Dainik Navajyoti Logo
Thursday 23rd of January 2020
 
ओपिनियन

संविधान और डॉ. आम्बेडकर

Friday, December 06, 2019 13:05 PM
डॉ. भीमराव अम्बेडकर (फाइल फोटो)

डॉ. भीमराव अम्बेडकर को सिर्फ दलितों के उद्धार नायक के रूप में देखकर उनका स्मरण करना दरअसल उनके सम्पूर्ण और विराट व्यक्तित्व की अनदेखी करना होगा। उन्होंने स्वतंत्र भारत के संविधान का जो खाका (1947-1950) के बीच तैयार किया था, उसे आज भी भारत में कई विद्वान अमर कृति तक कहते हैं। डॉ. अम्बेडकर की असाधारण स्मरण शक्ति, बुद्धिमता, ईमानदारी, विभिन्न विषयों की गहरी जानकारी, नियमितता, दृढ़ता और प्रचंड संग्रामी स्वभाव की अगर आजाद भारत में किसी एकमात्र व्यक्ति की जा सकती है, तो वह है महात्मा गांधी, क्योंकि गांधीजी के बाद में प्रसिद्ध वैज्ञानिक अल्बर्ट आइन्स्टीन ने यहां तक कह दिया था कि गांधीजी के सम्पूर्ण व्यक्तित्व को देखकर आने वाली पीढ़ियां शायद ही भरोसा करें कि हाड-मांस से बना एक आदमी पृथ्वी पर ऐसा भी जन्मा था। डॉ. अम्बेडकर की प्रशंसा में विभोर होकर यह बात नहीं की जा रही है। कारण कभी दुनिया के कई बुद्धिदां उन्हें तत्कालीन भारत के पहले छह सबसे ज्यादा बुद्धिवाले राजनेताओं में रखते थे।

डॉ. अम्बेडकर का जन्म अप्रैल, 14, 1891, को मध्यप्रदेश के महू (अब अम्बेडकर नगर) नगर में हुआ था, जहां उनके जन्म दिवस पर हर साल कुंभ जैसा मेला लगता है। अम्बेडकर नगर में डॉ. भीमराव अम्बेडकर की एक विशाल प्रतिमा भी स्थित है। स्कूली शिक्षा के दौरान एक ब्राह्मण शिक्षक ने अपने शिष्य बालक भीमराव की बुद्धिमता को पहचाना था। उक्त शिक्षक महोदय का साया लम्बे समय तक भीमराव साहब के लिए मां के आंचल जैसा साबित हुआ। बालक अम्बेडकर ने अपने शिक्षक के भरोसे को आजीवन कायम रखकर बताया, क्योंकि वे कुल मिलाकर 64 विषयों में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त कर चुके थे और कहा यह भी जाता है कि उनके पास 32 डिग्रियां थीं, उन्हें कई विदेशी विश्वविद्यालयों ने मानद डॉक्टरेट की उपाधि दी थी। उनके निजी पुस्तकालय में 50 हजार से ज्यादा पुस्तकें थीं।

डॉ. अम्बेडकर की साफ धारणा कि समग्र हिंदुत्व की परिभाषा दीवारों से घिरी हुई नहीं है। उनके तेजस्वी व्यक्तित्व को देखते हुए ही 1913 में बड़ौदा राजघराने के तत्कालीन महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ ने उन्हें वजीफा देकर विदेश भेजा था। अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी में भीमराव साहब ने राजनीति शास्त्र, अर्थशास्त्र, समाज शास्त्र, विज्ञान, मानव विज्ञान, दर्शन जैसे विषयों का गहरा अध्ययन किया। उन्हें अमेरिकी प्रवास के दौरान वहां के जिस समाज और राजनीति के मिले-जुले दर्शन हुए उससे डॉ. अम्बेडकर के पूरे व्यक्तित्व गठन में बहुत कामयाबी मिली। इसी यात्रा के दौरान उन्होंने जो शोध-पत्र पढ़ा था, उसे आज भी यादगार माना जाता है। उससे उनके व्यक्तित्व की दुनिया भर में तारीफ हुई थी। मरणोपरांत भारतरत्न से सम्मानित डॉ. अम्बेडकर का सबसे पहला सिद्धांत था जीवन महान होना चाहिए लंबा नहीं। ज्ञान का विकास मनुष्य का अंतिम लक्ष्य होना चाहिए। इसी कारण वे शिक्षा को सबसे पहले नम्बर पर रखते थे। उनका यह भी कहना था कि जो व्यक्ति आत्मसम्मान से नहीं जीना चाहता उसकी किसी भी समाज में इज्जत नहीं होती।

