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ओपिनियन

अंतर्विरोधी अर्थ नीतियां बन रही ब्रिक्स की बाधा

Thursday, November 21, 2019 11:30 AM
ब्रिक्स सम्मेलन में सदस्य देशों के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री।

ब्राजील की राजधानी ब्रासीलिया में संपन्न ब्रिक्स के 11वें सम्मेलन का मुख्य विषय था- ‘ब्रिक्स: एक उन्नत भविष्य के लिए आर्थिक प्रगति।’  पांचों सदस्यों देशों ने अपनी बहुमुखी आवश्यकताओं और नवोन्मेशी प्रौद्योगिकियों को ब्रिक्स देशों के बीच संचालित करने के विषय सम्मेलन में रखे। ब्रिक्स देशों ने जो संयुक्त वक्तव्य जारी किया उसमें ब्रिक्स के सदस्य देशों के बीच परस्पर संपर्क और विश्व व्यवस्था, विशेषकर वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ ब्रिक्स के समुचित संपर्कों की रूपरेखा व उपलब्धियों का उल्लेख है। सम्मेलन में ब्रिक्स राष्ट्रों ने उन्नत ब्रिक्स कार्यक्रम की अद्यतन रूपरेखा अपनाने, ब्रिक्स ऊर्जा, भारत की पहल पर सौर ऊर्जा सहयोग मंच साकार करने, ब्रिक्स महिला व्यवसाय संस्था का गठन करने, ब्रिक्स व्यापार व निवेश से जुड़ी कंपनियों और एजेंसियों के बीच हस्ताक्षरित सहमतियों-समझौतों को ठोस स्वरूप प्रदान करने की दिशा में सहमति प्रकट की। रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने ब्रिक्स के मध्य सूचना और कम्प्यूटिंग के क्षेत्र में सुरक्षात्मक सहयोग को बढ़ाने पर बल दिया। उनके अनुसार वे ब्रिक्स सहित अन्य देशों को रूस में विकसित उन अग्रिम प्रौद्योगिकियों के उपयोग की सलाह देना पंसद करेंगे, जो सूचना व कम्प्यूटिंग आधारित वैश्विक लेन-देन को मौलिक एंटी-वायरस कार्यक्रमों से सर्वोत्तम सुरक्षा उपलब्ध कराती हैं। उन्होंने ब्रिक्स देशों के लिए एक आंकड़ा-विनिमय कार्यक्रम का प्रस्ताव भी रखा है। उनका मानना है कि इससे समूह के देशों की छोटी-मध्यम- बड़ी आकार की कम्पनियां अपने उत्पादों व सेवाओं की कार्यकुशल आपूर्ति कर सकेंगी।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने विश्व स्तर पर बढ़ रहे संरक्षणवाद और आर्थिक चुनौतियों के संदर्भ में चिंता व्यक्त की। इस संदर्भ में उनका तात्पर्य अमेरिका से था। उन्होंने जोर देकर व्यक्त किया कि व्यावसायिक संरक्षण की नीतियों ने व्यापक संकट उत्पन्न कर दिया है और इससे न केवल अंतर्राष्ट्रीय व्यापार व निवेश प्रभावित हुआ, अपितु वैश्विक आर्थिक प्रगति भी थम गई है। शी ने कहा कि यद्दपि अमेरिका से व्यापार युद्ध में उलझने के बाद वैश्विक आर्थिक मंदी का एक कालखंड व्यतीत हो रहा है, तथापि चीन की विकास दर प्रशंसनीय है और इसीलिए चीन का अर्थतंत्र संपूर्ण विश्व के लिए व्यापार के सुनहरे अवसर उपलब्ध कराने का एक आकर्षक आधार बना हुआ है। भारतीय प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स सम्मेलन में ब्रिक्स देशों के बीच कराधान और सीमा शुल्क प्रक्रिया को आसान बनाए जाने के संदर्भ में उत्साह प्रदर्शित किया। उनके अनुसार इस कारण देशों के मध्य व्यवसाय का हितकारी वातावरण निर्मित हो रहा है लेकिन उन्होंने सदस्य देशों से इस दिशा में अभी और प्रयास किए जाने की जरूरत पर बल दिया। भारत की दृष्टि में अंतर-ब्रिक्स व्यापार और निवेश लक्ष्यों को अधिक महत्वाकांक्षी अवश्य होना चाहिए। सदस्य देशों द्वारा व्यापार लागतों में कटौती किए जाने की बात पर भारत ने सहमति दिखाई और इसे उपयोगी बताया। मोदी के अनुसार ब्रिक्स को आगामी 10 वर्षों में प्राथमिकता पर आधारित व्यवसाय के कुछ क्षेत्रों की पहचान कर उनके अनुरूप अंतर-ब्रिक्स सहयोग की रूपरेखा बनानी चाहिए। मोदी ने कहा कि भारत का आर्थिक लक्ष्य वर्ष 2024 तक पांच खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का है। इसके लिए उन्होंने ब्रिक्स व्यवसाय संगोष्ठी में ब्रिक्स देशों के व्यवसायियों को भारत में निवेश करने के लिए आमंत्रित किया।

