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ओपिनियन

आंध्र प्रदेश में एक बार फिर शराब बंदी

Monday, October 14, 2019 10:45 AM
फाइल फोटो

जब देश में कर प्रणाली सुधारने के लिए जीएसटी को लागू करने पर विचार विमर्श हो रहा था तो उनमें से एक मुद्दे पर सर्व सहमति थी कि मदिरा, पेट्रोल डीजल और तंबाकू उत्पादों को इससे बहार रखा जाए। तर्क यह था कि इन पर कर राज्य सरकारों के अधिकारों के अंतर्गत आता है। लेकिन इसके पीछे असली कारण यह था कि राज्य सरकारों को सबसे अधिक आय इन्हीं मद्दों से आती है।


पिछले कई वर्षों से राजनीतिक दल चुनावों में सत्ता पाने के लिए लोगों से जो बड़े वायदे करते है उनमें से कर्जे माफ करना एक बड़ा वायदा होता है। इसी प्रकार राज्य सरकारें  अपनेबजट में ऐसा कोई  नया कर नहीं लगाना चाहती जिससे आम व्यक्ति नाराज हो। चूंकि देश में जीएसटी लागू हो जाने के बाद अब राज्य सरकारों के पास अब केवल यही तीन विषय बचे है जिन पर वे कर और बढ़ाकर फर्ज माफी को समाहित कर सकती हैं।


इसमें सबसे पहले आता हैं  शराब। एक तरफ  तो कई पार्टियां वायदा करती है कि वे सत्ता में आने पर प्रदेश में शराब बंदी लागू करेंगी। लेकिन जब  वे सत्ता में आती है तो उनके सामने यह समस्या आती है समुचित राजस्व जुटने के लिए  क्या किया जाए, तो उनके पास इन तीन विषयों पर कर बढ़ाने  के अलावा और कोई विकल्प नहीं  होता। अगर गुजरात, जहां 1960 से शराब बंदी को छोड़ दिया जाए तो देश के अन्य राज्यों में जहां शराब बंदी लागू की गयी वह अधिक दिन नहीं चली और फिर कुछ वर्षों में ही शराब बंदी को ख़त्म कर दिया गया। शराब एक ऐसी चीज है जिसकी बिक्री में कभी कमी नहीं होती। हॉल के सर्वेक्षण में यह बात सामनेआई कि देश औसतन शराब की खपत में सालाना लगभग 35 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है। इसलिए जिन राज्यों में शराब बंदी नहीं है। उनके राजस्व में इस मद पर लगातार वृद्धि हो रही है। तमिलनाडु में तो कुल राजस्व का लगभग एक चौथाई  राजस्व इसी मद से आता है। इस मद पर इसका राजस्व लगभग 30000 करोड़ है। कर्नाटक सरकार सालाना शराब पर कर  से लगभग 21,000 करोड़ रूपये कमाती है। यहां तक कि हरियाणा जैसा  छोटा राज्य भी इस कर से  लगभग 20,000 करोड़ रूपये अर्जित करता है तमिलनाडु तथा हरियाणा में एक समय शराब बंदी लागू  की गई थी लेकिन कुछ ही वर्षों में यह खत्म कर दी गई।


