Dainik Navajyoti Logo
Thursday 29th of October 2020
 
ओपिनियन

सभी रंग तुम्हारे निकले!

Monday, April 22, 2019 11:10 AM

‘शायरी’ मेरे लिए शब्द के माध्यम से अपने होने का रूपक रचने की कोशिश है। सारी भौतिक-अभौतिक सृष्टि रूपकों के एक परस्पर-संबद्ध सिलसिले में पिरोई हुई है। शायरी को भी भौतिक कायनात में से आदमी बरामद करने के रचनात्मक संघर्ष से परिभाषित किया जा सकता है। शब्द के जरिए होने वाला लाक्षणिक और सांकेतिक रचना-कर्म भेदों और रहस्यों से भरा और बंद बस्ता है। मैंने इस भेदों भरे बस्तों को खोलने की अपनी कोशिश की है, मगर ये दावा हर्गिज नहीं कि इस राज की गिरह खोल ली है। यह कहना है, युवा शायर सालिम सलीम का।

इनकी शायरी पर हाल ही ‘सभी रंग तुम्हारे निकले’ और ‘वाहिमा वजूद का’ पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। इन दिनों दिल्ली में पीएचडी कर रहे हैं। उत्तरप्रदेश के आजमगढ़ के बिलरियागंज में जन्मे। शनिवार को राजधानी जयपुर लफ्ज समारोह में शिरकत करने आए थे। उनका कहना है कि शायरी के रंग, कई डायमेंशन्स लिए होते हैं। यह कितने ही अंधेरे-उजालों से होकर गुजरती है। मालूम से नामालूम तक का एक रचनात्मक संघर्ष है। कहीं कुछ छूट जाता है और कहीं कुछ पाने की आस होती है। शायरी के लिए जख्म खाने पड़ते हैं और चोटें सहनी पड़ती हैं।

अपने और दुनियावी अनुभवों में तलाश होती है। जिन्हें लफ्जों में पिरोया जाता है। लफ्जों के बीच की खामोशी और टकराव को अनुभव किया जाता है, तब लफ्ज, मिसरों का रूप लेने लगते हैं। उठान के लिए मिसरों को जोड़ना पड़ता है। युवा शायरों को चाहिए वे गालिब, मीर के साथ-साथ, दाग को भी जरूर पढ़ें। मिसरों की मैकेनिज्म, दो मिसरों के संबंध को समझाने वाला असल उस्ताद दाग हैं। गजल के लिए ‘रिद्म’ जरूरी है। आजादी के साथ पाबंदी भी जरूरी है। शायरी खबर नहीं, दीवार पर लिखी इबारत भी नहीं, बल्कि इसके पीछे छिपे भावों की अनूठे तरीके से अभिव्यक्ति होती है।

फिर, शायरी और नाशायरी में बारीक फर्क है। शायरी जितना दिखाने का नाम है, उससे ज्यादा छिपाने का नाम है। मेरी जिंदगी अजीबोगरीब मोड़ों से गुजरी है। कहीं मायूसी, तन्हाई, कहीं खुशी, कहीं गम, अपने वजूद की तलाश आत्मा और जिस्म के रूप में। मैं अपने गांव में डाक के जरिए दूसरे लोगों के घर आने वाली शेरोशायरी की किताबें देखता था, तो मुझे भी शौक हुआ। गालिब से लेकर साहिर तक शायरी जमकर पढ़ी। इसके बाद लिखने का सिलसिला शुरू। पेश हैं, विभिन्न आयामों में लिखी गजलों के चंद शेर-‘घर में रखता हूं अगर, शोर मचाती है बहुत, मेरी तन्हाई को बाजार की बीमारी है’। ‘बदन था सोया हुआ रूह जागती हुई थी, ये कैसी रात मिरे दर्मियां रूकी हुई थी’। 

‘तुम आ गए हो तो फिर उम्र भर यहीं ठहरो बदन से कोई भी रस्ता नहीं निकलने का’। ‘सिमटना चाहती है रात मेरी आंखों में, सितारे मेरे बदन में उतरना चाहते हैं’। ‘कुछ भी नहीं है बाकी बाजार चल रहा है, ये कारोबार-ए-दुनिया बेकार चल रहा है’। ‘तुम आओ तो कुछ उस की मिट्टी इधर-उधर हो, अब तक तो दिल का रस्ता हमवार चल रहा है’। ‘सूखे हुए होंठो को भिगोने में लगा हूं, सैराब हैं सब और मैं रोने में लगा हूं’।

