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Monday 19th of April 2021
 
नागौर

पक्षियों की मौत को लेकर सीएम और सरकार चितिंत

Tuesday, November 19, 2019 22:30 PM
नावां के पशु चिकित्सालय में बनाए गए रेस्क्यू सेंटर का मुआयना करते वन एवं जिला प्रभारी मंत्री सुखराम विश्नोई।

   नावांसिटी ।   जयपुर, नागौर व अजमेर जिले में फैली प्रसिद्ध खारे पानी की सांभरझील में लगातार पक्षियों के मरने एवं मृत पक्षियों की संख्या हजारों में पहुंचने पर मंगलवार को जिला प्रभारी एवं वन विभाग के काबीना मंत्री रामसुख विश्नोई नावां के पशु चिकित्सालय में घायल पक्षियों के लिए बनाए गए रेस्क्यू सेंटर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने उपचाररत पक्षियों का निरीक्षण किया एवं विभाग के अधिकारियों को सजगता से काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को गहनता से झील क्षेत्र का जायजा लेकर एक भी मृत पक्षी को झील में नहीं रहने देने एवं घायल पक्षी का इलाज करवाने के निर्देश दिए। इसके बाद पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एवं पूरी सरकार झील में हुई पक्षियों की मौत को लेकर चितिंत हैं। सीएम पूरी घटना एवं कार्यवाही की खुद मॉनीटरिंग कर रहे है। इसी क्रम में मंगलवार को भी सीएम ने दोपहर 12 बजे जयपुर में पक्षियों के मरने की घटना में ताजा जानकारी के लिए विभाग के अधिकारियों की बैठक ली है। मंत्री ने बताया कि मृत पक्षियों के सैम्पल बरेली व भोपाल भेजे हैं। आईवीआरआई की टीम इसकी जांच कर रही है, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद ही पक्षियों के मरने के कारणों का खुलासा हो सकेगा। अभी तक चिकित्सक पक्षियों में बॉटलिज्म की किसी तरह की बीमारी के कारण मौत होने का अनुमान लगा रहे हैं। झील के पानी के दूषित होने के कारण पक्षियों की मौत के सवाल पर उन्होंने कहा कि पानी का भी सैम्पल लिया गया है, जिसकी जाच रिपोर्ट आने वाली है। नागौर जिले में 3 दिन बाद कार्यवाही शुरू करने में संबंधित विभाग की लापरवाही के सवाल पर उन्होंने कहा कि पहले मौते सांभर क्षेत्र में हुई। अत: वहां कार्यवाही तीन दिन पहले शुरू कर दी गई थी। झील क्षेत्र केंद्र सरकार के अधीन साँभर साल्ट को लीज पर होने से जानकारी मिलने में विलंब हुआ। मंत्री ने माना कि मौतों का सिलसिला दस दिन से चल रहा है, जबकि विभाग के अधिकारी पांच दिन पहले शुरू होना बता रहे थे। मंत्री ने आगे पक्षियों के बचाव की योजना के बारे में बताया कि क्षेत्र में स्थायी रेस्क्यू सेंटर खोले जाएंगे। वहीं वन विभाग की वाइल्ड लाइफ की चौकी खोली जाएगी। इस दौरान एडीएम डीडवाना, तहसीलदार गुरूप्रसाद तंवर, पालिकाध्यक्षा पति नवीन गोधा, शौकत खान, बद्रीप्रसाद अग्रवाल, संपत्त मेघवाल, प्रतीक गहलोत, रोहित पारीक एडवोकेट, युनुस कुरेशी आदि मौजूद रहे। इसके बाद पालिका कार्यालय में मंत्री ने कार्यकर्ताओं से चाय के साथ बातचीत की।

मंत्री ने बताए आठ हजार जबकि मृत पक्षियों का आंकड़ा 10 हजार के पार

पे्रसवार्ता के दौरान वन मंत्री ने मृत पक्षियों की संख्या साढ़े आठ हजार बताई जबकि विभाग द्वारा प्रतिदिन जारी किए जाने वाले आंकड़ों के अनुसार संख्या दस हजार से भी अधिक है, जिसमें नावां रेस्क्यू सेंटर पर 15 नवंबर से जारी आंकड़ों के अनुसार सोमवार तक मृत पक्षियों की संख्या 8895 थी जबकि मंगलवार को टीमों ने 335 मृत पक्षी और निकाले। वहीं 52 पक्षियों को सेंटर पर उपचार के लिए लाया गया। इस दौरान जब मंत्री से पूछा गया कि पक्षियों की मौत का एक कारण झील में बिछी भूमिगत बिजली की अवैध केबलों से करंट लीक होना भी माना जा रहा है, तो मंत्री ने कह दिया कि एनजीटी के आदेशों के बाद झील क्षेत्र में एक भी केबल नहीं है। जबकि हकीकत ये है कि झील में भरे पानी की सतह पर ही कुछ केबले तो तैरती नजर आ रही है। भूमिगत केबलों का मकड़जाल फैला हुआ है। वास्तविकता से अवगत कराने पर मंत्री ने आगे फिर कार्यवाही करने की बात कह दी। 
 
घायल पक्षियों की तलाश के लिए लगाया ड्रॉन कैमरा
झील में मंगलवार को टापूनुमा इलाकों में जहां तक टीम के लोग नहीं पहुंच पाए, वहां पर मृत व घायल पक्षियों की जानकारी लेने के लिए विभाग ने पालिका के सहयोग से ड्रोन केमरे की सहायता से सर्वे किया। पशु चिकित्सक डॉ. मोतीलाल चौधरी ने बताया कि बुधवार को चिह्नित किए टापुओं पर टीम के लोग घायल व मृत पक्षियों को निकालने का काम करेंगे। उधार, मंगलवार को जयपुर की आईफा एनजीओ की टीम भी देर शाम यहां पहुंची व टीम के लोगों को घायल पक्षियों को फीडिंग करने के तरीकों व तापमान एवं रखरखाव के बारे में जानकारी दी। 
 
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