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ओपिनियन

जानिए, राजकाज में क्या है खास?

Monday, July 15, 2019 13:05 PM

चर्चा में सुन्दरकांड
इन दिनों सुन्दरकांड को लेकर सूबे की सबसे बड़ी पंचायत में चर्चा जोरों पर है। सुन्दरकांड भी कोई छोटा-मोटा पंडित नहीं बांच रहा, बल्कि राज के रत्नों में तीसरे नंबर पर है, और बीकाजी की नगरी से ताल्लुकात रखते हैं। जब से हाथ वाली पार्टी में दो-दो हाथ की नौबत आई है, तभी से भाईसाहब ने सुन्दरकांड को पढ़ना शुरू किया है। भाईसाहब न जगह देखते है और नहीं वक्त। जब भी मन में आया, छोटी सी किताब जेब से निकाली और पढ़ना शुरू कर देते हैं। उनके अगल-बगल वाले कई मायने भी निकालते हैं, मगर भाई साहब अपनी धुन में मस्त रहते हैं। राज का काज करने वालों में चर्चा है, कि पंडितजी को भी किसी दूसरे पंडितजी ने बिन मांगे सलाह दे दी, कि जो चल रहा है, वह ठीक नहीं है, सो सुन्दरकांड का पाठ करने में ही भलाई है।

अब अन्तर्रात्मा की बात
जोधपुर वाले अशोकजी भाईसाहब ने बुध को जनता की अन्तर्रात्मा की आवाज का खुलासा क्या किया, कइयों का हाजमा बिगड़ गया। पिंकसिटी से लेकर लालकिले की नगरी तक हलचल जो मच गई। इंदिरा गांधी भवन में बने पीसीसी के ठिकाने पर भी बैठक में देर रात तक चिंतन-मंथन हुए बिना नहीं रह सका। सरदार पटेल मार्ग स्थित बंगला नंबर 51 में बने भगवा वालों के दफ्तर में भी खुसर फुसर रही कि हमारे गुजरात वाले नमोजी तो सिर्फ अपने मन की बात करते हैं, मरु प्रदेश के हाथ वाले जादूगरजी तो एक कदम आगे निकले। वो तो सूबे में राज के लिए हुई चुनावी जंग से पहले ही जनता की अन्तर्रात्मा की आवाज से भी वाकिफ थे। अब सामने वालों को कौन समझाए कि भाईसाहब की बात को समझने वाले समझ गए ना समझे वो अनाड़ी हैं।

बाहरी की आड़ में
हाथ वाले भाई लोगों का भी कोई जवाब नहीं है। जब किसी से दो-दो हाथ करने की ठान लेते है, तो उसका बेड़ा गर्क करके ही दम लेते हैं। चाहे वह अपनी ही पार्टी का बड़ा नेता क्यों ना हो। अब देखो ना इन दिनों इंदिरा गांधी भवन में बने पीसीसी चीफ के ठिकाने पर आने वाले कई भाई लोगों ने दो-दो हाथ करने की ठान ली है। दो-दो हाथ भी और किसी से नहीं बल्कि अपने ही जहाज के पायलट से करने पर उतारू है। इसके लिए बहाना भी सहारनपुर का ढूंढा है। सहारनपुर कोई सूबे का हिस्सा नहीं, बल्कि पिंकसिटी से सैकड़ों मील दूर है। सो एक खेमे के भाई लोग छोटे पायलट साहब को बाहरी का खिताब देकर निपटाने के मूड में नजर आ रहे हैं।

ट्रेनिंग मुखबंद की
दरबार के बाहर राजा के बिना हुक्म के कोई भी वजीर मुंह नहीं खोल सकता। कुछ इसी तरह के संकेतों से हमारे सूबे के वजीरों के चेहरों पर भी चिंता की लकीरें दिखाई देने लगी हैं। हमारे मरु प्रदेश के नेता काफी वाचाल हैं और यह आदत उनकी काफी पुरानी है। चूंकि उनका खान-पान भी खास है। छपास के रोगियों की तो अर्द्ध-रात्रि तक भी नींद गायब रहती है, लेकिन अब मामला उल्टा नजर आ रहा है। शेखावाटी के भाईसाहब अर्द्ध-रात्रि को भी हालचाल पूछ कर एक लाइन छापने की गुहार करते थे, वो अब देखते ही बगलें झांक कर निकल जाते हैं। राज का काज करने वालों ने इसका राज खोला तो अपने भी कान खड़े हो गए। उन बेचारों का कोई कसूर नहीं है, चूंकि उन्हें अभी से मुखबंद की ट्रेनिंग जो दी जा रही है। उनको साफ कहा गया है कि अंदर की बात की गंध खबर सूंघने वालों की नाक से कौसों दूर होनी चाहिए।

तीतर गए 13 के भाव
बीकाणा में इन दिनों तीतर गए 13 के भाव और खरगोश हो गए खालसा वाली कहावत काफी चर्चा में हैं। बीकाजी की नमकीन के चटकारों के साथ जमाली चौक के पाटों पर लोग बतियाते हैं कि पूरी 25 सीटें देने वाला मरु प्रदेश जिस ढंग से नमो टीम के बाद निर्मला सीतारमणजी के बजट में भागीदारी नहीं पा सका, उसी तरह तीन दिन राज के ठहरने के बावजूद बीकाणा की उम्मीदों पर पानी फिर गया। राज का काज करने वाले भी लंच केबिनों में बतियाते हैं कि तीतर और खरगोशों की संख्या के अनुपात में बीकाणा का खयाल रखा गया तो सूरसागर की पाल पर बनी चौपाटी की ठण्डी हवा के झौंकों का भी अलग ही आनंद होगा। (यह लेखक के अपने विचार हैं)

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