्ट्र विश्व गुरु था, वही आज अपना पुराना वैभव, गौरव पाने हेतु संघर्षरत है। भारत सरकार हमारी बेटियों के कल्याण के लिए कृत संकल्प है। महिला सशक्तिकरण के लिए कई सारी योजनाएं चलाई गई हैं। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना, महिला हेल्पलाइन योजना उज्ज्वला योजना, सपोर्ट टू ट्रेनिंग एंड एम्प्लॉयमेंट प्रोग्राम फॉर वूमेन वन स्टॉप महिला शक्ति केंद्र, पंचायती राज योजनाओं में महिलाओं के लिए प्रतिनिधित्व देकर सरकार ने महिला सशक्तिकरण एवं विकास की एक नई इबारत लिखने की कोशिश की है। महिला शिक्षा हमारे राष्ट्र की सफलता एवं विकास की सीढ़ी है। महिला शिक्षा प्रत्येक परिवार, समाज, राष्ट्र के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए न केवल महत्वपूर्ण है, बल्कि परम आवश्यक है। महिला शिक्षा एक ऐसा सक्षम शस्त्र है, जो दुनिया को बदलने की क्षमता रखता है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

यह भी पढ़ें:

श्रद्धा के समर्पण का पर्व है श्राद्ध

आश्विन मास का कृष्ण पक्ष जिसे अंधियारा पाख भी कहा जाता है, पितृपक्ष के रूप में विख्यात है। यह पितरों के प्रति श्रद्धा के समर्पण के पर्व के नाम से जाना जाता है।

13/09/2019

अमेरिका ने पाकिस्तान की नींद उड़ाई

पाकिस्तान की बदनाम गुप्तचर एजेंसी आईएसआई का वह पालतू आतंकवादी है, पाकिस्तान ने भारत में दंगे कराने, अपराध कराने के लिए दाउद इब्राहिम को एक हथकंडे के तौर पर इस्तेमाल करता है।

09/07/2019

यूरोप में बढ़ता इस्लामीकरण

यूरोप के सिर्फ एकाद देश ही नहीं बल्कि कई देश इस्लामीकरण के चपेट में खडे हैं और यूरोप की पुरातन संस्कृति खतरे में पड़ी हुई है।

29/11/2019

इंटरनेट की दुनिया में खोता बच्चों का बचपन

खेलने-कूदने की उम्र के साढ़े छह करोड़ बच्चे इंटरनेट की दुनिया में डूबे रहते हैं। इसमें कोई दोराय नहीं कि इंटरनेट ज्ञान का भण्डार है पर यह भी नहीं भूलना चाहिए कि ज्ञान का यह भण्डार सतही अधिक है।

27/12/2019

वर्तमान चुनाव और राजनीति

जैसे-जैसे चुनावों में आम जनता की भागीदारी बढ़ती जा रही है वैसे-वैसे अब उम्मीदवार और राजनैतिक दलों में गलाकाट प्रतिस्पर्धा भी बढ़ रही है।

09/05/2019

सबके हाथ में है संविधान

एक समय था जब हम इंकलाब के नारे लगाकर कहते थे कि स्वाधीनता हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है और हम इसे लेकर रहेंगे।

30/01/2020

श्रमिक दिवस की प्रासंगिकता

प्रतिवर्ष 1 मई का दिन ‘अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस’ अथवा ‘मजदूर दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। जिसे ‘मई दिवस’ भी कहा जाता है।

01/05/2019