आन्ध्र प्रदेश में मई के विधानसभा चुनावों में वाईएसआर कांग्रेस ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में कहा था कि अगर पार्टी सत्ता में आई तो  राज्य में शराब बंदी लागू की जाएगी। इस राज्य में 1992 में शराब बंदी हुई थी उस समय तेलगुदेशम पार्टी सत्ता में थी लेकिन पांच साल बाद इसे समाप्त करना  पड़ा। क्योंकि सरकार के राजस्व बढ़ाने के लिए और कोई विकल्प नहीं था। मई में मुख्यमंत्री का पद संभालने के तुरंत बाद जगन मोहन रेड्डी ने कहा राज्य में शराब बंदी लागू करना  उनकी सरकार की प्राथमिकता है। राज्य में कुल लगभग 4000 शराब बेचने की खुदरा दुकाने है। राज्य सरकार राजस्व  के रूप में सालाना इससे लगभग 13,000 करोड़ रुपये अर्जित करती थी। रेड्डी ने राज्य में शराब बंदी लागू किए जाने की  घोषणा करते हुए कहा इसे चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।  सरकार ने एक आदेश जारी कर सभी निजी शराब की दुकानों को अपने हाथ में ले लिया। कुछ दिनों में इनमें से एक हजार दुकानों को बंद कर दिया गया। मोटे तौर पर इससे राज्य सरकार को शराब पर होने वाली कुल कमाई में लगभग 20 प्रतिशत का घाटा होगा। शराब बंदी का अगला कदम क्या होगा और कब उठाया जाएगा? इसके बारे में अभी कोई संकेत नहीं दिया गया है। लेकिन इस धंधे में लगे लोगों का कहना है कि इससे राज्य में शराब की खपत में कोई कमी नहीं आएगी लेकिन सरकार को राजस्व का जरूर घाटा होगा। कारण यह बताया गया है कि इससे पड़ोसी राज्यों, विशेषकर कर्नाटक से तस्करी से शराब राज्य में आएगी।

कर्नाटक सरकार ने चालू वर्ष में शराब पर आबकारी कर से लगभग 21,000  करोड़  अर्जित करने  का लक्ष्य रखा है लेकिन अब आबकारी   विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अब इसमें 5 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है। ताजÞा आंकड़ों के अनुसार  राज्य के आंध्र प्रदेश की सीमा से लगे कर्नाटक के इलाकों में शराब की बिक्री तेजी से बढ़ रही है।

हालांकि वे यह दावा कर रहे हैं कि इन इलाकों से आन्ध्र प्रदेश में शराब की तस्करी पर कड़ी नजर रखी जाएगी। लेकिन सच्चाई यह है कि वे इस नई स्थिति से प्रसन्न क्योंकि राज्य इस मद में अब लक्ष्य कहीं अधिक राजस्व मिलेगा। शराब के धंधे में लगे लोगों का कहना है जहां-जहां शराब  बंदी लागू की गई वहां-वहां शराब बंदी के बाद पड़ोसी राज्यों से शराब तस्करी के जरिए वहां पहुंचनी शुरू हो गई। नितीश कुमार के नेतृत्व वाली बिहार सरकार ने जब वहां शराब बंदी लागू की तो दावा किया कि पड़ोसी राज्यों से एक बूंद भी शराब राज्य में नहीं आने दी जाएगी। जबकि आंकड़े बता रहे है बिहार के पड़ोसी राज्यों, झारखण्ड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम  बंगाल से राज्य के सीमा से सटे इलाकों में शराब की बिक्री  पहले राज्यों से कहीं बढ़ गए है और यह माना जाता है कि यहां से शराब तस्करी से बिहार पहुंच रही है। देश के उत्तर पूर्व के राज्यों में  वर्तमान में नागालैंड में फिलहाल शराब बंदी है लेकिन वहां असम से तस्करी से शराब पहुंच रही।

वहां के सरकार ने एक मंत्री ने ही चुटकी लेते हुए कहा था कि नागालैंड इस वेटेस्त ड्राई स्टेट नागालैंड शराब बंदी वाला ऐसा राज्य हैं जहां शराब की सबसे अधिक खपत है। आजादी के बाद  संसद ने यह संकल्प लिया था कि सारे देश में 1958 तक पूरी तरह शराब बंदी हो जाएगी। लेकिन वस्तुस्थिति इसके विपरीत है और शराब की खपत लागत बढ़ रही। इसका एक ही उपाए है शराब को केंद्रीय सूचि में लाकर एक साथ पूरे  देश में शराब बंदी लागू कर दी जाए।

-लोकपाल सेठी, (ये लेखक के अपने विचार हैं)

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