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Thursday 16th of July 2020
 
ओपिनियन

रायसीना डायलॉग से बढ़ा भारत का कद

Friday, January 24, 2020 10:20 AM
डायलॉग रखा गया।

ईरान की कुर्द सेना के कमांडर कासीम सुलेमानी की हत्या के तुरंत बाद होने वाले रायसीना डायलॉग काफी अहम माना जा रहा था। इसकी एक बड़ी वजह यह थी कि इसमें ईरान के विदेश मंत्री जरीक व अमेरिका के उप राष्टीय सुरक्षा सलाहकार मैथ्यू पोटिंगर भी उपस्थित हो रहे थे। यूक्रेन के प्लेन को गिराने के बाद आंतरिक और बहारी मोर्चे पर घिरा हुआ ईरान चाहता था कि भारत इस मामले में मध्यस्था करे। ऐसा हुआ भी। देश और दुनिया के कूटनीतिक मसलों को समझने के लिए भारत द्वारा शुरू किया गया रायसीना डायलॉग वैश्विक भू-राजनीति और अर्थनीति के लिहाज से तो महत्वपूर्ण है ही, राष्टों के बीच आपसी विवादों और तनावों को कम करने में भी कारगर साबित हो रहा है। भारत साल 2016 से लगातार इस डायलॉग का आयोजन कर रहा है। इस बार यह डायलॉग नई दिल्ली के होटल ताज में रखा गया। बहुराष्ट्रीय देशों के इस संवाद कार्यक्रम में 12 देशों के विदेश मंत्रियों समेत दुनिया के 100 देशों के 700 प्रतिनिधियों ने शिरकत की, जबकि उद्घाटन सत्र में पीएम नरेंद्र मोदी, डेनमार्क के पूर्व पीएम व नाटो के पूर्व महासचिव अनस राममुसन, न्यूजीलैंड की पीएम हेलेन क्लार्क, अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई, कनाडा के पूर्व पीएम स्टीफन हार्पर, स्वीडन के पूर्व पीएम कार्ल ब्लिडर, भूटान के पूर्व पीएम शिरिंग तोग्बे, दक्षिण कोरिया के पूर्व पीएम हांग सुइंग सू आदि मौजदू थे। आस्ट्रेलिया के पीएम स्कॉट मॉरिसन भी डायलॉग में आने वाले थे, लेकिन आस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी आग की वजह से उनका आना टल गया। वह डायलॉग के उद्घाटन सत्र को भी संबोधित करने वाले थे।

ईरान की कुर्द सेना के कमांडर कासीम सुलेमानी की हत्या के तुरंत बाद होने वाले रायसीना डायलॉग काफी अहम माना जा रहा था। इसकी एक बड़ी वजह यह थी कि इसमें ईरान के विदेश मंत्री जरीक व अमेरिका के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मैथ्यू पोटिंगर भी उपस्थित हो रहे थे। यूक्रेन के प्लेन को गिराने के बाद आंतरिक और बहारी मोर्चे पर घिरा हुआ ईरान चाहता था कि भारत इस मामले में मध्यस्था करे। ऐसा हुआ भी। ईरान के विदेश मंत्री जवाद जरीक ने कान्फ्रेंस से इतर भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। वार्ता के दौरान उन्होंने विवाद का हल निकालने के लिए भारत के समक्ष मध्यस्थता की पेशकश की। इसके अलावा उन्होंने ईरान पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों के मामले में भी भारत से मदद की उम्मीद की। भारत का स्वतंत्र थिंक टैंक आॅब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर प्रति वर्ष रायसीना डायलॉग का आयोजन करता है। इसका मकसद दुनिया के अलग देशों को एक मंच पर लाना है, ताकि वैश्विक हालात और चुनौतियों पर सार्थक चर्चा की जा सके। कूटनीतिक रणनीति के लिहाज से भी रायसीना डायलॉग का पांचवां संस्करण भारत के लिए काफी अहम रहा। डायलॉग में पहुंचे ब्रिटेन के विदेश एवं कॉमनवेल्थ विभाग के दक्षिण एशिया प्रमुख गैरेथ बेल ने न केवल आतंकवाद से लड़ने में भारत की मदद करने का आश्वासन दिया बल्कि वैश्विक आतंकवाद के लिए उन्होंने सीधे- सीधे पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने एशिया, यूरोप, अफ्रीका व संसार के दूसरे कोनों से आए हुए प्रतिनिधियों के सामने पाकिस्तान को बेनकाब करते हुए कहा कि अगर पाकिस्तान फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की काली सूची से बचना चाहता है, तो उसे अपने यहां सक्रिय आतंकी समूहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह सच है कि आतंकवादी समूह पाकिस्तान के भीतर से ही अपनी कार्रवाई का संचालन करते हुए पाकिस्तान सरकार और दक्षिण एशियाई क्षेत्र के लिए गंभीर चुनौती पेश करते हैं। उन्होंने कहा कि हमने अपनी धरती पर 19 आतंकी हमलों को नाकाम किया है, हम अपने अनुभव भारत के साथ साझा कर सकते हैं। दूसरी और रूस ने एक बार फिर भारत और ब्राजील को यूएनओ सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता देने की वकालत की।

हालांकि रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव द्वारा हिंद-प्रशांत अवधारणा की आलोचना किए जाने के बाद तकनीकी सत्र में परस्पर आरोप-प्रत्यारोप के स्वर उठे। लावरोव ने हिंद- प्रशांत अवधारणा का विरोध करते हुए कहा कि इसका असल मकसद केवल  मौजूदा संरचना में व्यवधान उत्पन्न करना और इस क्षेत्र में चीन के दबदबे का रोकना है। उन्होंने कहा कि समानता पर आधारित लोकतांत्रिक व्यवस्था को बल द्वारा प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए। रूसी विदेश मंत्री की आपत्तियों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भारत और अमेरिका ने कहा कि  हिंद-प्रशांत अवधारणा का मकसद किसी देश को अलग-थलग करना नहीं है, बल्कि यह सिद्धांत आधारित सोच है। अमेरिकी प्रतिनिधि ने डायलॉग के अंतिम सत्र में कहा कि यह देशों का समुदाय है, जो कानून के शासन का सम्मान करता है, समुद्री क्षेत्र तथा आसमान तक के परिवहन की आजादी के लिए खड़ा रहता है, खुले व्यपापार, खुली सोच को बढ़ावा देता है तथा प्रत्येक राष्ट्र की संप्रभुता का बचाव करता है। उन्होंने यूरेशियाई आर्थिक परियोजना जैसी हिंद प्रशांत की स्पर्धा वाली सोच की आलोचना करते हए कहा कि इन दृष्टिकोणों में कम स्वतंत्रता, कम खुलापन, कम लचीलापन है और यह अधिक अवरोधक लगाते हैं। रूस ने खाड़ी देशों से क्षेत्र के लिए एक सामान्य सुरक्षा तंत्र विकसित किए जाने की बात कर वैश्विक शांति स्थापना की दिशा में नई पहल के संकेत दिए। रूस ने सुझाव दिया कि इसकी शुरूआत विश्वास निर्माण उपायों और एक दूसरे को सैन्य अभ्यास के लिए आमंत्रित करके होनी चाहिए। भारत अफगानिस्तान संबंधों पर चर्चा करते हुए अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने कहा कि भारत अफगानिस्तान का सबसे अच्छा दोस्त है।

- एनके सोमानी
(ये लेखक के अपने विचार हैं)


 

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