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ओपिनियन

साहस शक्ति की प्रतीक श्रीमती इन्दिरा गांधी

Tuesday, November 19, 2019 10:00 AM
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (फाइल फोटो)

पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी ने अपनी पुस्तक ‘मेरी संसदीय यात्रा’ में लिखा है ‘ बंगलादेश निर्माण में इन्दिरा जी की भूमिका सदैव ही सराही जाएगी। जिस दृढ़ता से उन्होंने पाकिस्तान को परास्त करने की व्यूह रचना का नेतृत्व किया, जिसके अन्तर्गत विशाल पाकिस्तानी सेना को ढाका में हथियार डालने के लिए मजबूर होना पड़ा वह गर्व और गोरव से भरा प्रसंग है। राजनैतिक मतभेदों को उन्होंने व्यक्तिगत संबंधों में बाधक नहीं बनने दिया। उन्हें उनकी निजी योग्यता, कुशलता, निर्णय क्षमता तथा कठोरता के कारण सदैव याद किया जाएगा।’’

नेहरू के बाद कौन? किसी समय की एक पहेली का समुचित उत्तर स्व. लाल बहादुर शास्त्री व उनके बाद श्रीमती इन्दिरा गांधी ने भारत के प्रधानमंत्री पद की गहन और कठिनतम जिम्मेदारी को संभालकर किया। जब राष्ट्र ने प्रचण्ड बहुमत से उन्हें प्रधानमंत्री पद के लिए चुना तो अनेक लोगों ने खासकर पश्चिमी देशों ने, इस बात पर बड़ा ही अश्चर्य प्रकट किया था कि वे महिला होकर संसार के सबसे बड़े प्रजातंत्र के प्रधानमंत्री का जोखिम एवं कांटों भरा दायित्व कैसे पूरा करेगी। परन्तु इन्दिरा जी ने बचपन में ही फ्रान्स के महान पुरूष ‘जोन दि आर्क’ की कहानी पढ़ी थी और दृढ निश्चय किया था कि वे भी उसकी तरह कुछ करके दिखाएगी। उन्होंने दिखा दिया कि भारत की सरल व सेवार्पणा नारी शासन के सर्वोच्य पद पर पहुंचकर स्वयं करोड़ों भारतीयों की सुरक्षा और स्वतंत्रता की बागडोर संभाल सकती है। उन्होंने दुनिया को दिखा दिया कि इस देश की नारी महान है और स्वाभिमान की मूर्ति है, देश के गौरव के लिए जिन स्त्रियों ने त्याग और बलिदान किया है उनमें उनकी गिनती की जाती है।


1961 में अमेरिका के उपराष्टÑपति श्री जान्सन और श्रीमती जान्सन भारत के दौरे पर आए थे। अपना दौरा समाप्त कर जब श्रीमती जान्सन अमेरिका वापस गई, तब उन्होंने इन्दिरा गांधी और भारत के प्रति अपने वक्तव्य में कहा था ’’ भारत का सही दर्शन करना हो तो उसके गांवों में जाए, परिचय पाना हो तो कविवर रविन्द्र नाथ टैगोर की कविताएं पढ़े और यदि भारतीय जीवन का मर्म समझना हो तो इन्दिरा गांधी जैसी शिक्षिका कमा मार्गदर्शन प्राप्त करें मैं अपने को बडभागी मानती हूं कि मुझे ये तीनों अवसर मिले है। ‘‘श्रीमती जान्सन के इस वक्तव्य से स्पष्ट है कि विदेशी राजनेताओं के मन पर इन्दिरा जी की कितनी गहरी छाप थी। इन्दिरा का प्रधानमंत्री पदभार संभालना ऐशिया व देश के लिए नवयुग के मंगल प्रभात का सूचक साबित हुआ।


एक प्रसिद्ध पत्रकार ने उनसे पूछा आपकी लोकप्रियता का रहस्य क्या है? इन्दिरा जी ने उत्तर दिया ’’ मैं जनता से प्रेम करती हूं और जनता मुझसे प्रेम करती है, जनता प्रेम व सहानुभूति की ही तो भूखी है, जनता यह भी जानती है कि मुझे अपने लिए कुछ नहीं चाहिए और न ही मैं खुसामद पसन्द करती हूं। काम में व्यस्त रहने की मेरी आदत है, और मैं रहूंगी भी। मैं युवक कांग्रेस का प्रथम संयोजक था।