डॉ. अम्बेडकर अपने माता-पिता की 14वीं आखिरी जीवित संतान थे। उन्होनें स्वयं दो विवाह किए थे । वे मानते थे कि पति- पत्नी को मित्रों की तरह रहना चाहिए। डॉ. आम्बेडकर मानते थे कि किसी भी विद्वान को समाज सेवा के लिए हरदम तैयार रहना चाहिए। उनकी मौलिक अधिकारों में अडिग आस्था थी। इसी तरह वे मानवाधिकारों के जबर्दस्त पैरोकार थे। इस बात पर वे हरदम प्रफुल्लित हुआ करते थे कि हमारे संविधान ने व्यक्ति को एक इकाई के रूप में स्वीकार कर लिया है। शायद  इसीलिए तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश मेहनचंद महाजन ने भारत संविधान को  भव्य तक कहा था। लंदन में कभी विश्व प्रसिद्ध संग्रहालय में कार्ल-मार्क्स के साथ एकमात्र भारतीय के रूप में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की प्रतिमा लगाई गई। वे कुल नौ भाषाओं के जानकार थे। संविधान दिवस को नेशनल डे (नवम्बर, 27) के रूप में भी मनाया जाता है। हमारा संविधान दुनिया का सबसे बड़ा हस्तलिखित संविधाना माना जाता था। तब इसे टाइप या प्रिंट न करवाकर कॉरिआफ करवाया गया था। और कुछ अन्य देशों ने इसी को आधार बनाकर अपना संविधान रचा है। संविधान के लागू (21 जनवरी 1950) होते ही निष्पक्ष न्याय प्रणाली लागू हुई। इसकी रचना में कुल 2 साल 11 महीने और 17 दिन का समय लगा था।

संविधान सभा में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, जवाहर लाल नेहरू, मौलाना अब्दुल कलाम आजाद और सरदार पटेल जैसे लोग शामिल थे। संविधान की रचना के बारे में रोचक जानकारी यह है कि जब यह तैयार हो गया तो खुशी-खुशी में जवाहरलाल नेहरू ने डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की जगह खुद हस्ताक्षर कर दिए। डॉ. प्रसाद ने पृष्ठ पर तिरछे हस्ताक्षर किए थे जबकि नियमानुसार संविधान सभा के अध्यक्ष होने के चलते पहले डॉ. प्रसाद को दस्तखत करने थे। संविधान की हिन्दी और अंग्रेजी में पहली प्रति केलीग्राफी आर्टिस्ट प्रेम बिहारी राजदां ने इटालिक स्टाइल में तैयार की थी और यह 251 पृष्ठों में 99 निबों की पेनों से तैयार किया गया था। जब राजदां साहब से इसके पारिश्रमिक की बात चली तो उन्होंने कहा कि संविधान के अंतिम पृष्ठ पर उनके दादा नारायण राजदां का नाम होना चाहिए। संविधान की दोनों प्रतियों पर उनका एवं उनके दादा का नाम है। यह प्रति 16 इंच की चौड़ी तथा 22 इंच की लंबी थी। इसके चित्र नंदलाल बोस ने 141 बैठकों के बाद बनाए थे। जिनसे इसके 22 अध्यायों की शुरूआत नंदलाल बोस के बनाए चित्रों से होती है।
नवीन जैन (ये लेखक के अपने विचार हैं)

यह भी पढ़ें:

बगदादी के बाद भी खतरा खत्म नहीं

इस्लामिक स्टेट के प्रमुख अबू बकर अल-बगदादी की मौत से दुनिया के कई देशों पर मंडराता रहा आतंकी खतरा क्या खत्म हो गया है? सवाल का सीधा जवाब सिर्फ है, नहीं।

08/11/2019

अमेरिका ने पाकिस्तान की नींद उड़ाई

पाकिस्तान की बदनाम गुप्तचर एजेंसी आईएसआई का वह पालतू आतंकवादी है, पाकिस्तान ने भारत में दंगे कराने, अपराध कराने के लिए दाउद इब्राहिम को एक हथकंडे के तौर पर इस्तेमाल करता है।

09/07/2019

कांग्रेस का सोशल इंजीनियरिंग फार्मूला

कांग्रेस के सात प्रत्याशी बीकानेर से पूर्व पुलिस अधीक्षक मदनगोपाल मेघवाल, भरतपुर से अभिजीत कुमार जाटव, करौली-धोलपुर से संजय कुमार जाटव, दौसा से सविता मीणा, अजमेर से रिजु झुंझुनूवाला, जोधपुर से वैभव गहलोत, झालावाड़ से प्रमोद शर्मा पहली बार चुनाव लड़ने जा रहे हैं।

06/04/2019

भारत की कूटनीतिक उपलब्धि

भारत सरकार के अथक प्रयासें के बाद अंतर्राष्ट्रीय दबाव में जर्जर अर्थव्यवस्था वाले पाकिस्तान ने स्वीकारा है कि उसकी धरती पर मदरसों में घृणा का पाठ पढ़ाया जाता रहा है। स

06/05/2019

जलवायु परिवर्तन से बंजर होती जमीन

जलवायु परिवर्तन समूची दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है। जलवायु परिवर्तन से जहां समुद्र का जलस्तर बढ़ने से कई द्वीपों और दुनिया के तटीय महानगरों के डूबने का खतरा पैदा हो गया है।

08/11/2019

ऐसे हालात में कैसे बचेंगे बाघ

आंकड़ों की मानें तो 2012 से 2015 के बीच जहां बाघों की मौत का आंकड़ा दो अंको के करीब था, वह साल 2016 में बढ़कर तीन अंकों को पार कर गया।

20/05/2019

गरीबी जड़ से खत्म हो सकती है...

भारत में गरीबी बहुत बड़ी समस्या है। आजादी के इतने वर्षों बाद भी हम गरीबी को जड़ से खत्म नहीं कर सके। कई सरकारें आई और गई ।

08/05/2019