‘रगों में फूटने वाला है ताजा ताजा लहू, कि आज उस से मुलाकात होने वाली है। ‘हम निकल आए हैं खुद अपने ही साहिल के करीब, तेरे बहते हुए धारों की तरफ जाते हुए’। ‘कैसा हंगामा बपा है कि मिरे शहर के लोग, खामुशी ढूंढने गारों की तरफ जाते हुए’। ‘अपने जैसी कोई तस्वीर बनानी थी मुझे, मिरे अंदर से सभी रंग निकले’।

- महेश चन्द्र शर्मा

यह भी पढ़ें:

जल स्त्रोत अतिक्रमण व प्रदूषण के शिकार

दु:ख का विषय है कि मरुप्रदेश के ये परम्परागत जल स्रोत अतिक्रमण, अनदेखी, उपेक्षा व प्रदूषण का शिकार होते हुए लुप्तप्राय व मृतप्राय हो रहे है।

07/12/2019

ब्रिक्स : आपसी हितों का प्रभावी मंच

वैश्विक स्तर पर वित्तीय मामलों में परामर्श देने वाली संस्था गोल्डमैन शश के प्रमुख कार्यकारी निदेशक जिम-ओ-नील ने 2001 में अपने एक लेख में लिखा था कि ब्राजील, रूस, भारत और चीन (बीआरआईसी) की अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत होगी कि साल 2050 तक यह देश दुनिया के आर्थिक ढांचे का निर्धारण करते दिखेंगें।

15/11/2019

राजस्थान में बिजली महंगी

विकास के नाम पर प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि के आकड़े दर्शाए जाते हैं, लेकिन इसकी तुलना इस बात से भी की जानी चाहिए कि पूर्व जीवन स्तर को ही अर्जित करने में लागत में कितनी बढ़ोत्तरी हुई है।

04/03/2020

जानिए, राजकाज में क्या है खास?

भगवा वाले नड्डा के अपनी नई टीम घोषित करने के साथ ही सूबे में प्रतिस्थापन की चर्चाएं शुरू हो गई। सरदार पटेल मार्ग स्थित बंगला नंबर 51 में बने भगवा वालों के ठिकाने पर चर्चा है कि इस रिप्लेसमेंट की पीछे कई राज छिपे है। मोदी टीम में बदलाव से पहले मैडम को किनारा करने में जुटे लोगों को संदेश देना जरुरी था।

28/09/2020

पृथ्वी पर जीवन: जरूरी है ओजोन की रक्षा

जलवायु परिवर्तन का सबसे ज्यादा असर ओजोन परत पर पड़ा है जिससे उसके लुप्त होने का खतरा मंडराने लगा है। दरअसल वायुमंडल के ऊपरी हिस्से में लगभग 25 किलोमीटर की ऊंचाई पर फैली ओजोन परत सूर्य की किरणों के खतरनाक अल्ट्रावायलट हिस्से से पृथ्वी के जीवन की रक्षा करती है

16/09/2016

कानून को जन प्रिय बहुमत नहीं

नागरिकता संशोधन कानून संसद में पारित हो गया है। जिस भारी बहुमत के साथ भारतीय जनता पार्टी चुनाव में विजयी हुई थी, उसे देखते हुए कानून का पारित न होना ही आश्चर्य की बात होती। अब देशभर में इस कानून को लेकर प्रतिक्रिया हो रही है। इस कानून का विरोध करने वाले सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंच गए हैं- वे इस कानून को संविधान विरोधी बता रहे हैं।

20/12/2019

न्यायालयों में भ्रष्टाचार!

बावजूद इसके की समय-समय पर अदालतों के कथित भ्रष्टाचार के उदाहरण सामने आते रहे हैं, कुल मिलाकर देश की जनता को भरोसा है। इसीलिए बार-बार अदालतों में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाने की बातें की जाती हैं।

06/09/2019