युवक कांग्रेस के अधिवेशन में उन्होेंने अपने भाषण में आन्दोलन के लिए उत्सुक छात्रों की सराहना की थी। उतावलेपन  को अच्छा लक्षण बताया था, उसे अनुशासनहीनता समझकर तिरस्कृत करने के स्थान पर उनकी शक्ति और बुद्धि का उचित उपयोग करने की सलाह दी थी, किन्तु साथ ही राजनीतिक मामलों के संबंध मेंं छात्रों को सतर्क करने की सलाह दी थी। श्रीमती गांधी समाज में महिलाओं व दलितों का सम्मान और स्थिति को सुधारने की आवश्यकता पर विशेष बल देती थी। उन्होंने महसूस किया कि हमारे देश में महिलाओं और दलितों को व्यवहारिक रूप से पूर्ण सामाजिक स्वतंत्रता व अधिकार प्राप्त नहीं है। समाज उन्हें समान अधिकार देने से भी राष्ट्र की उन्नति हो सकती है। उन्होंने कहा था कि हमारे देश की उन्नती के लिए केवल गृहणियों की ही नहीं बल्कि ऐसी महिलाओं की आवश्यकता है जो राष्ट्रीय उन्नति के लिए जी-जान से काम करे। इन्दिरा जी ने ही योजना के मूल उद्देष्य ’’ग्रोथ विथ स्टेबिलिटी‘‘ को नया रूप देकर ’’ग्रोथ विथ सोशियल जस्टिस‘‘ किया और प्रथम बार दलित विकास राशि को बढ़ाकर 1362 करोड़ किया था। लैण्ड सीलिंग एक्ट लागू कर दलितोें को भूमि पट्टे दिए जाने की कार्यवाही प्रारम्भ की। लाखों दलितों को सरकारी सेवा विशक मेडिकल, इंजिनियरिंग व ज्यूडीशियरी में अवसर मिला विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा शिक्षकों के पदों पर दलितों के आरक्षण को लागू करने का निर्णय लिया गया। 1976 में ही प्राईवेट सैक्टर में दलितों को 22.5 प्रतिशत आरक्षण का फैसला उन्हीं का था।


इन्दिरा जी के नेतृत्व में देश में ही नहीं विदेशों तक में हलचल मचा दी थी। अपने जीवन से परिस्थितियों का सामना किया। राजा महाराजाओं में उन्होंने राजनीति के अनेक उतार चढ़ाव देखे, किन्तु संघर्षरत रहकर जुझारूपन के विशेषाधिकार व प्रिवीयर्स की समाप्ति का उनका निर्णय, बैंकों का राष्टÑीयकरण कर बैंकों के द्वारा गरीब किसानों व आम आदमी तक पहुंचाने, गरीबों के सामाजिक, राजनैतिक व आर्थिक उत्थान के लिए व्यापक कार्यक्रमों का निर्धारण, हरित क्रांति की सफलता, आतंकवाद का दृढ़ता से मुकाबला, धर्मान्धता और साम्प्रदायिकता से जुड़ी ताकतों का मुकाबला, तत्कालीन अमेरिकी राष्टÑपति निक्सन को चुनौती, पाकिस्तान को हराकर शिमला समझौता करने को मजबूर करने की क्षमता इन्दिराजी जैसी महान नेता में ही दिखाई देती है। 1977 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस बुरी तरह पराजित हुई और जनता पार्टी के शासनकाल में उन पर मुकदमें चलाए गए। संसद में चुनी जाने पर उनकी सदस्यता समाप्त की गई और उनकी प्रतिष्ठा को गिराने का हरसंभव प्रयास हुआ, परन्तु आम जनता ने उनकी विलक्षण प्रतिभा से प्रभावित होकर पुन: 1980 में उन्हें सत्ता में ला दिया। अनेक बार मुझे श्रीमती गांधी को करीब से देखने का मौका मिला।

-डॉ. सत्यनारायण सिंह, आई.ए.एस.(आर.), (ये लेखक के अपने विचार हैं)



 

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