Dainik Navajyoti Logo
Saturday 15th of August 2020
Dainik Navajyoti
 
ओपिनियन

संविधान और डॉ. आम्बेडकर

Friday, December 06, 2019 13:05 PM
डॉ. भीमराव अम्बेडकर (फाइल फोटो)

डॉ. भीमराव अम्बेडकर को सिर्फ दलितों के उद्धार नायक के रूप में देखकर उनका स्मरण करना दरअसल उनके सम्पूर्ण और विराट व्यक्तित्व की अनदेखी करना होगा। उन्होंने स्वतंत्र भारत के संविधान का जो खाका (1947-1950) के बीच तैयार किया था, उसे आज भी भारत में कई विद्वान अमर कृति तक कहते हैं। डॉ. अम्बेडकर की असाधारण स्मरण शक्ति, बुद्धिमता, ईमानदारी, विभिन्न विषयों की गहरी जानकारी, नियमितता, दृढ़ता और प्रचंड संग्रामी स्वभाव की अगर आजाद भारत में किसी एकमात्र व्यक्ति की जा सकती है, तो वह है महात्मा गांधी, क्योंकि गांधीजी के बाद में प्रसिद्ध वैज्ञानिक अल्बर्ट आइन्स्टीन ने यहां तक कह दिया था कि गांधीजी के सम्पूर्ण व्यक्तित्व को देखकर आने वाली पीढ़ियां शायद ही भरोसा करें कि हाड-मांस से बना एक आदमी पृथ्वी पर ऐसा भी जन्मा था। डॉ. अम्बेडकर की प्रशंसा में विभोर होकर यह बात नहीं की जा रही है। कारण कभी दुनिया के कई बुद्धिदां उन्हें तत्कालीन भारत के पहले छह सबसे ज्यादा बुद्धिवाले राजनेताओं में रखते थे।

डॉ. अम्बेडकर का जन्म अप्रैल, 14, 1891, को मध्यप्रदेश के महू (अब अम्बेडकर नगर) नगर में हुआ था, जहां उनके जन्म दिवस पर हर साल कुंभ जैसा मेला लगता है। अम्बेडकर नगर में डॉ. भीमराव अम्बेडकर की एक विशाल प्रतिमा भी स्थित है। स्कूली शिक्षा के दौरान एक ब्राह्मण शिक्षक ने अपने शिष्य बालक भीमराव की बुद्धिमता को पहचाना था। उक्त शिक्षक महोदय का साया लम्बे समय तक भीमराव साहब के लिए मां के आंचल जैसा साबित हुआ। बालक अम्बेडकर ने अपने शिक्षक के भरोसे को आजीवन कायम रखकर बताया, क्योंकि वे कुल मिलाकर 64 विषयों में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त कर चुके थे और कहा यह भी जाता है कि उनके पास 32 डिग्रियां थीं, उन्हें कई विदेशी विश्वविद्यालयों ने मानद डॉक्टरेट की उपाधि दी थी। उनके निजी पुस्तकालय में 50 हजार से ज्यादा पुस्तकें थीं।

डॉ. अम्बेडकर की साफ धारणा कि समग्र हिंदुत्व की परिभाषा दीवारों से घिरी हुई नहीं है। उनके तेजस्वी व्यक्तित्व को देखते हुए ही 1913 में बड़ौदा राजघराने के तत्कालीन महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ ने उन्हें वजीफा देकर विदेश भेजा था। अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी में भीमराव साहब ने राजनीति शास्त्र, अर्थशास्त्र, समाज शास्त्र, विज्ञान, मानव विज्ञान, दर्शन जैसे विषयों का गहरा अध्ययन किया। उन्हें अमेरिकी प्रवास के दौरान वहां के जिस समाज और राजनीति के मिले-जुले दर्शन हुए उससे डॉ. अम्बेडकर के पूरे व्यक्तित्व गठन में बहुत कामयाबी मिली। इसी यात्रा के दौरान उन्होंने जो शोध-पत्र पढ़ा था, उसे आज भी यादगार माना जाता है। उससे उनके व्यक्तित्व की दुनिया भर में तारीफ हुई थी। मरणोपरांत भारतरत्न से सम्मानित डॉ. अम्बेडकर का सबसे पहला सिद्धांत था जीवन महान होना चाहिए लंबा नहीं। ज्ञान का विकास मनुष्य का अंतिम लक्ष्य होना चाहिए। इसी कारण वे शिक्षा को सबसे पहले नम्बर पर रखते थे। उनका यह भी कहना था कि जो व्यक्ति आत्मसम्मान से नहीं जीना चाहता उसकी किसी भी समाज में इज्जत नहीं होती।