ब्राजील ने ब्रिक्स के आयोजक के रूप में कुछ प्राथमिकताएं निर्धारित की, जिन पर वह सदस्यों देशों से सहयोग चाहता है। इन प्राथमिकताओं में नव प्रवर्तन, अंतर्राष्ट्रीय अपराध के विरुद्ध लड़ाई छेड़ना, स्वास्थ्य और व्यापार तथा निवेश को बढ़ाना शामिल है। इसके साथ ही ब्राजील ने अवसंरचना विकास और हरसंभव सार्वजनिक-निजी भागीदारी पर भी सदस्य देशों का ध्यान केन्द्रित किया। दक्षिण अफ्रीका ने अपने देश में व्याप्त बेरोजगारीए गरीबी और असमानता मूलक सामाजिक स्थिति से उबरने के लिए सदस्य देशों के बीच व्यापार, निवेश, पर्यटन, क्षमता विकास, कौशल और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की नीतियों को सामूहिक कार्य संकल्प से जोड़ने की प्रतिबद्धता दिखाई। ब्रिक्स विश्व की पांच प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का संगठन है। इसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका सम्मिलित हैं। इन देशों में विश्व की 42 प्रतिशत जनसंख्या रहती है। वैश्विक जीडीपी का 23 प्रतिशत इनके खाते मे हैं। विश्व का 30 प्रतिशत भूभाग इनके पास है और इन पांचों देशों के बीच विश्व का 18 प्रतिशत व्यापार होता है।

ब्रिक्स देशों के प्रमुख नेता वार्षिक सम्मलेन में जो भावी कार्य योजनाएं प्रस्तुत करते हैं वस्तुत: उनकी रूपरेखा इन देशों के व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल द्वारा व्यापक स्तर पर की गई परस्पर वार्ताओं के बाद तैयार की जाती है। अनेक बार की गई ऐसी वार्ताओं के बाद ब्रिक्स देशों के शीर्ष रणनीतिकारों को लगता है कि पांचों देशों की विभिन्न समस्याओं के उन्मूलन के लिए ब्रिक्स के वित्तीय संस्थानों को सशक्त किए जाने की आवश्यकता है। इसी क्रम में ब्रिक्स के तत्वावधान में ब्रिक्स के न्यू डेवलपमेंट बैंक, एनडीबी और अफ्रीका रीजनल सेंटर, आरसी जैसे अन्य संस्थान खोले जाने पर विचार किया जा रहा है।हालांकि भारतीय प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में आतंक का मुद्दा भी उठाया और विश्व में आतंक के कारण दस खरब डॉलर की क्षति का वर्णन किया, पर लगता नहीं कि आतंक निरोध के लिए भारत को छोड़ कोई अन्य ब्रिक्स देश बड़ी व व्यापक भागीदारी करने के पक्ष में है। ब्रिक्स में आतंक और आतंक के कारण विश्व अर्थव्यवस्था को हुई आर्थिक क्षति का जिक्र करना भारतीय कूटनीति का एक हिस्सा है, पर यह स्पष्ट नहीं कि शेष सदस्य देश इस पर भारत की तरह गंभीर हैं भी या नहीं।          
विकेश कुमार बडोला (ये लेखक के अपने विचार हैं)

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