डॉ. अम्बेडकर अपने माता-पिता की 14वीं आखिरी जीवित संतान थे। उन्होनें स्वयं दो विवाह किए थे । वे मानते थे कि पति- पत्नी को मित्रों की तरह रहना चाहिए। डॉ. आम्बेडकर मानते थे कि किसी भी विद्वान को समाज सेवा के लिए हरदम तैयार रहना चाहिए। उनकी मौलिक अधिकारों में अडिग आस्था थी। इसी तरह वे मानवाधिकारों के जबर्दस्त पैरोकार थे। इस बात पर वे हरदम प्रफुल्लित हुआ करते थे कि हमारे संविधान ने व्यक्ति को एक इकाई के रूप में स्वीकार कर लिया है। शायद  इसीलिए तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश मेहनचंद महाजन ने भारत संविधान को  भव्य तक कहा था। लंदन में कभी विश्व प्रसिद्ध संग्रहालय में कार्ल-मार्क्स के साथ एकमात्र भारतीय के रूप में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की प्रतिमा लगाई गई। वे कुल नौ भाषाओं के जानकार थे। संविधान दिवस को नेशनल डे (नवम्बर, 27) के रूप में भी मनाया जाता है। हमारा संविधान दुनिया का सबसे बड़ा हस्तलिखित संविधाना माना जाता था। तब इसे टाइप या प्रिंट न करवाकर कॉरिआफ करवाया गया था। और कुछ अन्य देशों ने इसी को आधार बनाकर अपना संविधान रचा है। संविधान के लागू (21 जनवरी 1950) होते ही निष्पक्ष न्याय प्रणाली लागू हुई। इसकी रचना में कुल 2 साल 11 महीने और 17 दिन का समय लगा था।

संविधान सभा में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, जवाहर लाल नेहरू, मौलाना अब्दुल कलाम आजाद और सरदार पटेल जैसे लोग शामिल थे। संविधान की रचना के बारे में रोचक जानकारी यह है कि जब यह तैयार हो गया तो खुशी-खुशी में जवाहरलाल नेहरू ने डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की जगह खुद हस्ताक्षर कर दिए। डॉ. प्रसाद ने पृष्ठ पर तिरछे हस्ताक्षर किए थे जबकि नियमानुसार संविधान सभा के अध्यक्ष होने के चलते पहले डॉ. प्रसाद को दस्तखत करने थे। संविधान की हिन्दी और अंग्रेजी में पहली प्रति केलीग्राफी आर्टिस्ट प्रेम बिहारी राजदां ने इटालिक स्टाइल में तैयार की थी और यह 251 पृष्ठों में 99 निबों की पेनों से तैयार किया गया था। जब राजदां साहब से इसके पारिश्रमिक की बात चली तो उन्होंने कहा कि संविधान के अंतिम पृष्ठ पर उनके दादा नारायण राजदां का नाम होना चाहिए। संविधान की दोनों प्रतियों पर उनका एवं उनके दादा का नाम है। यह प्रति 16 इंच की चौड़ी तथा 22 इंच की लंबी थी। इसके चित्र नंदलाल बोस ने 141 बैठकों के बाद बनाए थे। जिनसे इसके 22 अध्यायों की शुरूआत नंदलाल बोस के बनाए चित्रों से होती है।
नवीन जैन (ये लेखक के अपने विचार हैं)

यह भी पढ़ें:

जानें राज-काज में क्या है खास

सरदार पटेल मार्ग स्थित बंगला नंबर 51 में बने भगवा वाले ठिकाने पर एक ऐसी कुर्सी है, जो पिछले 27 दिनों से खाली है।

22/07/2019

वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के उपाय

सरकार का कहना है कि थर्मल के स्थान पर बिजली के दूसरे स्रोतों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जैसे जल विद्युत को। कोयले को जलाने से वायु प्रदूषित होती है, यह तो सर्वविदित है और इसके विकल्प हमें खोजने ही चाहिए, लेकिन जल विद्युत के सम्बन्ध में भ्रम व्याप्त हैं।

03/03/2020

सबके हाथ में है संविधान

एक समय था जब हम इंकलाब के नारे लगाकर कहते थे कि स्वाधीनता हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है और हम इसे लेकर रहेंगे।

30/01/2020

सबसे तेज अर्थव्यवस्था का सच

वर्ष 2014 में भाजपा ने आर्थिक विकास के मुद्दे पर चुनाव जीते थे। भाजपा का कहना था कि कांग्रेस में निर्णय लेने की क्षमता नहीं रह गई थी।

30/04/2019

जानिए, राजकाज में क्या है खास?

भगवा वाली पार्टी के नेता पहले जयचंदों की करतूतों से उबर भी नहीं पाए कि अब स्काइलैब नेताओं ने संकट बढ़ा दिया है। ऊपर से थोपे गए स्काइलैबों के सामने सालों से एड़ियां रगड़ने वालों की कोई पूछ नहीं है। स्काइलैब नेता खुद भले ही विधानसभा का चुनाव नहीं जीत सके, लेकिन स्थानीय निकाय चुनावों में जीत दिलाने का दावा भर रहे हैं।

04/11/2019

भारत की कूटनीतिक उपलब्धि

भारत सरकार के अथक प्रयासें के बाद अंतर्राष्ट्रीय दबाव में जर्जर अर्थव्यवस्था वाले पाकिस्तान ने स्वीकारा है कि उसकी धरती पर मदरसों में घृणा का पाठ पढ़ाया जाता रहा है। स

06/05/2019

भारत के चुनाव और विदेशी मीडिया

भारत के लोकसभा के आम चुनाव पर सारे संसार की नजरे टिकी हुई हैं। संसार के सभी प्रमुख समाचारपत्र इस चुनाव का विश्लेषण कर रहे हैं।

10/05/2019